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यूपी: पुलिस की करतूत से कई बार दागदार हुई है वर्दी, इन जघन्य अपराध में जेल जा चुके हैं पुलिस वाले

Fri, 01 Oct 2021 03:01 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 01 Oct 2021 03:01 PM IST
सार

शाहपुर थाने में 20 साल पहले हुई हत्या का मामला हो या फिर चार साल पहले अपहरण कर फिरौती मांगने का हो। डॉक्टर से रंगदारी, राह चलते सराफ से लूट तक की वारदात में पुलिस वालों के नाम आ चुके हैं।

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Policemen jailed for heinous crimes like kidnapping ransom murder in Uttar Pradesh
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में खाकी पर हत्या का आरोप पहली बार नहीं लगा है। इसके पहले लूट, फिरौती, हत्या, अपहरण जैसे जघन्य अपराधों में पुलिस वालों पर ना सिर्फ केस दर्ज हुए,  बल्कि उन्हें जेल भी भेजा गया। दुर्भाग्यपूर्ण तो यह है कि जब इसकी जांच शुरू होती है तो फिर लीपापोती होकर रह जाती है। शाहपुर थाने में 20 साल पहले हुई हत्या का मामला हो या फिर चार साल पहले अपहरण कर फिरौती मांगने का हो। डॉक्टर से रंगदारी, राह चलते सराफ से लूट तक की वारदात में पुलिस वालों के नाम आ चुके हैं। ताजा मामलों में जांच जारी है तो पुराने मामलों में साक्ष्य ही पर्याप्त ना मिलने की वजह से बरी हो गए।  

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केस एक
18 दिसंबर 2017: उरूवा थाने में तैनात रहे ट्रेनी दरोगा अभिजीत कुमार और रघुनंदन त्रिपाठी को गिरफ्तार किया गया था। आरोप था कि बिहार के गोपालगंज के छात्र एहसान आलम को धोखे से उसका दोस्त अफजल गोरखपुर लाया था, फिर परिचित दोनों दरोगा की मदद से तीन लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। मामला संज्ञान में आने पर तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने दोनों पर केस दर्ज कराकर गिरफ्तारी कराई थी।
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केस दो
2006 में कुशीनगर जिले के एक कारखाने में युवक की हत्या हुई थी। जिसका सिर काट दिया गया था। आरोप था कि सरकारी जीप का इस्तेमाल कर दरोगा निर्भय नारायण सिंह ने शव को गंडक नदी में बहा दिया था। इस मामले में आईजी के आदेश पर केस दर्ज हुआ था और बाद में दरोगा की गिरफ्तारी भी हुई थी। यह मामला भी काफी चर्चित रहा था। इसमें पूरी कार्रवाई आईजी की देखरेख में हुई थी।
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केस तीन
2000 में शाहपुर थाने में पूछताछ को लाए गए एक युवक की मौत हो गई थी। आरोप था कि एएसपी ने मारपीट की, इसमें थानेदार भी शामिल थे। पुलिस ने इस मामले में हत्या का तत्कालीन थानेदार रहे संजय सिंह पर केस दर्ज किया था। बाद में उसकी गिरफ्तारी की गई थी और जेल भेजा गया था। तब एसएसपी विजय कुमार यहां पर थे और उनके आदेश पर ही कार्रवाई हुई थी, लेकिन माना जाता है कि इस मामले में एक प्रमुख सचिव के आदेश पर ही पुलिस हरकत में आई थी। हालांकि, बाद में मामला रफा दफा हो गया था।

 

केस चार

22 मई 2019 को वरिष्ठ मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रामशरण श्रीवास्तव से रंगदारी वसूलने के मामले में ट्रांसपोर्ट नगर चौकी इंचार्ज रहे शिव प्रकाश सिंह और कथित पत्रकार प्रणव त्रिपाठी पर एफआईआर दर्ज की गई थी।  दो लाख रुपये देने के बाद डॉक्टर ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर शिकायत की थी और उनके ही आदेश पर रातों रात पुलिस हरकत में आ गई थी। आरोपियों पर केस दर्ज करने के साथ ही उनकी गिरफ्तारी भी की गई थी। पुलिस ने इस मामले में रुपये भी वापस कराए थे। जांच अब भी जारी है।

केस पांच
21 जनवरी 2018: नौसड़ चौकी के पास सराफा व्यापारी से पुरना बस्ती थाने में तैनात सिकरीगंज के जगरनाथपुर निवासी दरोगा धर्मेंद्र यादव, मऊ जिले के सराय लखनसी के रैकवार निवासी सिपाही महेंद्र यादव, गाजीपुर के सिपाही संतोष यादव ने 35 लाख रुपये कीमत का सोना लूट लिया था। इस घटना के चार दिन पहले भी इन सभी ने सराफा व्यापारी से शाहपुर इलाके के पादरीबाजार में लूट की वारदात की थी। इन सभी को केस दर्ज कर जेल भेजा गया था और बर्खास्तगी भी हुई थी।

हाल के दिनों में भी पुलिस पर लगे आरोप
  • 7 सितंबर 2021: खजनी के महुआडाबर चौकी इंचार्ज अभिजीत कुमार ने युवक की पिटाई कर दी। वीडियो वायरल होने पर एसएसपी ने निलंबित कर दिया।
  • 20 अगस्त 2021: चौरीचौरा के होटल में खाना खाने गए युवक की सिपाही ने पिटाई कर दी थी। वीडियो वायरल होने पर कार्रवाई की गई थी।
  • 21 मई 2021: मॉस्क ना लगाने पर बांसगांव थाने के दरोगा, सिपाहियों ने व्यापारी की पिटाई कर दी थी। एसएसपी ने निलंबित किया था।
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