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ठंड में सक्रिय हो जाते हैं ये खास गिरोह, लूटपाट के लिए बेरहमी से बहा देते हैं खून

Wed, 28 Oct 2020 03:28 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 28 Oct 2020 03:28 PM IST
सार

  • एडीजी जोन ने दिए निर्देश, सड़क किनारे रहने वालों की करें जांच
  • बावरिया व कच्छा बनियान गिरोह के डकैतों पर रहेगी पुलिस की नजर

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Police alert to public for Bawariya and kaccha baniyan gang
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

ठंड की दस्तक के साथ ही वारदातों को अंजाम देने वाले कई गिरोह भी सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में एडीजी जोन ने पुलिस से सतर्क रहने और विशेष जांच अभियान चलाने को कहा है। एडीजी ने रेलवे स्टेशन और सड़क किनारे झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों की विशेष रूप से जांच करने के निर्देश दिए हैं।

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दरअसल, बावरिया व कच्छा बनियान गिरोह के बदमाश दिवाली के त्योहार से ही वारदात को अंजाम देना शुरू करते हैं। इसे देखते हुए ही एडीजी जोन ने सभी पुलिस कप्तानों को यह दिशा-निर्देश जारी किया है।
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जानकारी के मुताबिक, पूर्व में जोन के कई जिलों में बावरिया व कच्छा बनियान गिरोह के बदमाशों ने कई दुस्साहसिक घटनाओं को अंजाम दिया है। बावरिया गिरोह के सदस्य दिवाली की रात से लेकर कर होलिका दहन तक अलग-अलग जगहों पर जाकर वारदातों को अंजाम देते हैं। आमतौर पर ये लूट व डकैती के दौरान घर में मौजूद सदस्यों की हत्या तक भी कर देते हैं या उन्हें गंभीर रूप से घायल कर देते हैं।  
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ऐसे में एडीजी ने पुलिस को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। उन्होंने शहर के बाहरी इलाकों की नई कॉलोनियों में खासकर गश्त बढ़ाने के निर्देश दिया है। एडीजी ने कहा कि इस तरह के लोग डेरा डालकर रहते हैं और खिलौने, कागज के फूल आदि बेचने के बहाने कॉलोनियों में जाकर पहले रेकी करते हैं और फिर घटनाओं को अंजाम देते हैं। लिहाजा खिलौने बेचने वाले, भिखारियों और घुमंतू लोगों की विशेष तलाशी ली जाए।

 

गोरखपुर में इन वारदातों को अंजाम दे चुका है गिरोह

  • 20 नवंबर 2000: खोराबार के शिवाजीनगर में राकेश राय के परिवार के सात लोगों की हत्या कर लूटपाट की गई।
  • 21 अक्तूबर 2001: गोरखनाथ इलाके के वृंदावन कॉलोनी में तीन लोगों की हत्या कर डकैती हुई।
  • अक्तूबर 2010: गुलरिहा के लक्ष्मीपुर में संजीव श्रीवास्तव के घर के सदस्यों पर जानलेवा हमला कर लूटपाट।
  • वर्ष 2011: चिलुआताल इलाके के ग्रीन सिटी में हत्या कर लूटपाट की गई।
  • नवंबर 2015 : बेलीपार के मेहरौली में लालजी पाल के बेटे श्रीराम की हत्या कर लूट की गई। चार महिलाओं पर जानलेवा हमला हुआ था।
  • 19 अक्तूबर 2015: 19 अक्तूबर 2015 को पिपराइच के महमूदाबाद में मुंशीलाल व हनुमान पाल के घर में आठ लोगों को घायल कर डकैती हुुई थी।


(कुशीनगर जिले के तमकुही राज में भी बावरिया गिरोह ने छह लोगों को घायल कर लूटपाट की थी।)

 

ऐसे करते हैं वारदात

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, बावरिया गिरोह के बदमाश पहले शहर के बाहरी इलाकों में डेरा डालते हैं। गिरोह की महिलाएं खिलौने, कागज के फूल आदि बेचने के बहाने टोलियों में अलग-अलग इलाकों में जाकर रेकी करती हैं। लक्ष्य चिन्हित करने के बाद डकैती डालने से पहले लोहे की सरिया और अपने विशेष नुकीले औजारों की पूजा करते हैं।

रात के दो बजे के आसपास महिला सदस्यों के साथ गिरोह के पुरूष सदस्य निकलते हैं। चिन्हित मकान के पास से पेड़ की हरी डाल तोड़ते हैं। घर में दाखिल होते ही सो रहे लोगों के चेहरे पर टार्च की रोशनी डालते हैं और सिर पर प्रहार कर हत्या करते हैं। ये इतने क्रूर होते हैं कि छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ते।

एक जिले में एक घटना को अंजाम देकर दूसरे जिलों में चले जाते हैं। बावरिया गिरोह के सदस्य यदि किसी मकान को निशाना बनाते हैं तो वहां बिना खून बहाए वापस नहीं आते। खून गिराना ये अपने लिए शुभ मानते हैं। गोरखपुर में वर्ष 2000 में शिवाजी नगर की घटना के बाद तत्कालीन एसएसपी विजय कुमार ने बावरिया गिरोह की गतिविधियों पर आधारित एक पुस्तक लिखी थी। गिरोह की गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए वह वाराणसी तक गए थे।

ये बरतें सावधानियां...
  • अगर फेरी वालों से सामान खरीद रहे हैं तो उन्हें घर के अंदर ना आने दें।
  • भीख मांगने वाली महिलाओं व बच्चों से सतर्क रहें।
  • पड़ोसियों व रिश्तेदारों के मोबाइल नंबर अपने पास रखें ताकि जरूरत पर काम आ सके।
  • कोई आवाज होने पर हड़बड़ी में दरवाजा न खोलें। संदेह होने पर घर के अंदर व बाहर की लाइट जला दें और तत्काल पड़ोसी, रिश्तेदार व पुलिस को सूचना दें।

वैसे तो पुलिस हमेशा सतर्क रहती है, लेकिन ठंड को देखते हुए पुलिस को और सतर्कता बरतने को कहा गया है। रात्रि गश्त बढ़ाने व सीओ तथा थानेदार को रात के समय भ्रमणशील रहने को कहा गया है।- दावा शेरपा, एडीजी जोन
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