मनीष हत्याकांड: जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा की बढ़ाई गई न्यायिक अभिरक्षा, वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई पेशी
वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई दोनों आरोपितों की पेशी, तीन नवंबर तक न्यायिक हिरासत में, एसआईटी कानपुर का साक्ष्य संकलन पूरा नहीं होने पर कोर्ट ने दिया आदेश।
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गोरखपुर में कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत मामले में शुक्रवार को मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और चौकी इंचार्ज रहे अक्षय मिश्रा की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेशी हुई। दोनों आरोपियों को सीजेएम (मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) ज्योत्सना यादव की कोर्ट में पेश किया गया था।
यहां एसआईटी कानपुर की ओर से साक्ष्य संकलन पूरा नहीं होने की वजह से एसआईटी के सह प्रभारी ने कोर्ट में अर्जी दी। इसके बाद अदालत ने दोनों आरोपियों की 14 दिनों की न्यायिक हिरासत बढ़ाते हुए 3 नवंबर तक इसे जारी रखने का आदेश दिया है।
जानकारी के मुताबिक, आरोपी पुलिस वालों के अधिवक्ता पीके दुबे ने बताया कि सीजेएम कोर्ट में एसआईटी कानपुर से सह विवेचक छत्रपाल सिंह ने प्रार्थना पत्र देकर साक्ष्य संकलन पूरा नहीं होने का हवाला दिया है। जिसके कारण इंस्पेक्टर और दरोगा की 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा बढ़ाई गई है। एसआईटी का दावा है कि जल्द ही इस मामले में साक्ष्य संकलन पूरा कर मामले में चार्जशाट दाखिल कर दी जाएगी।
छह पुलिस वाले बनाए गए थे आरोपी, सभी जेल में
रामगढ़ताल इलाके के होटल कृष्णा पैलेश में 27 सितंबर की रात में इंस्पेक्टर जेएन सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा व अन्य पुलिस वाले चेकिंग करने को गए थे। आरोप है कि इस दौरान ही पुलिस वालों की पिटाई से मनीष की मौत हो गई थी। इस मामले में मनीष गुप्ता की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर छह पुलिसवालों के खिलाफ हत्या की धारा में केस दर्ज किया गया और मामले की जांच और विवेचना एसआईटी कानपुर को दी गई थी।
स्थानीय पुलिस की मदद से एसआईटी ने सभी आरोपियों को गिरफतार कर जेल भेजवा दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी जेएन और अक्षय मिश्रा की पहली पेशी शुक्रवार को थी। वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी कराई जाएगी। जेल प्रशासन ने इसकी तैयारी कर ली थी।