गोरखपुर ब्लास्ट के बाद ही दहली थी लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद की कचहरी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर में 22 मई 2007 को गोलघर के सीरियल ब्लास्ट के बाद ही लखनऊ, वाराणसी और फैजाबाद की कचहरी में बम धमाके हुए थे। इसके बाद पूरे सूबे में तहलका मचा और गोरखपुर के तत्कालीन सांसद (वर्तमान मुख्यमंत्री) योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया था। तभी गोपनीय रिपोर्ट ने सबके होश उड़ा दिए थे।
पता चला था कि गोरखनाथ मंदिर भी आतंकी निशाने पर है। इसके बाद एसटीएफ भी इस काम में लगी और आजमगढ़ के हाकिम तारिक कासमी, सलमान समेत तीन लोगों को दबोच लिया गया। बाद में काजमी ने पूछताछ में गोलघर में ब्लास्ट करने की बात कबूली थी। एक के बाद एक तीन धमाके को गोरखपुर के लोग आज भी नहीं भूल पाते हैं।
रेती की दो दुकानों से खरीदी गईं थीं तीन साइकिलें
बम ब्लास्ट करने के लिए तीन जगहों पर साइकिलें खड़ी कर टिफिन बम का इस्तेमाल किया गया था। जांच में पता चला था कि रेती रोड की दो दुकानों से तीन साइकिलें खरीदी गईं थीं, जिनका इस्तेमाल ब्लास्ट में किया गया। इस मामले में पहले दुकानदार भी पकड़े गए थे, लेकिन उनकी कोई भूमिका नहीं मिलने पर छोड़ दिया गया।
जलकल बिल्डिंग पर हुआ था पहला ब्लास्ट
जलकल बिल्डिंग से लेकर गणेश चौराहे तक तीन ब्लास्ट हुए थे। पहला ब्लास्ट जलकल बिल्डिंग के पास हुआ था, फिर बलदेवा प्लाजा के बाद धमाका हुआ था। तीसरा ब्लास्ट गणेश चौराहे के पास हुआ था।
नवागत थे एसएसपी, दूसरे धमाके के बाद मच गई थी भगदड़
22 मई 2007 की शाम सात बजे के आसपास पहला धमाका हुआ था। पुलिस मौके पर पहुंच गई थी, मगर इसी बीच दूसरा धमाका हो गया। इसके बाद भगदड़ मच गई। पुलिस लोगों को नियंत्रित कर पाती की गणेश चौराहा के पास तीसरा धमाका हो गया, जिसमें करीब आठ से ज्यादा लोग जख्मी हो गए।
इस घटना के तीन-चार दिन पहले ही एसएसपी आरके राय ने चार्ज लिया था। उन्हें कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि शहर को कैसे नियंत्रित किया जाए? बाद में रिटायर पुलिस वालों और मीडिया की मदद से उन्होंने शहर में फैली अफवाह को शांत कराकर अमन चैन बहाल किया था।
तीसरे दिन शहर में थे डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह
सीरियल ब्लास्ट के बाद कानून व्यवस्था पर सवाल उठा तो तीसरे दिन ही तत्कालीन डीजीपी और प्रमुख सचिव गृह दौरे पर गोरखपुर पहुंच गए थे। इसके बाद जांच एसटीएफ को सौंप दी गई थी। दो बड़े अफसरों के दौरे के बाद ही अफवाहों पर भी विराम लग गया था।