फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Cyber criminals making victims of fraud by adopting new tricks

Exclusive: अनजान दोस्ती व ऑफर से मालामाल बनने में गंवा रहे जमा पूंजी, जानिए बचने का एक मात्र सबसे बड़ा हथियार

Wed, 01 Dec 2021 10:56 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 01 Dec 2021 10:56 AM IST
सार

साइबर अपराधी नए-नए पैंतरे अपनाकर जालसाजी के शिकार बना रहे हैं। आम लोगों के साथ ही पुलिस व बैंक अफसर भी इसके झांसे में आ जा रहे हैं। प्रत्येक महीने के पहले बुधवार को कॉलेजों में साइबर जागरूकता दिवस मनाया जाता है।

विज्ञापन
Cyber criminals making victims of fraud by adopting new tricks
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

विस्तार

फेसबुक पर अनजान दोस्ती, रात में लड़कियों से वीडियो कॉलिंग पर बातचीत, चैटिंग और ऑफर देखकर मालामाल बनने की चाहत में खुद की जमा पूंजी भी लोग गंवा दे रहे हैं। साइबर अपराधी ऑनलाइन ठगी के नए-नए पैंतरे भी अपना रहे हैं। उनके झांसे में ऐसे बैंक अफसर, पुलिस वाले भी फंस जा रहे हैं जो दूसरे को साइबर क्राइम के खतरों से बचने का ज्ञान बांटते हैं।  
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक जिले में रोजाना तीन से चार लोग साइबर क्राइम के शिकार होते हैं। ठगी से बचने के लिए जागरूकता ही बचाव का तरीका है। ढेर सारी सावधानियां बरतकर खुद को साइबर अपराध से बचा सकते हैं। जिसकी सलाह आरबीआई के साथ पुलिस की साइबर सेल भी संदेश भेज कर देती है। जिले में एक साइबर थाना भी है, जहां सीधे सूचना देकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
विज्ञापन


इससे बचने की जरूरत
  • डाटा फीडिंग, फॉर्म फिलिंग और नौकरी की पेशकश करके ठगी हो सकती है।
  • अपने मोबाइल में एनीडेस्क, टीम व्यूवर, क्विक सपोर्ट जैसे एप डाउनलोड करने से बचें।
  • गलत नाम और पते के सुधार के नाम पर कूरियर कंपनी के अकाउंट में पेटीएम, फोन-पे से रुपये मांगने वालों से सजग रहें।
  • विज्ञापन
    विज्ञापन
  • सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से मित्रता करने से बचें, व्हाट्सएप नंबर मांगकर साइबर क्रिमिनल कोई अश्लील मैसेज दिखाकर स्क्रीन रिकॉर्ड करके ब्लैकमेल कर सकते हैं।
  • सोशल मीडिया पर किसी विदेशी व्यक्ति से दोस्ती पर महंगे गिफ्ट को कस्टम अधिकारी से छुड़ाने के नाम पर रुपये मांगे तो ना दें।

पहले सोशल मीडिया पर दोस्ती, फिर करते हैं ब्लैकमेल

फॉलोअर्स बढ़ाने के लिये बिना परखे लोग अनजान आईडी से जुड़ जाते और बाद में साइबर अपराध के शिकार होते हैं। सोशल मीडिया और डेटिंग एप पर फेक (फर्जी) आईडी बनाकर प्यार का ढोंग करते हैं और यूजर्स का विश्वास जीतकर निजी तस्वीर और वीडियो हासिल करते हैं। इसके बाद वायरल कर देंगे, कहकर डराते धमकाते हैं। मोटी रकम की मांग करते और कई बार जबरन अनचाहा काम करने के लिये मजबूर करते हैं।

महिला साइबर थाने में 69 केस दर्ज
गोरखपुर में बढ़ते अपराधों को रोकने के लिये अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर जिले में साइबर क्राइम से ठगी के मामलों के समाधान के लिए जिले में महिला साइबर थाना खोला गया। मार्च से अक्तूबर तक महिलाओं से संबंधित 69 केस दर्ज हो चुके हैं। इसके ज्यादातर पीड़ित महिलाओं की उम्र 17 से 30 वर्ष के बीच है। ज्यादातर शिकायतें फेसबुक और इंस्टाग्राम पर उनकी निजी तस्वीर, वीडियो और चैट के जरिए ब्लैकमेल किए जाने से संबंधित है।

एसएसपी डॉ विपिन ताडा ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने का सबसे बड़ा टूल जागरूकता है। साइबर ठगी के मामलों में जितनी जल्दी सूचनाएं मिल जाती हैं, रुपये वापस कराने में उतनी आसानी होती है। हाल के दिनों में पुलिस ने कई मामलों में ठगी के शिकार हुए लोगों से रुपये वापस कराए हैं। लोगों को साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूक किया जाता है।

 

यहां करें शिकायत

साइबर क्राइम से पीड़ित टोल फ्री नंबर 155260 पर शिकायत कर सकते हैं।

ये भी हैं साइबर क्राइम
सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट, ई-मेल, चैट व डिजिटल उपकरण के जरिये किसी को अश्लील या धमकाने वाले संदेश भेजना और किसी भी रुप में परेशान करना साइबर क्राइम के दायरे में आता है।

साइबर पुलिस ने इनके रुपये कराए वापस

केस एक

26 वीं वाहिनी पीएसी कैंप के पास रहने वाली एक महिला ने 16 सितंबर को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि ऑनलाइन ठग ने एक एप डाउनलोड करा उनके खाते से 43 हजार रुपये उड़ा लिए हैं। इसके बाद से ही टीम काम कर रही थी और 18 सितंबर को खाते में 43 हजार वापस कराने में साइबर पुलिस सफल रही।

केस दो
शाहपुर इलाके के तुलसीराम में रहने वाले एक शख्स ने चार अक्तूबर को शिकायती पत्र दिया और बताया कि ऑनलाइन लेनदेन करने वाले एक एप की मदद से उनके खाते से दो लाख 18 सौ रुपये निकाल लिए गए हैं। दो दिन में खाते में पूरी रकम वापस आ गई है।

ये हो गए जालसाजी के शिकार

केस एक

कैंट इलाके के सिंघड़िया के श्रवणनगर कॉलोनी निवासी चंद्र मोहन सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में मुख्य आरक्षी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। 31 अगस्त 2020 को वह सेवानिवृत्त हुए। तीन सितंबर को चंद्र मोहन के मोबाइल फोन पर किसी ने कॉल कर कहा कि भुगतान के लिए पेंशन का बिल ट्रेजरी में आया है, खाते का डिटेल चाहिए। झांसे में आकर चंद्र मोहन ने डिटेल बता दिया। जिसके बाद जालसाजों ने उनके खाते से 3.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए। मोबाइल फोन पर निकासी का संदेश आने पर उन्हें घटना की जानकारी हुई।

केस दो
29 मई को शाहपुर के मेडिकल रोड निवासी अमित कुमार ने गूगल से ऑनलाइन शापिंग की, एक कंपनी का नंबर लेकर फोन करके कुछ जानकारी मांगने की कोशिश की। फोन नहीं लगा। कुछ देर बाद एक फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को ऑनलाइन शापिंग का कर्मचारी बताया। बातचीत में उसने एक लिंक भेजा। जिस पर टच करने के बाद कोड आया, जिसे कर्मचारी ने पूछा। इसके बाद खाते से पांच बार में एक लाख रुपये निकल गए।  

केस तीन
तारामंडल निवासी आशुतोष ने 22 सितंबर 2021 को ऑनलाइन सोफा कवर और चादर मंगाया। आठ सौ रुपये का सामान मंगाने के कुछ देर बाद ही उनके पास एक करोड़ रुपये लकी ड्रॉ में जीतने का ऑफर आ गया। जालसाज ने बताया कि कंपनी जीती गई रकम का चेक उनके घर भेजेगी, लेकिन टैक्स और कुछ अन्य कागजात पूरे करने में पांच हजार रुपये का खर्च आएगा। इस रुपये को खाते में भेजना होगा या फिर अपने खाते का नंबर देकर रकम भेज दें, फिर पांच हजार रुपये काट लिए जाएंगे। आठ सौ रुपये के सामान मंगाने की एवज में एक करोड़ रुपये की लकी ड्रॉ जीतने की बात आशुतोष को समझ से परे लगी। फिर उन्होंने फोन काट दिया और समझदारी से बच गए
 

जालसाजी का शिकार हैं तो चार घंटे में दें सूचना

ऑनलाइन जालसाजी के मामलों में पीड़ित को साइबर थाने या फिर नजदीकी थाने में चार घंटे के अंदर पूरे दस्तावेज के साथ शिकायत करना चाहिए। ऐसा करने पर  जालसाजी के शिकार हुए शख्स की 80 फीसदी रकम ऑनलाइन ही वापस करवाने का प्रयास किया जाता है। यह रकम पीड़ित के खाते में चार से पांच दिन में वापस हो जाती है।

ऐसे वापस होती है रकम
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक, चार घंटे के अंदर शिकायत मिलने पर टीम पीड़ित के खाते से निकली रकम का ब्योरा एकत्र करती है। इसके बाद संबंधित कंपनियों को तत्काल खरीदे हुए सामान भेजने पर रोक लगाने के लिए एक ई-मेल भेज कर रकम को वापस करने के लिए कहा जाता है। ई-मेल के जवाब में कंपनी के लोग रकम को कुछ दिनों में वापस कर देते हैं। हालांकि, साबइर सेल उस रकम को वापस नहीं करवा पाती जो एटीएम से निकाल ली जाती है।

जागरूकता ही बचाव है
आम जिंदगी में जितनी तेजी से इंटरनेट घुसा, साइबर अपराध उससे कहीं तेजी से बढ़ा। संकट बढ़ने के साथ, इससे निपटने के तमाम तकनीकी दुनिया भर में लगातार किए जा रहे हैं। लेकिन, साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि साइबर क्राइम से निपटने के लिए जागरूकता से धारदार कोई हथियार नहीं है। साइबर सिक्योरिटी के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए दीर्घकालिक आयोजन की तैयारी कर रहे एचडीएफसी बैंक, तारामंडल शाखा प्रबंधक सुधीर कुमार गुप्ता और एचडीएफसी बैंक के ही रीजनल मार्केटिंग मैनेजर रंजीत सिंह कहते हैं कि इसी लिहाज से दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाने के उपाय निरंतर किए जा रहे हैं।

यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन के एक सर्कुलर के अनुपालन में सभी विवि और संबद्ध कॉलेजों में महीने के पहले बुधवार को साइबर जागरूकता दिवस के तौर पर मनाया जाता है। अक्तूबर माह को नेशनल साइबर सिक्योरिटी मंथ और 30 नवंबर को नेशनल कंप्यूटर सिक्योरिटी-डे के तौर पर सेलीब्रेट करते हैं। मकसद केवल एक ही है कि लोगों को साइबर क्राइम से निपटने के लिए जागरूक किया जा सके। 

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed