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अश्लील चैट में फंसकर गंवाए रुपये, अब इज्जत बचाने की लगा रहे गुहार
Sun, 31 Jan 2021 05:24 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 31 Jan 2021 05:24 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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साइबर अपराधी लोगों को फंसाने और रुपये वसूलने के लिए सोशल मीडिया पर किसी लड़की की फेक प्रोफाइल के माध्यम से दोस्ती कर रहे हैं। ये चैट के दौरान अश्लील बातों पर उतर आते हैं, इसके बाद अश्लील वीडियो भेजकर लाइव चैट की पेशकश की जा रही है। फिर क्या, चक्कर में फंसे लोगों की हरकत को कैमरों में कैद कर वे ना सिर्फ वसूली कर रहे हैं, बल्कि लंबे समय तक ब्लैकमेल कर रहे हैं।
इस चक्कर में फंसकर कई लोग रुपये गंवाने के बाद अब अपनी इज्जत बचाने की गुहार लेकर साइबर थाने पहुंच रहे हैं। गलती भी ऐसी की है कि तहरीर में लिखने और उसे बताने में भी शर्म महसूस कर रहे हैं। तहरीर देने के साथ की निवेदन कर रहे हैं कि उनका नाम जगजाहिर न हो। ऐसे कई मामले साइबर थाने में आ चुके हैं। इनमें एक युवा अधिवक्ता और पशु विभाग के एक कर्मचारी भी हैं।
जानकारी के मुताबिक, लड़कियों के नाम से फेसबुक आईडी बनाकर जालसाज दोस्ती की रिक्वेस्ट भेज रहे हैं। दोस्ती होते ही मैसेंजर पर बातचीत शुरू हो जा रही है। अश्लील बातों में जो फंसा फिर उसका मोबाइल नंबर हासिल कर रहे हैं। व्हाट्सएप नंबर पर बातचीत के दौरान ही एक वीडियो भेजा जा रहा है। अश्लील वीडियो को देखने के बाद फिर लड़की की आवाज में लाइव चैट का ऑफर आ रहा है। इस बहकावे में लोग वीडियो कॉल कर रहे हैं।
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इस चक्कर में फंसकर कई लोग रुपये गंवाने के बाद अब अपनी इज्जत बचाने की गुहार लेकर साइबर थाने पहुंच रहे हैं। गलती भी ऐसी की है कि तहरीर में लिखने और उसे बताने में भी शर्म महसूस कर रहे हैं। तहरीर देने के साथ की निवेदन कर रहे हैं कि उनका नाम जगजाहिर न हो। ऐसे कई मामले साइबर थाने में आ चुके हैं। इनमें एक युवा अधिवक्ता और पशु विभाग के एक कर्मचारी भी हैं।
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जानकारी के मुताबिक, लड़कियों के नाम से फेसबुक आईडी बनाकर जालसाज दोस्ती की रिक्वेस्ट भेज रहे हैं। दोस्ती होते ही मैसेंजर पर बातचीत शुरू हो जा रही है। अश्लील बातों में जो फंसा फिर उसका मोबाइल नंबर हासिल कर रहे हैं। व्हाट्सएप नंबर पर बातचीत के दौरान ही एक वीडियो भेजा जा रहा है। अश्लील वीडियो को देखने के बाद फिर लड़की की आवाज में लाइव चैट का ऑफर आ रहा है। इस बहकावे में लोग वीडियो कॉल कर रहे हैं।
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ये हैं केस
वीडियो कॉल पर लड़की की आवाज तो आ रही है, लेकिन वीडियो नहीं दिख रहा। हरकत इधर से हुई तो उसे तुरंत ही रिकॉर्ड कर लिया जा रहा है। वीडियो रिकॉर्ड होने के बाद तुरंत ही फोन आता है और फिर रुपये के लिए ब्लैमेलिंग शुरू कर दी जाती है। झांसे में फंसकर रुपये देने वाले भी यह बताने को तैयार नहीं कि कितने रुपये गंवा दिए है। वे सिर्फ अपना वीडियो हासिल कर डिलीट कराने की गुहार साइबर थाने में लगा रहे हैं।
केस एक
एक युवा अधिवक्ता के फेसबुक पर दिसंबर में अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। स्वीकार करने के बाद बातचीत शुरू हुई और फिर अश्लीलता में कब बदल गई अधिवक्ता भी नहीं समझ पाए। अपना व्हाट्सएप नंबर दे दिया। वीडियो देखा तो उत्साहित हो गए और फिर बंद कमरे में लाइव चैट कर वह सब कुछ कर गए जिससे वह आज शर्मिंदा भी हैं और परेशान भी। साइबर थाने में तहरीर देकर इज्जत बचाने की गुहार लगाई है। बीस हजार रुपये भी भेज चुके हैं।
केस दो
एक सरकारी विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। गोबर की खाद बनाने की ट्रेनिंग लेकर आए थे और दोस्ती की रिक्वेस्ट आ गई। उन्हें लगा कि कोई अपना ही होगा। दोस्ती होने के बाद इनके साथ भी यही हुआ। चार दिन की बातचीत के बाद व्हाट्सएप नंबर दे दिया और फिर दोनों के बीच में तीन दिन खूब बातचीत हुई। ऑनलाइन कॉल आई तो तुरंत ही दफ्तर के बाथरूम में पहुंच गए। इनका भी वीडियो बन गया है। यह भी रुपये भेज चुके हैं। कितने रुपये भेजे यह तहरीर में भी नहीं लिखा है।
साइबर थाना इंस्पेक्टर सूर्यभान सिंह ने बताया कि शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। इस तरह के लोगों को अंजान लोगों से दोस्ती न करने की नसीहत भी दी जा रही है। जागरूकता ही साइबर अपराध से बचने का एक तरीका है।
केस एक
एक युवा अधिवक्ता के फेसबुक पर दिसंबर में अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। स्वीकार करने के बाद बातचीत शुरू हुई और फिर अश्लीलता में कब बदल गई अधिवक्ता भी नहीं समझ पाए। अपना व्हाट्सएप नंबर दे दिया। वीडियो देखा तो उत्साहित हो गए और फिर बंद कमरे में लाइव चैट कर वह सब कुछ कर गए जिससे वह आज शर्मिंदा भी हैं और परेशान भी। साइबर थाने में तहरीर देकर इज्जत बचाने की गुहार लगाई है। बीस हजार रुपये भी भेज चुके हैं।
केस दो
एक सरकारी विभाग में कार्यरत एक कर्मचारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। गोबर की खाद बनाने की ट्रेनिंग लेकर आए थे और दोस्ती की रिक्वेस्ट आ गई। उन्हें लगा कि कोई अपना ही होगा। दोस्ती होने के बाद इनके साथ भी यही हुआ। चार दिन की बातचीत के बाद व्हाट्सएप नंबर दे दिया और फिर दोनों के बीच में तीन दिन खूब बातचीत हुई। ऑनलाइन कॉल आई तो तुरंत ही दफ्तर के बाथरूम में पहुंच गए। इनका भी वीडियो बन गया है। यह भी रुपये भेज चुके हैं। कितने रुपये भेजे यह तहरीर में भी नहीं लिखा है।
साइबर थाना इंस्पेक्टर सूर्यभान सिंह ने बताया कि शिकायतों के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। इस तरह के लोगों को अंजान लोगों से दोस्ती न करने की नसीहत भी दी जा रही है। जागरूकता ही साइबर अपराध से बचने का एक तरीका है।