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गोरखपुर में सस्ती दवाओं से हार रहा कोरोना, अब तक ठीक हो चुके हैं 11 मरीज

Wed, 27 May 2020 08:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 27 May 2020 08:25 PM IST
सार

  • बुखार और एंटीबायोटिक दवाओं से ठीक हुए हैं मरीज
  • ठीक हो चुके मरीजों की इम्युनिटी भी मिली हैं बढ़िया

 

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Corona positive Patients are cured with fever and antibiotics
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : social media

विस्तार

कोरोना वायरस से संक्रमित जो मरीज ठीक हुए हैं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में उनका उपचार बेहद सस्ती दवाओं के जरिए किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि आईसीएमआर और विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश पर यह दवाएं दी जा रही हैं। कम से कम गोरखपुर में ये दवाएं काफी प्रभावी साबित हुई हैं।

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जिले में अब तक 11 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। इन मरीजों में जिले का पहले मरीज के ठीक होने में एक महीने का समय लगा है। जबकि अन्य नौ मरीजों को ठीक होने में महज 10 से 12 दिन ही लगे हैं। इन मरीजों को पैरासिटामॉल सहित हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दी गई।
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इनमें कुछ मरीज ऐसे भी हैं, जिन्हें एंटीबायोटिक दवाएं दी गई, जो बेहद सस्ती हैं। डॉक्टरों की माने तो महज एक खुराक का खर्च 25-30 रुपये पड़ा है। बीआरडी प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि मरीजों को ठीक होने का औसत बेहद अच्छा है, अब तक जो भी मरीज ठीक हुए हैं वह महज 10 से 12 दिनों में पूरी तरह से स्वस्थ हो गए हैं।

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अलाक्षणिक मरीजों को बेहद कम दवाएं

उन्होंने कहा कि इन्हें नाम मात्र की दवा दी गई है। जिला का पहला मरीज जिसे ठीक होने में समय लगा, उसे शुगर, किडनी और हार्ट की बीमारी थी। इसकी वजह से उसे थोड़ी दवाएं अलग दी गई है। वरना अन्य मरीजों को सामान्य दवाएं दी गई है, जो बेहद सस्ती हैं। एक-दो को थोड़ी संक्रमण की समस्या थी, तो एंटीबायोटिक दी गई हैं, जो पूरी तरह से कारगर रही है।

बीआरडी प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि अलाक्षणिक मरीजों को नाम मात्र की दवाएं दी गई है। इन मरीजों के खान-पान का असर ऐसा रहा है कि यह जल्दी ठीक हो गए हैं। यही वजह है कि केवल एक मरीज को अब तक ऑक्सीजन लगाना पड़ा है, जबकि 95 प्रतिशत मरीजों को ऑक्सीजन की भी जरूरत नहीं पड़ी है।

लक्षण के आधार पर दी जा रही एंटीबाएटिक दवाएं
कोरोना मरीजों को लक्षण के आधार पर एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही है। कुछ मरीजों को एजीथ्रोमाइसिन दवा दी गई है, जिसकी कीमत 25 रुपये प्रति टैबलेट है। जबकि, कुछ को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा दी गई है। जिसकी कीमत छह से आठ रुपये के बीच है।

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