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कोरोना का कहर: 13 लाख खर्च किया फिर भी नहीं बची सगे भाइयों की जान, कोविड अस्पतालों की मनमानी से तीरमदार परेशान

Wed, 05 May 2021 12:43 PM IST
vivek shukla ऐहतेशाम उद्दीन अहमद, गोरखपुर।
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 05 May 2021 12:43 PM IST
सार

कोविड अस्पतालों में सेवाओं की तय है कीमत, फिर भी मनमानी जारी। सरकार ने प्रदेश के ए, बी और सी श्रेणी के नगरों के निजी अस्पतालों में सेवाओं का तय कर रखा है पैकेज।

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Corona infected two brothers died after 13 lakhs spent for covid treatment in gorakhpur
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के एक निजी अस्पताल में भर्ती कोरोना पॉजिटिव दो सगे भाइयों की मौत हो गई, फिर भी अस्पताल ने 13 लाख रुपए इलाज के मद में वसूल लिए। इलाज के नाम पर इसे वसूली करार देते हुए, आहत परिजनों ने कहा कि जल्द ही वे मामले की शिकायत करेंगे। यह अकेला मामला नहीं है, शहर में कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन, वेंटिलेटर आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराने के नाम पर प्रतिदिन मोटी रकम वसूले जाने की शिकायतें मिल रहीं हैं। केंद्र सरकार ने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए निजी अस्पतालों द्वारा वसूले जाने वाले शुल्क को तय कर रखा है फिर भी मनमानी जारी है।
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कोविड संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए सरकार ने शुल्क (पैकेज) का निर्धारण ए, बी और सी श्रेणी के शहरों के आधार पर किया है। निजी अस्पतालों को भी दो श्रेणियों में बांटा गया है। नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर (एनएबीएच) मान्यता प्राप्त अस्पताल और गैर मान्यता प्राप्त अस्पतालों पर निगरानी रखती है। इसी तरह कोविड संक्रमण के मरीजों को भी तीन श्रेणियों में बांटा गया है। मॉडरेट या औसत बीमार, गंभीर बीमार और अति गंभीर बीमार।
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इसके आधार पर एक ए श्रेणी के शहर में एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पताल में औसत संक्रमित मरीज से ऑक्सीजन सुविधा वाले आइसोलेशन बेड के लिए प्रतिदिन दस हजार रुपये लिये जा सकते हैं। इसमें पीपीई किट के 1200 रुपये भी शामिल हैं। गंभीर मरीजों को बिना वेंटिलेटर वाले आईसीयू में भर्ती किए जाने पर प्रतिदिन 15 हजार रुपये जिसमें पीपीई किट के भी दो हजार रुपये शामिल हैं, वसूले जाएंगे। अति गंभीर मरीज जो वेंटिलेटर युक्त आईसीयू में (वेंटिलेटर इन्वेसिव और नॉन इन्वेसिस दोनों प्रकार की सुविधा वाला) में भर्ती किए जाएंगे उनसे प्रतिदिन 18000 रुपये जिसमें पीपीई किट का दो हजार रुपये शामिल हैं वसूल किए जा सकते हैं। 
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कीमत में शामिल हैं यह सुविधाएं

गैर मान्यता प्राप्त अस्पतालों के लिए ऑक्सीजन सुविधायुक्त आइसोलेशन बेड के लिए आठ हजार रुपये, बिना वेंटिलेटर सुविधा युक्त आईसीयू के लिए 13000 रुपये और वेंटिलेटर युक्त आईसीयू (इन्वेसिव, नॉन इन्वेसिव सुविधा युक्त) के लिए 15000 रुपये प्रतिदिन निर्धारित किया गया है। बी श्रेणी के शहर में स्थित सुपर स्पेशिलिटी अस्पतालों में ए श्रेणी शहर वाली दर का अस्सी प्रतिशत और सी श्रेणी के शहरों के अस्पतालों में साठ प्रतिशत शुल्क लेने की अनुमति दी गई है।

अपर मुख्य सचिव अमित मोहन प्रसाद की ओर से जारी पत्रांक संख्या 1805/पांच-5-2020 में एनएबीएच मान्यता प्राप्त, गैर मान्यता प्राप्त अस्पतालों के लिए निर्धारित शुल्क दर को पैकेज बताया गया है। पत्र के अनुसार इस पैकेज में कोविड केयर प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार प्रदान किए जाने के लिए बेड, भोजन सहित अन्य सुविधाएं जैसे नर्सिंग केयर, मॉनिटरिंग, इमेजिंग सहित अन्य आवश्यक जांचें, चिकित्सक या कंसल्टेंट की विजिट, परीक्षण आदि सुविधाएं शामिल हैं। पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि  कंसल्टेंसी फीस, नर्सिंग केयर, मॉनिटरिंग, विजिट आदि के नाम से अलग से शुल्क लिया जा रहा है तो यह एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1987 तथा उप्र महामारी कोविड19 विनियमावली 2020 के तहत दंडनीय है।

पैकेज में क्या नहीं है शामिल
इस पैकेज में प्रयोगात्मक उपचार जैसे रैमडेसिविर आदि की कीमत शामिल नहीं है। इसी तरह कोविड जांच के लिए आरटीपीसीआर आदि टेस्ट तथा आईएल-6 टेस्ट भी शामिल नहीं किया गया है। यानी मरीज से इसका अतिरिक्त शुल्क वसूला जा सकता है।

पैकेज में सहरुग्णता वाले मरीज भी शामिल

सरकार की ओर से निर्धारित पैकेज में कोमॉर्बिडिटी (सहरुग्णता) वाले मरीज भी शामिल हैं। इसके तहत बिना वेंटिलेटर वाले आईसीयू में हाइपरटेंशन और अनियंत्रित डायबिटीज से पीड़ित मरीजों का भी इलाज किया जाएगा  यानी उनसे इन बीमारियों की जांच आदि के नाम पर अतिरिक्त खर्च नहीं वसूला जाएगा। कोमॉर्बिडिटीज रोगियों को उपचार तथा अल्प अवधि की हीमो डायलिसिस की सुविधा भी इसी पैकेज में शामिल है।

कोविड संक्रमित गर्भवती और नवजात के लिए हैं यह प्रावधान
वैसे तो यह पैकेज दर वयस्क और शिशु दोनों पर लागू हैं लेकिन गर्भवती और उसके नवजात शिशु के लिए कुछ अलग प्रावधान किए गए हैं। इनके अनुसार कोविड संक्रमित गर्भवती का प्रसव (सामान्य या सीजेरियन)  और नवजात शिशु के उपचार के लिए अलग से शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क मरीज से आयुष्मान भरत योजना की प्रचलित दर के बराबर होगा। आयुष्मान योजना के लाभार्थी से यह शुल्क भी नहीं लिया जाएगा।

यह हैं ए श्रेणी के जिले
सरकार ने कानपुर, लखनऊ, आगरा, वाराणसी, प्रयागराज, बरेली, गोरखपुर, मेरठ, नोएडा क्षेत्र (गौतमबुद्धनगर) और गाजियाबाद के नगर को ए श्रेणी में रखा है।

बी श्रेणी के जिले

सरकार ने मुरादाबाद, अलीगढ़, झांसी, सहारनपुर, मथुरा, रामपुर, मिर्जापुर,  शाहजहांपुर, अयोध्या, फिरोजाबाद, मुजफ्फरनगर और फर्रुखाबाद शहर को बी श्रेणी में रखा है। इन दो श्रेणियों के अतिरिक्त प्रदेश के बाकी सभी जिले सी श्रेणी में आते हैं।

डॉ. विनोद पॉल की संस्तुति पर तय हुई सेवा दर
कोविड संक्रमित मरीजों को दी जाने वाली सेवाओं के शुल्क का निर्धारण नीति आयोग भारत सरकार के सदस्य डॉ. की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुति के आधार पर जुलाई 2020 में की गई थी।
 
गोरखपुर मंडल के मंडलायुक्त जयंत नार्लिकर ने बताया कि कोविड अस्पताल और निजी प्रयोगशालाओं में शासन द्वारा रेट निर्धारित किया जा चुका है। किसी निजी अस्पताल या  प्रयोगशाला में शासन द्वारा निर्धारित दरों से अधिक फीस लिए जाने संबंधी शिकायतो के जांच के लिये अपर आयुक्त न्यायिक की अध्यक्षता मे चार सदस्यीय टीम गठित है। यदि किसी जनसामान्य को अस्पताल या लैब में अधिक शुल्क लिए जाने की शिकायत करनी है तो वह समिति के अध्यक्ष के व्हाट्सएप नंबर 9648305681 या ईमेल आईडी- commgor@nic.in पर शिकायत कर सकते हैं।
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