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कोरोना ने बढ़ा दिया अस्पतालों में ऑपरेशन का खर्च, इस एक वजह से लोगों को हो रही परेशानी
Sat, 23 May 2020 05:25 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 23 May 2020 05:25 PM IST
सार
- कोरोना टेस्ट का अतिरिक्त बोझ मरीजों पर पड़ रहा भारी
- आईसीएमआर की गाइडलाइंस के मुताबिक करा रहे टेस्ट
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कोरोना वायरस।
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
कोरोना महामारी के बीच लॉकडाउन-चार में काफी हद तक छूट प्रशासन ने दे दी है। इस छूट में निजी अस्पताल और नर्सिंग होम भी शामिल कर लिए गए हैं। इनको स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इमरजेंसी में इलाज और ऑपरेशन की अनुमति भी मिल गई है।
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ऐसे में इमरजेंसी में कोरोना टेस्ट के नाम पर ऑपरेशन का अतिरिक्त बोझ आम जनता को उठाना पड़ रहा है। ऑपरेशन से पहले निजी लैब से मरीजों को कोरोना जांच के नाम पर 4500 रुपये देने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं पीपीई किट सहित अन्य खर्चे भी निजी अस्पताल जोड़ने की तैयारी में जुट गए हैं।
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जिले में करीब 300 से अधिक निजी अस्पताल और नर्सिंग होम हैं। इसमें कई बड़े अस्पताल है, जहां रोजाना आठ से दस ऑपरेशन होते हैं। पहले की अपेक्षा अब प्राइवेट अस्पतालों में ऑपरेशन महंगे हो गए हैं।
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140 से अधिक जांच निजी लैब करा चुका
निजी अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि एक ऑपरेशन करने में कम से कम चार से पांच लोगों की जरूरत होती है। मौजूदा समय में कौन मरीज संदिग्ध है या नहीं है इसका पता लगा पाना बिना कोरोना जांच के संभव नहीं है।
ऐसे में अगर इमरजेंसी में सर्जरी करने के लिए पूरी टीम पीपीई किट सहित कोविड-19 की सावधानियां बरतते हुए ऑपरेशन कर रही है। इसी में कोरोना जांच भी कराई जा रही है तो ऐसे में यह माना जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान करीब 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि कोरोना काल में हो गई है।
आईएमए के सचिव डॉ राजेश गुप्ता ने बताया कि हाई रिस्क वाले मरीजों की कोरोना जांच निजी अस्पताल ऑपरेशन से पहले कर रहे हैं। इनका खर्च मरीजों के ऊपर ही पड़ रहा है। लेकिन अभी पीपीई किट के नाम पर मरीजों से रुपये नहीं लिए जा रहे हैं।
शहर में तीन निजी लैब को कोरोना जांच की मंजूरी मिली थी। इनमें एक लैब की अनुमति आईसीएमआर ने रद्द कर दी है। अब केवल दो लैब ही जांच कर रहे हैं। इन्होंने अब तक 140 से अधिक सैंपल निजी लैब से लेकर जांच के लिए भेजे हैं। इसका खर्च मरीजों से लिया गया है। हालांकि अब तक केवल एक ही रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बाकी सभी रिपोर्ट निगेटिव है।
ऐसे में अगर इमरजेंसी में सर्जरी करने के लिए पूरी टीम पीपीई किट सहित कोविड-19 की सावधानियां बरतते हुए ऑपरेशन कर रही है। इसी में कोरोना जांच भी कराई जा रही है तो ऐसे में यह माना जा रहा है कि ऑपरेशन के दौरान करीब 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि कोरोना काल में हो गई है।
आईएमए के सचिव डॉ राजेश गुप्ता ने बताया कि हाई रिस्क वाले मरीजों की कोरोना जांच निजी अस्पताल ऑपरेशन से पहले कर रहे हैं। इनका खर्च मरीजों के ऊपर ही पड़ रहा है। लेकिन अभी पीपीई किट के नाम पर मरीजों से रुपये नहीं लिए जा रहे हैं।
शहर में तीन निजी लैब को कोरोना जांच की मंजूरी मिली थी। इनमें एक लैब की अनुमति आईसीएमआर ने रद्द कर दी है। अब केवल दो लैब ही जांच कर रहे हैं। इन्होंने अब तक 140 से अधिक सैंपल निजी लैब से लेकर जांच के लिए भेजे हैं। इसका खर्च मरीजों से लिया गया है। हालांकि अब तक केवल एक ही रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। बाकी सभी रिपोर्ट निगेटिव है।