{"_id":"6a5bee4008c7a9de4d045cda","slug":"conclusion-of-the-weekly-short-term-course-based-on-the-united-nations-sustainable-development-goals-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1390351-2026-07-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कार्ययोजना जरूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी कार्ययोजना जरूरी
Sun, 19 Jul 2026 02:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sun, 19 Jul 2026 02:51 AM IST
विज्ञापन
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर आधारित साप्ताहिक अल्पावधि पाठ्यक्रम का समापन
गोरखपुर। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक सोच समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी से ही संभव है।
यह बातें डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने कही। वह शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) की ओर से ''''जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य'''' विषयक साप्ताहिक अल्पावधि पाठ्यक्रम के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उच्च शिक्षा संस्थानों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं और शिक्षण व शोध को नई दिशा देते हैं।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के एमएमटीटीसी निदेशक प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य परस्पर जुड़े विषय हैं। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला है। समन्वयक डॉ. राकेश पांडेय ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रशिक्षण में 18 राज्यों के शिक्षक शामिल हुए। डॉ. तुलिका मिश्रा ने आभार ज्ञापित किया।
विज्ञापन
गोरखपुर। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक सोच समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती का समाधान सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी से ही संभव है।
यह बातें डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के कुलपति प्रो. बिजेंद्र सिंह ने कही। वह शनिवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) की ओर से ''''जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा एवं जनस्वास्थ्य'''' विषयक साप्ताहिक अल्पावधि पाठ्यक्रम के समापन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
विज्ञापन
अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से निर्धारित सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उच्च शिक्षा संस्थानों और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को वैश्विक चुनौतियों के प्रति संवेदनशील बनाते हैं और शिक्षण व शोध को नई दिशा देते हैं।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के एमएमटीटीसी निदेशक प्रो. अवधेश कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और जनस्वास्थ्य परस्पर जुड़े विषय हैं। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला है। समन्वयक डॉ. राकेश पांडेय ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रशिक्षण में 18 राज्यों के शिक्षक शामिल हुए। डॉ. तुलिका मिश्रा ने आभार ज्ञापित किया।