Gorakhpur News: गोरखपुर विश्वविद्यालय का क्या है असली नाम...तय करेगी समिति
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय का पूरा नाम कई जगह सही से नहीं लिखा जा रहा है। लोगो भी कई तरह के दिखते हैं। इससे विश्वविद्यालय को रैंकिंग में नुकसान हो सकता है। जल्द एक नाम और लोगो का रंग तय किया जाएगा जो हर जगह प्रयोग होगा।
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डीडीयू, डीडीयूजीयू, गोविवि, दीदउ गोवि, दीन दयाल, पं. दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ये कुछ नाम हैं, जो आमतौर पर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए प्रयोग किए जाते हैं। इससे विश्वविद्यालय को कई जगह नुकसान भी हो रहा है।
विश्वविद्यालय का असली नाम क्या हो, अब इसके लिए मंथन शुरू हो गया है। नाम के साथ ही विश्वविद्यालय के आधिकारिक लोगो का एक रंग होगा। इसके लिए एक समिति बनाई जाएगी। जल्द ही नाम फाइनल करके इस प्रस्ताव को कार्य परिषद की बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा।
रिसर्च पेपर, लेटर हेड और सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय का अलग-अलग प्रयोग होने की वजह से रैंकिंग में नुकसान हो रहा है। एनआईआरएफ और डाटा बेस्ड रैंकिंग में हिट्स का महत्व होता है। अलग-अलग नाम होने के कारण सर्च में हिट्स बंट जाते हैं।
एक नाम लिखने से रैंकिंग संस्थान आसानी से विश्वविद्यालय का डाटा की समीक्षा कर लेते हैं। अलग-अलग नाम होने की वजह से उन्हें डाटा को ट्रेस करने में समस्या आती है, जिसका प्रभाव रैंकिंग में भी देखने को मिलता है। एक नाम होने से अधिक से अधिक कंटेंट होंगे जिससे रेटिंग भी बढ़ेगी।
एक कलर का होगा लोगो
कई बार ऐसा देखा जाता है कि अलग-अलग विभाग विश्वविद्यालय के लोगो में रंग बदल देते हैं। हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई गाइडलाइन नहीं है। लोगो का कलर तय होने के बाद हर जगह एक ही रंग देखने को मिलेगा।
लेटर पैड में दिखेगा बदलाव
विश्वविद्यालय का नाम और लोगो फाइनल होने के बाद सभी विभागों के लेटर पैड एक तरह के दिखाई देंगे। चाहें वो कुलपति हों या कुलसचिव, सभी के लेटर पैड एक जैसे देखने को मिलेंगे। सभी में एक ही फॉन्ट का प्रयोग किया जाएगा।
विश्वविद्यालय के सभी साेशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग तरह का नाम देखने को मिलता है। इससे पब्लिक में कंफ्यूजन होता है और विश्वविद्यालय की ब्रांडिंग प्रभावित होती है। नाम तय होने के बाद सभी प्लेटफॉर्म एक जैसे ही दिखेंगे।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय का पूरा नाम कई जगह सही से नहीं लिखा जा रहा है। लोगो भी कई तरह के दिखते हैं। इससे विश्वविद्यालय को रैंकिंग में नुकसान हो सकता है। जल्द एक नाम और लोगो का रंग तय किया जाएगा जो हर जगह प्रयोग होगा।