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चिंताजनक: गोरखपुर जिला अस्पताल में क्लब फुट के मरीजों को नहीं मिला इलाज, पीड़ित मासूमों को गोद में लेकर परेशान रहे लोग
Wed, 10 Nov 2021 12:40 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 10 Nov 2021 12:40 PM IST
सार
जिला अस्पताल में क्लब फुट बीमारी की ओपीडी में सिर्फ मंगलवार को ही चलती है। अस्पताल को क्लब फुट के इलाज के लिए नोडल सेंटर बनाया गया है। वर्ष 2016 में इसके लिए एक एनजीओ से अस्पताल का एमओयू साइन हो चुका है।
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गोरखपुर जिला अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर जिला अस्पताल में क्लब फुट बीमारी (जन्म से पैर टेढ़ा होना) से जूझ रहे मासूमों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल में बीमारी से पीड़ित मासूमों को गोद में लेकर परिजन परेशान रहे। सिर्फ दो से तीन मासूमों को ही डॉक्टरों ने देखा और बाकी को लौटा दिया गया।
जिला अस्पताल में क्लब फुट बीमारी की ओपीडी में सिर्फ मंगलवार को ही चलती है। अस्पताल को क्लब फुट के इलाज के लिए नोडल सेंटर बनाया गया है। वर्ष 2016 में इसके लिए एक एनजीओ से अस्पताल का एमओयू साइन हो चुका है। हर मंगलवार को अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग में क्लब फुट की ओपीडी संचालित होती है। इसी के तहत मंगलवार को क्लब फुट बीमारी से पीड़ित 10 बच्चों को लेकर एनजीओ के सदस्य इलाज कराने पहुंचे।
दो महीने के नाती को लेकर पहुंची सहजनवां निवासी मुन्नी देवी ने बताया कि तीन हफ्ते से हर मंगलवार को नाती को लेकर सहजनवां से जिला अस्पताल आ रहीं हैं। जन्म से बच्चे का एक पैर टेढ़ा है। यहां पर डॉक्टरों को पैर में प्लास्टर लगाना है। इसके लिए डॉक्टर तीन हफ्ते से दौड़ा रहे हैं। आज भी प्लास्टर नहीं किया गया। खोराबार निवासी रत्नेश पासवान और गोरखनाथ निवासी जमशेद अली ने बताया कि वे भी अपने बच्चे को लेकर परेशान हैं।
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मरीजों व तीमारदारों के साथ आई स्वयं सेवी संस्था मिरैकल फिट इंडिया की कर्मचारी कोमल केसरी का कहना है कि हर मंगलवार को जिला अस्पताल में मरीजों को लाया जाता है। इसके लिए सभी अस्पतालों में नवजातों की स्क्रीनिंग की जाती है। नवजातों में से क्लब फुट से पीड़ित बच्चों का चयन किया जाता है। उनकी जांच और इलाज जिला अस्पताल में होना है।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि क्लब फुट के इलाज के लिए एक आर्थोपेडिक डॉक्टर ट्रेंड हैं। एक बार में पांच से छह बच्चों का ही इलाज कर सकते हैं। मरीज अधिक हैं। ऐसे में क्लब फुट की कास्टिंग को एक से अधिक दिन कराने पर विचार किया जा रहा है। दूसरे डॉक्टरों को भी ट्रेंड किया जाएगा।
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जिला अस्पताल में क्लब फुट बीमारी की ओपीडी में सिर्फ मंगलवार को ही चलती है। अस्पताल को क्लब फुट के इलाज के लिए नोडल सेंटर बनाया गया है। वर्ष 2016 में इसके लिए एक एनजीओ से अस्पताल का एमओयू साइन हो चुका है। हर मंगलवार को अस्पताल के आर्थोपेडिक विभाग में क्लब फुट की ओपीडी संचालित होती है। इसी के तहत मंगलवार को क्लब फुट बीमारी से पीड़ित 10 बच्चों को लेकर एनजीओ के सदस्य इलाज कराने पहुंचे।
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दो महीने के नाती को लेकर पहुंची सहजनवां निवासी मुन्नी देवी ने बताया कि तीन हफ्ते से हर मंगलवार को नाती को लेकर सहजनवां से जिला अस्पताल आ रहीं हैं। जन्म से बच्चे का एक पैर टेढ़ा है। यहां पर डॉक्टरों को पैर में प्लास्टर लगाना है। इसके लिए डॉक्टर तीन हफ्ते से दौड़ा रहे हैं। आज भी प्लास्टर नहीं किया गया। खोराबार निवासी रत्नेश पासवान और गोरखनाथ निवासी जमशेद अली ने बताया कि वे भी अपने बच्चे को लेकर परेशान हैं।
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मरीजों व तीमारदारों के साथ आई स्वयं सेवी संस्था मिरैकल फिट इंडिया की कर्मचारी कोमल केसरी का कहना है कि हर मंगलवार को जिला अस्पताल में मरीजों को लाया जाता है। इसके लिए सभी अस्पतालों में नवजातों की स्क्रीनिंग की जाती है। नवजातों में से क्लब फुट से पीड़ित बच्चों का चयन किया जाता है। उनकी जांच और इलाज जिला अस्पताल में होना है।
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि क्लब फुट के इलाज के लिए एक आर्थोपेडिक डॉक्टर ट्रेंड हैं। एक बार में पांच से छह बच्चों का ही इलाज कर सकते हैं। मरीज अधिक हैं। ऐसे में क्लब फुट की कास्टिंग को एक से अधिक दिन कराने पर विचार किया जा रहा है। दूसरे डॉक्टरों को भी ट्रेंड किया जाएगा।