मुख्यमंत्री की पहल: सहारा ही नहीं, बाकी चिट फंड कंपनियों में डूबी रकम भी लौटाएंगे, जमा कराए जा रहे आवेदन
एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीत सिंह ने कहा कि गोरखपुर जिले में कितनी रकम लेकर चिट फंड कंपनियां भागी हैं, आवेदकों के फार्म आने के बाद इसकी सटीक जानकारी हो सकेगी। अभी आवेदन पत्र जमा कराए जा रहे हैं। इसके बाद शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विस्तार
निजी बैंक खोलकर लोगों के रुपये लेकर भागने वाली चिट फंड फाइनेंस कंपनियों में डूबी रकम वापस मिलने की उम्मीद जगी है। केंद्र स्तर से सहारा पर बकाया रकम लोगों को दिलाई जा रही है तो अब सीएम के निर्देश पर शासन ने प्रदेश में इस पर सख्त कदम उठाए हैं। तहसीलों के नाजिर कार्यालयों में ऐसे लोगों के आवेदन पत्र जमा कराए जा रहे हैं, जिनकी रकम डूब चुकी है।
सदर तहसील में बने काउंटर पर एक सप्ताह के भीतर अब तक आठ सौ से अधिक लोगों ने अपने आवेदन जमा करा दिए हैं। माना जा रहा है कि सहारा की तर्ज पर बाकी ऐसी कंपनियों की जब्त संपत्तियों को भी नीलाम करके जमाकर्ताओं की रकम वापस दिलाई जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि आवेदन जमा कराने की अंतिम समय सीमा तय नहीं है, लेकिन जितनी जल्दी लोग फाॅर्म भरकर दे देंगे। उतनी जल्दी लोगों की रकम वापसी की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। एक अनुमान के अनुसार पांच करोड़ से अधिक रकम लेकर एक दर्जन से अधिक चिट फंड कंपनियां भागी हैं, जिनमें हर कंपनी में 25 से 30 लाख रुपये लोगों ने जमा कराए हैं।
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गोरखपुर जिले में निजी बैंक (चिट फंड कंपनी) खोलकर फाइनेंस कंपनियों ने लोगों को कम समय में अधिक ब्याज का लाभ देने का झांसा दिया। जगह-जगह संबंधित बैंक की शाखाएं खोलकर एजेंटों के माध्यम से रुपये जमा कराए। भुगतान के लिए समय सीमा पूरी होने के पहले ही जमा-पूंजी समेटकर कंपनियां भाग गईं। इनमें कुछ ऐसी भी हैं, जिनके एक दो कार्यालय विभिन्न प्रदेशों में चल रहे हैं। लेकिन वहां पर पहुंचने पर जमाकर्ताओं को कोई मदद नहीं मिल पाती है।
ऐसे प्रकरणों को देखते हुए शासन ने जमाकर्ताओं के पक्ष में कार्रवाई शुरू कर दी है। शासन के निर्देश पर डीएम के माध्यम से बड्स एक्ट 2019 (अधिनियमित निक्षेप स्कीम पाबंदी अधिनियम) के तहत रकम वापसी कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया। इसके तहत सदर तहसील सहित अन्य सभी तहसीलों में अलग से काउंटर बनाकर कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक अगस्त से चल रही प्रक्रिया में पीड़ित अपने आवेदन पत्र जमा करा रहे हैं।
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सदर तहसील के सामने नाजिर कार्यालय में काउंटर बनाकर इसकी जिम्मेदारी तहसील के नाजिर मसउद्दीन को सौंपी गई है। आवेदकों को आधार कार्ड, बैंक पास बुक, फर्म में जमा राशि का बांड, अंतिम रसीद की फोटो काॅपी समेत भरे हुए आवेदन पत्र के साथ जमा कराना है। पीड़ित के मोबाइल नंबर का आवेदन फार्म पर स्पष्ट रूप से किया जाएगा। आवेदन फार्म में जमा कराई रकम के संबंध में पालिसी संख्या, किश्त की राशि, किश्तों की संख्या, कुल जमा राशि, आरंभ की तिथि और परिपक्वता तिथि का जिक्र करना है।
आवेदन के दौरान आवेदक को कुल जमा राशि का तीन गुना पैसा, उसके ब्याज और हर्जे खर्चे के साथ भुगतान की राशि लिखनी है। अधिकारियों का कहना है कि आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन की ओर से बैठक होगी। इसके बाद आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। नाजिर ने बताया कि अभी इस प्रक्रिया में राष्ट्रीय सहारा बैंक को शामिल नहीं किया गया है। उसके अलावा अन्य कंपनियों का पैसा ही लौटाने के लिए आवेदन लिया जा रहा है।
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सोचे थे बुढ़ापा में पैसा काम आएगा, लेकिन कंपनी भाग गई बाबू
मंगलवार की दोपहर 01.27 बजे नाजिर कार्यालय के सामने एक बुजुर्ग, युवा और महिलाएं हाथों में फार्म लेकर एक दूसरे से पैसे के बारे में बात कर रही थीं। बेला से आईं रामसंवारी, बंसतपुर की कुसुम से कह रही थीं कि सरकार पैसा दिलवा देगी ना। उनके सवाल का जवाब कुसुम तो नहीं दे पाईं, लेकिन वहां मौजूद बुजुर्ग रामवृक्ष ने बताया कि उम्मीद त बा, डूबल रहल ह। अब मिल जाइ त बुढ़ौती में काम आई। उहे खातिर जमा कइले रहलीं। लोगों की बातचीत के दौरान जब फार्म भरने को लेकर टोकाटाकी की गई तो रामवृक्ष का दर्द सामने आ गया।
रामवृक्ष ने कहा कि 19 सितंबर 2013 को खेती-किसानी करके 50 हजार जमा कराए थे। सोचे थे बुढ़ापा में पइसा काम आएगा। लेकिन कंपनी भाग गई बाबू। एजेंट से जब जब पूछते थे, तो वह कहते थे कि आज दिलवा देंगे, कल दिलवा देंगे। कहते-कहते एक दिन कहे कि हम क्या करें, जब कंपनी भाग गई। अकेले रामवृक्ष ही नहीं, बल्कि सैकड़ों ऐसे लोग हैं, जिन्होंने बेटा-बेटी की शादी, जमीन खरीदने सहित अन्य कामों के लिए पैसा जमा कराया था।
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पीड़ित बोले
बसंतपुर निवासी कुसुम ने कहा कि हमारे पास 50,000 रुपये थे। बेटी की शादी के लिए रुपये जमा कराए थे। सोचे थे कि वापसी में दोगुना लाभ मिलेगा। इस चक्कर में एजेंट से कहकर जमा कराए। बाद में मालूम हुआ कि कंपनी भाग गई है। इसके बाद दो दिन तक खाना नहीं खाई।
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बसंतपुर निवासी ऋषि कुमार ने कहा कि मैंने वर्ष 2012 में डेढ़ लाख रुपये जमा कराए थे। अब शासन की पहल पर पैसे मिलने की उम्मीद जगी है। इसलिए यहां पर आए थे। कई अन्य लोगों को भी बताएंगे कि वह लोग फार्म भर दें।
पीड़ित रामसंवारी ने कहा कि हम सोचे थे कि जीवन का कोई भरोसा नही है। ना जाने कब क्या हो जाएगा, इसलिए मेहनत मजदूरी करके 15 हजार रुपये जमा कराई थी। हम तो मान चुके थे कि पैसा डूब गया है।
एडीएम वित्त एवं राजस्व विनीत सिंह ने कहा कि गोरखपुर जिले में कितनी रकम लेकर चिट फंड कंपनियां भागी हैं, आवेदकों के फार्म आने के बाद इसकी सटीक जानकारी हो सकेगी। अभी आवेदन पत्र जमा कराए जा रहे हैं। इसके बाद शासन के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।