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Exclusive: दीवारों पर उकेरे चित्रों से बच्चे कर रहे पढ़ाई, स्कूल बैग और कॉपी-किताब के बिना पनप रही नर्सरी
Mon, 20 Feb 2023 05:19 PM IST
vivek shukla
विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 20 Feb 2023 05:19 PM IST
सार
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत देशभर के 49 केंद्रीय विद्यालयों में प्ले वे की तर्ज पर बालवाटिका को पिछले वर्ष से प्रारंभ किया गया है। वाराणसी संभाग में केवी सिद्धार्थनगर और केंद्रीय विद्यालय नंबर एक एयरफोर्स में बालवाटिका का संचालन हो रहा है।
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बालवाटिका में पढ़ाई करते बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
केंद्रीय विद्यालय नंबर एक एयरफोर्स में बिना भारी भरकम स्कूल बैग, कॉपी-किताब, गृहकार्य, प्रोजेक्ट के ही नर्सरी पनप रही है। पारंपरिक क्लास रूम की जगह दीवारों पर उकेरे फल, फूल, जानवर, खिलौनों को मित्र बनाकर तीन से पांच वर्ष के नौनिहाल ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।
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प्रेरणादायी कार्टून, कहानी और गीतों से जमा, घटाव, जानवरों के नाम, रंगों की पहचान, सामान्य ज्ञान, बात करने, चलने का तरीका, भारतीय संस्कृति, परंपराओं को सीख रहे हैं। यह तरीका नौनिहालों के सीखने की क्षमता में बढ़ोतरी कर रहा है और इसकी तस्दीक आंकड़े कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की सीखने की क्षमता में 40 फीसदी से अधिक की बढोतरी हुई है।
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत देशभर के 49 केंद्रीय विद्यालयों में प्ले वे की तर्ज पर बालवाटिका को पिछले वर्ष से प्रारंभ किया गया है। वाराणसी संभाग में केवी सिद्धार्थनगर और केंद्रीय विद्यालय नंबर एक एयरफोर्स में बालवाटिका का संचालन हो रहा है। केवी एयरफोर्स के प्रधानाचार्य एसके श्रीवास्तव ने बताया कि पहले वर्ष 120 सीट पर केवी एयरफोर्स में बच्चों का प्रवेश हुआ।
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यहां टाइम-टेबल व पढ़ाने का तरीका सरकार की उच्चस्तरीय समिति द्वारा तैयार बुनियादी शिक्षा पाठ्यक्रम विद्या प्रवेश के मसौदे पर आधारित है, जिसमें स्कूल बैग और किताब शामिल नहीं हैं।
खेल-खेल में होती है पढ़ाई
क्लासरूम में खेल-खेल से पढ़ाई के बाद प्रतिदिन एक बड़े कमरे में नन्हे-मुन्नों के लिए स्पोर्ट्स एक्टिवटी चलती है। यहां बच्चों को रंग-बिरेंगे फूल, ईंट, पत्थर के माध्यम से पढ़ाया जाता है। बच्चों को यहां भारतीय संस्कृति, परंपराओं, मातृभाषा के बारे में समझाया जा रहा है।
घर से से लाते हैं एक्टिविटी शीट और टिफिन
बालवाटिका एक, दो और तीन के छात्र एक्टिविटी शीट और टिफिन के साथ घर से आते हैं। बच्चों को खेल-खेल, मस्ती और तकनीक के माध्यम से ज्ञान, पंरपरा, संस्कृति से जोड़ते हुए पढ़ाई करवाई जाती है।
खेल-खेल में होती है पढ़ाई
क्लासरूम में खेल-खेल से पढ़ाई के बाद प्रतिदिन एक बड़े कमरे में नन्हे-मुन्नों के लिए स्पोर्ट्स एक्टिवटी चलती है। यहां बच्चों को रंग-बिरेंगे फूल, ईंट, पत्थर के माध्यम से पढ़ाया जाता है। बच्चों को यहां भारतीय संस्कृति, परंपराओं, मातृभाषा के बारे में समझाया जा रहा है।
घर से से लाते हैं एक्टिविटी शीट और टिफिन
बालवाटिका एक, दो और तीन के छात्र एक्टिविटी शीट और टिफिन के साथ घर से आते हैं। बच्चों को खेल-खेल, मस्ती और तकनीक के माध्यम से ज्ञान, पंरपरा, संस्कृति से जोड़ते हुए पढ़ाई करवाई जाती है।