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गोरखपुर: बाल सुधार गृह की क्षमता 50 की, किशोर रखे गए हैं 135
Sat, 31 Jul 2021 11:06 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 31 Jul 2021 11:06 AM IST
सार
सिटी मजिस्ट्रेट ने निरीक्षण कर किशोरों के रहने की व्यवस्था सही करने का दिया निर्देश। किशोरों ने परिजनों से मिलवाने की मांग की, कोरोना काल से ही मिलने पर लगी है पाबंदी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर में पचास किशोरों की क्षमता वाले राजकीय संप्रेक्षण (बाल सुधार) गृह में 135 किशोर रखे गए हैं। इनमें गोरखपुर के 64, महराजगंज के 14, देवरिया के 17, कुशीनगर के 39 वह अन्य जिलों में दो किशोर शामिल हैं। डीएम विजय किरण आनंद के निर्देश पर प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट अर्पिता गुप्ता के औचक निरीक्षण के दौरान यह अव्यवस्था सामने आई। इसपर उन्होंने जिम्मेदारों को और कमरे व बेडों की संख्या बढ़ाने के साथ ही किशोरो के रहने की व्यवस्था व्यवस्थित करने का निर्देश दिया।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट ने किशोरों की समस्याएं भी सुनी। ज्यादातर किशोरों ने परिजनों से मुलाकात करवाने का अनुरोध किया। दरअसल कोरोना काल से ही शासन की तरफ से मुलाकात की व्यवस्था बंद करा दी गई है। प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट दोपहर 12.40 बजे सूरजकुंड स्थित बाल सुधार गृह पहुंचे। निरीक्षण के दौरान वहां नियुक्त अधिकारी, कर्मचारी और होमगार्ड उपस्थित मिले।
मौके पर जिला चिकित्सालय की सचल टीम द्वारा किशोरों व कर्मचारियों का कोविड-19 टेस्ट किया जा रहा था। सचल टीम ने बताया कि कोविड जांच में सभी कर्मचारियों एवं किशोरों के किए गए एंटीजन टेस्ट निगेटीव मिले हैं। कुछ किशोरों व कर्मचारियों का रेंडम आधार पर आरटीपीसीआर टेस्ट भी किया गया है जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
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प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट के मुताबिक निरीक्षण के दौरान बाल सुधार गृह में अनुरक्षण कार्य चलता पाया गया। किशोरों के कमरों में साफ -सफाई संतोषजनक मिली। अनुरक्षण कार्य की वजह से पीने के पानी के लिए भूतल व प्रथम तल पर लगाए गए वाटर कूलर सफाई एवं मरम्मत के लिए बाहर निकाले गए थे। इसे तत्काल लगाने का निर्देश दिया गया ताकि पानी की दिक्कत न हो।
निरीक्षण में बेसिक शिक्षा विभाग से सम्बद्ध सहायक अध्यापक द्वारा लगभग 20 बच्चों को अध्ययन कक्ष में पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि संस्था प्रभारी को निर्देशित किया गया कि भोजन की गुणवत्ता बनाए रखी जाए। साफ-सफाई को और बेहतर करें साथ ही किशोरों के रहने की व्यवस्था सही की जाए।
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निरीक्षण के दौरान प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट ने किशोरों की समस्याएं भी सुनी। ज्यादातर किशोरों ने परिजनों से मुलाकात करवाने का अनुरोध किया। दरअसल कोरोना काल से ही शासन की तरफ से मुलाकात की व्यवस्था बंद करा दी गई है। प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट दोपहर 12.40 बजे सूरजकुंड स्थित बाल सुधार गृह पहुंचे। निरीक्षण के दौरान वहां नियुक्त अधिकारी, कर्मचारी और होमगार्ड उपस्थित मिले।
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मौके पर जिला चिकित्सालय की सचल टीम द्वारा किशोरों व कर्मचारियों का कोविड-19 टेस्ट किया जा रहा था। सचल टीम ने बताया कि कोविड जांच में सभी कर्मचारियों एवं किशोरों के किए गए एंटीजन टेस्ट निगेटीव मिले हैं। कुछ किशोरों व कर्मचारियों का रेंडम आधार पर आरटीपीसीआर टेस्ट भी किया गया है जिसकी रिपोर्ट आनी बाकी है।
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प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट के मुताबिक निरीक्षण के दौरान बाल सुधार गृह में अनुरक्षण कार्य चलता पाया गया। किशोरों के कमरों में साफ -सफाई संतोषजनक मिली। अनुरक्षण कार्य की वजह से पीने के पानी के लिए भूतल व प्रथम तल पर लगाए गए वाटर कूलर सफाई एवं मरम्मत के लिए बाहर निकाले गए थे। इसे तत्काल लगाने का निर्देश दिया गया ताकि पानी की दिक्कत न हो।
निरीक्षण में बेसिक शिक्षा विभाग से सम्बद्ध सहायक अध्यापक द्वारा लगभग 20 बच्चों को अध्ययन कक्ष में पढ़ाया जा रहा था। उन्होंने बताया कि संस्था प्रभारी को निर्देशित किया गया कि भोजन की गुणवत्ता बनाए रखी जाए। साफ-सफाई को और बेहतर करें साथ ही किशोरों के रहने की व्यवस्था सही की जाए।