अंडरग्राउंड क्राइम: नाम बदलकर पासपोर्ट बनवाने में माफिया अजीत पर चार्जशीट दाखिल, पुलिस की जांच में खुला सच
अजीत शाही अपनी माफिया गिरी जिस नाम से करता है, उस नाम से संपत्ति या अन्य काम नहीं करता। शराफत की जिंदगी के लिए उसने अपना नाम अजीत वीर विक्रम सिंह रखा है। माफिया की दोहरी जिंदगी उजागर होने के बाद उसके खिलाफ गीडा थाने में पिपरौली चौकी इंचार्ज ने जालसाजी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया है।
विस्तार
माफिया अजीत शाही को अजय वीर विक्रम बनकर पासपोर्ट बनवाने का आरोपी पाया गया है। उसने फर्जी नाम पते पर पासपोर्ट बनवा लिया था। इसकी पुष्टि पुलिस की जांच में हुई है। वह अपराध में अजीत शाही तो शराफत की दुनिया में अजीत वीर विक्रम सिंह नाम का इस्तेमाल करता था। इसी नाम पर ही वह अपनी प्रापर्टी भी धीरे-धीरे परिवर्तित कर रहा था। पुलिस ने माफिया के खिलाफ गीडा थाने में दर्ज दो केस में चार्जशीट दाखिल की है।
जानकारी के मुताबिक, शाहपुर के मोहनापुर निवासी दामोदर उपाध्याय ने एक मई 2023 को गीडा थाने में केस दर्ज कराया था। आरोप है कि भारत मोटर यार्ड के संचालक व सहयोगियों ने किस्त बकाया होने पर जबरन ट्रक को यार्ड में खड़ा कर लिया और केबिन में रखे 16 हजार रुपये लूट लिए। केस दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि यार्ड का संचालन माफिया अजीत शाही के भाई व सहयोगी करते हैं।
विवेचक ने इस मामले में नीरज सिंह उर्फ चमन निवासी छितौना थाना बेलघाट, अभिषेक शाही निवासी बी 76 न्यू काॅलोनी दक्षिणी बेतियाहाता थाना कैंट, शत्रुधन शाही निवासी इंदिरानगर लखनऊ, स्थाई पता पकड़ी बाबू थाना भाटपाररानी देवरिया, अजीत शाही, अखिलेश सिंह निवासी छितौना थाना बेलघाट, रामकेश उर्फ पप्पू प्रसाद निवासी रामपुर थाना बेलघाट के खिलाफ मारपीट, लूट, आपराधिक साजिश के तहत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दिया।
वहीं माफिया अजीत शाही पर दूसरा केस 12 जून को गीडा थाने में दर्ज हुआ था। पता चला था कि अजीत शाही अपनी माफिया गिरी जिस नाम से करता है, उस नाम से संपत्ति या अन्य काम नहीं करता। शराफत की जिंदगी के लिए उसने अपना नाम अजीत वीर विक्रम सिंह रखा है। माफिया की दोहरी जिंदगी उजागर होने के बाद उसके खिलाफ गीडा थाने में पिपरौली चौकी इंचार्ज ने जालसाजी सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराया है।
विवेचना में सामने आया कि पुलिस और प्रशासन को धोखा देने के लिए वह दो नामों का इस्तेमाल करता है। माफिया अजीत शाही काे पता था कि उसके अपराध से उसे सजा हो सकती है ऐसे में उसने विदेश भागने और अवैध संपत्तियों को वैध में परिवर्तित करने के उद्देश्य से अजीत वीर विक्रम सिंह का नाम इस्तेमाल करता था। उसने इसी नाम से गलत तरीके से पासपोर्ट भी बनवाया है।
पासपोर्ट पर उसने अलग तरीके से हस्ताक्षर किया है जबकि कोर्ट में दिए गए शपथपत्र में हस्ताक्षर का तरीका अलग है। विवेचना में यह भी सामने आया कि उसने दो-दो भारत निर्वाचन कार्ड बनवाया है। वह इसका इस्तेमाल अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग आपराधिक उद्देश्य के लिए करता है। विवेचना में अजीत शाही को कूटरचित दस्तावेज की मदद से जालसाजी करने का आरोपी पाते हुए चार्जशीट दाखिल कर दी गई है।