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गोरखपुर: प्लास्टिक पार्क की राह हुई आसान, पांच हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
Thu, 11 Nov 2021 02:24 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 11 Nov 2021 02:24 PM IST
सार
प्राधिकरण के मुताबिक डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही गोरखपुर आएगी। कमेटी, पार्क के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास चिह्नित जमीन का निरीक्षण करेगी जिसके बाद प्लास्टिक पार्क की स्थापना को अंतिम मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है।
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गोरखपुर शहर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र में प्रस्तावित प्लास्टिक पार्क की स्थापना की राह थोड़ी और आसान हो गई है। पार्क के लिए तैयार की गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) पर राज्य सरकार की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने भी सैद्धांतिक सहमति जताई है। गीडा की तरफ से मंगलवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए डीपीआर का प्रेजेंटेशन दिया गया था।
प्राधिकरण के मुताबिक डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही गोरखपुर आएगी। कमेटी, पार्क के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास चिह्नित जमीन का निरीक्षण करेगी जिसके बाद प्लास्टिक पार्क की स्थापना को अंतिम मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। प्राधिकरण का कहना है कि मंजूरी मिलते ही पार्क विकसित करने का काम शुरू करा दिया जाएगा।
71 एकड़ में विकसित होगा पार्क, 90 औद्योगिक भूखंड होंगे
प्लास्टिक पार्क की डीपीआर 12 अक्तूबर को राज्य सरकार को भेजी गई थी। वहां से मंजूरी के बाद 20 अक्तूबर को इसे केंद्र सरकार को भेज दिया गया था। मंगलवार यानी नौ नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से डीपीआर का प्रेजेंटेशन रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल एनके संतोषी की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति के सामने दिया गया। पार्क की स्थापना के लिए 71 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। इसमें 90 औद्योगिक भूखंड होंगे। इनमें 600 से लेकर 17 हजार वर्ग मीटर तक के भूखंड शामिल हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक भवन, यूटिलिटी शॉप, भंडारण इकाइयां संचालित होंगी। प्रशासनिक भवन 600 वर्ग मीटर में होगा। इसमें भूतल पर बैंक, कैंटीन एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा। प्रथम तल पर श्रमिकों के लिए डॉरमेट्री व प्रबंधकीय आवास भी उपलब्ध होंगे।
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पांच हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, 1200 वर्ग मीटर में बनेगा सीएफसी
प्लास्टिक पार्क की स्थापना से करीब पांच हजार लोगों को परोक्ष और अपरोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। वहीं सीपेट के लिए चिह्नित 1200 वर्ग मीटर जमीन पर कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना की जाएगी। इस सेंटर में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के निर्माण के लिए आधुनिक प्लांट एवं मशीनरी लगाई जाएगी। टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन तथा रिसर्च की सुविधा भी दी जाएगी।
क्या है प्लास्टिक पार्क
प्लास्टिक पार्क में केवल प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी। विशेष क्षेत्र होने से बड़े पैमाने पर निवेश की भी उम्मीद है। प्लास्टिक पार्क में भूमि विकास एवं अन्य आधारभूत संरचना पर करीब 81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भारत सरकार से 40 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि बाकी रकम का इंतजाम गीडा को खुद करना होगा।
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने प्लास्टिक पार्क की डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। जल्द ही यह समिति जमीन देखने गोरखपुर आएगी। इसके बाद अंतिम मंजूरी मिल जाएगी और पार्क विकसित करने का काम शुरू हो जाएगा।
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प्राधिकरण के मुताबिक डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति बनने के बाद अब विशेषज्ञ कमेटी जल्द ही गोरखपुर आएगी। कमेटी, पार्क के लिए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे के पास चिह्नित जमीन का निरीक्षण करेगी जिसके बाद प्लास्टिक पार्क की स्थापना को अंतिम मंजूरी मिल जाने की उम्मीद है। प्राधिकरण का कहना है कि मंजूरी मिलते ही पार्क विकसित करने का काम शुरू करा दिया जाएगा।
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71 एकड़ में विकसित होगा पार्क, 90 औद्योगिक भूखंड होंगे
प्लास्टिक पार्क की डीपीआर 12 अक्तूबर को राज्य सरकार को भेजी गई थी। वहां से मंजूरी के बाद 20 अक्तूबर को इसे केंद्र सरकार को भेज दिया गया था। मंगलवार यानी नौ नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से डीपीआर का प्रेजेंटेशन रसायन एवं पेट्रो रसायन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर जनरल एनके संतोषी की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति के सामने दिया गया। पार्क की स्थापना के लिए 71 एकड़ जमीन प्रस्तावित है। इसमें 90 औद्योगिक भूखंड होंगे। इनमें 600 से लेकर 17 हजार वर्ग मीटर तक के भूखंड शामिल हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक भवन, यूटिलिटी शॉप, भंडारण इकाइयां संचालित होंगी। प्रशासनिक भवन 600 वर्ग मीटर में होगा। इसमें भूतल पर बैंक, कैंटीन एवं प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा। प्रथम तल पर श्रमिकों के लिए डॉरमेट्री व प्रबंधकीय आवास भी उपलब्ध होंगे।
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पांच हजार लोगों को मिलेगा रोजगार, 1200 वर्ग मीटर में बनेगा सीएफसी
प्लास्टिक पार्क की स्थापना से करीब पांच हजार लोगों को परोक्ष और अपरोक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। वहीं सीपेट के लिए चिह्नित 1200 वर्ग मीटर जमीन पर कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) की स्थापना की जाएगी। इस सेंटर में प्लास्टिक से बनी वस्तुओं के निर्माण के लिए आधुनिक प्लांट एवं मशीनरी लगाई जाएगी। टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन तथा रिसर्च की सुविधा भी दी जाएगी।
क्या है प्लास्टिक पार्क
प्लास्टिक पार्क में केवल प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां स्थापित होंगी। विशेष क्षेत्र होने से बड़े पैमाने पर निवेश की भी उम्मीद है। प्लास्टिक पार्क में भूमि विकास एवं अन्य आधारभूत संरचना पर करीब 81 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। भारत सरकार से 40 करोड़ रुपये मिलेंगे जबकि बाकी रकम का इंतजाम गीडा को खुद करना होगा।
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने बताया कि केंद्र सरकार की विशेषज्ञ समिति ने प्लास्टिक पार्क की डीपीआर पर सैद्धांतिक सहमति जताई है। जल्द ही यह समिति जमीन देखने गोरखपुर आएगी। इसके बाद अंतिम मंजूरी मिल जाएगी और पार्क विकसित करने का काम शुरू हो जाएगा।