Gorakhpur News: सूदखोरों के जाल में फंसे...तबाह हो गई जिंदगी, खुदकुशी तक की नौबत
उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 के मुताबिक, साहूकारी के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। इसके तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए रुपये पर 12 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज वसूल सकते हैं। लेकिन, वर्तमान में जिले में एक भी लाइसेंसी नहीं हैं।
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सूदखोरों के चक्कर में फंसकर आर्थिक रूप से कमजोर और बेबस ही नहीं, जरूरतमंद व्यापारी और आम लोगों की जिंदगी तबाह हो जा रही है। शहर से लेकर गांव तक सूदखोरों का जाल इस कदर है कि जिसने में भी इनसे एक बार कर्ज लिया वह जिंदगी भर कर्जदार बना रहता है।
दस फीसदी मासिक ब्याज पर सूद की रकम देने वाले ये धंधेबाज पूरे साल दबंगई कर उनसे वसूली करते हैं। वहीं, सामाजिक पतन अलग होता है। सूदखोरों के दलदल में फंसे कई लोग तो खुदकुशी तक का कदम उठा लेते हैं।
ताजा मामला राष्ट्रीय सह संपर्क प्रमुख सहकार भारतीय व उत्तर प्रदेश कोऑपरेटिव फेडरेशन के उप सभापति रमाशंकर जायसवाल के बेटे रोहित जायसवाल का सामने आया है। चेक बाउंस के मामले में कोर्ट से जारी एनबीडब्ल्यू में गिरफ्तारी हुई और जेल गए। दरअसल, रोहित जायसवाल गोरखनाथ इलाके में लक्ष्मी जनरल स्टोर चलाते थे। अच्छे व्यापारी रहे। लेकिन सूदखोरों के जाल में ऐसा फंसे की कर्जदार बन गए।
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व्यापार को बढ़ाने के लिए वर्ष 2019 में 12 लाख रुपये कर्ज लिए। इसके बदले में 31 लाख 83 हजार नौ सौ रुपये नकद व 16 लाख 97 हजार 400 रुपये खाते में अदा किए गए। फिर भी कर्जदार बने रहे। इससे परेशान होकर रोहित ने 10 जनवरी 2023 को गोरखनाथ थाने में केस भी दर्ज कराया।
पुलिस ने रंगदारी मांगने, धमकी देने व साहूकारी एक्ट का केस दर्ज तो किया, लेकिन कार्रवाई आज तक पूरी नहीं हो सकी। अब रोहित के गिरफ्तारी के बाद पूरा मामला फिर सामने आ गया है। खबर है कि पुलिस ने इस मामले में नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।
कुछ यही हाल सहजनवां के टड़वा खुर्द के आलोक मिश्रा का भी है। एक शख्स से 60 हजार रुपये कर्ज लेने के बाद उसे चुकाने के चक्कर में वह 24 लोगों से उधार लेकर 1.40 करोड़ रुपये अदा कर चुके हैं। लेकिन अब भी कर्जदार बने हुए हैं। दो महीने पहले आलोक ने परेशान होकर आईजीआरएस पर 24 सूदखोरों का नाम और मोबाइल फोन लिखते हुए कर्जदारों से मुक्ति पाने की गुहार लगाई।
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वर्तमान में एक भी लाइसेंसी नहीं, ये है नियम
उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 के मुताबिक, साहूकारी के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। इसके तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए रुपये पर 12 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज वसूल सकते हैं। लेकिन, वर्तमान में जिले में एक भी लाइसेंसी नहीं हैं।