नियमों को ताक पर रखकर ठेका दिया गया, नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही की थी सहमति
- अग्रिम भुगतान व सामग्री क्रय की आपूर्ति के आदेश पर नगर पंचायत अध्यक्ष, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के हस्ताक्षर
- कमिश्नर की जांच में हुआ था पर्दाफाश, प्रमुख सचिव को भेजी थी रिपोर्ट
- मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष सहित तीन के खिलाफ बांसगांव थाने में बृहस्पतिवार को दर्ज हुआ था केस
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गोरखपुर के बांसगांव नगर पंचायत का वाहन खरीद घोटाला अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही उर्फ पप्पू और तत्कालीन अधिशासी अधिकारी मल्ल की सहमति से हुआ। इसका पर्दाफाश कमिश्नर जयंत नार्लिकर की जांच में हुआ था।
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि नगर पंचायत बांसगांव के जिस पत्र के माध्यम से उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड को अग्रिम भुगतान एवं सामग्री क्रय आपूर्ति का आदेश दिया गया था, उसपर नगर पंचायत अध्यक्ष, अधिशासी अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। इससे परिलक्षित होता है कि इस कार्य में दोनों की सहमति रही है।
यह भी स्पष्ट है कि नगर पंचायत अध्यक्ष व अधिशासी अधिकारी बांसगांव ने ई-टेंडरिंग के बगैर ही फर्म के उपलब्ध प्रोफार्मा बिल के आधार पर अग्रिम भुगतान करके सामग्री क्रय की थी। यह ई टेंडरिंग के सुसंगत शासनादेश का उल्लंघन है।
बांसगांव के नगर पंचायत अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही उफ पप्पू और अधिशासी अधिकारी पर घोटाले के आरोपों की जांच कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने गोरखपुर के अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व और अपर निदेशक कोषागार व पेंशन से कराई थी।
इसके मुताबिक ई-टेंडरिंग के बगैर ही नगर पंचायत बांसगांव ने एक करोड़ 30 लाख 18 हजार 450 रुपये की खरीदारी की थी। उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड मुरादाबाद ने जो प्रोफार्मा बिल उपलब्ध कराया, उसी आधार पर अग्रिम भुगतान करके सामग्री खरीदी गई।
ये है नियम, जिसे दरकिनार किया गया
इस रिपोर्ट के आधार पर ही अपर आयुक्त प्रशासन को तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। कमिश्नर की जांच रिपोर्ट 8 अगस्त 2019 को प्रमुख सचिव नगर विकास को भी भेजी गई।
अब अलग-अलग मामलों की जांच जिलाधिकारी के. विजयेंद्र पांडियन ने उप जिलाधिकारी बांसगांव पंकज दीक्षित से कराई तो घोटाला खुलकर सामने आ गया। इसी आधार पर ही वर्तमान अधिशासी अधिकारी ने बांसगांव नगर पंचायत के अध्यक्ष वेद प्रकाश शाही उर्फ पप्पू, तत्कालीन अधिशासी अधिकारी व उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड मुरादाबाद के तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक के खिलाफ बांसगांव थाने में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा कराया है। इस संबंध में आरोपित बांसगांव नगर पंचायत अध्यक्ष से उनका पक्ष जानने के प्रयास किए गए, मगर बात नहीं हो सकी। जब भी उनका पक्ष प्राप्त होगा, प्रकाशित किया जाएगा।
22 जुलाई 2019 के शासनादेश के मुताबिक 20 हजार रुपये तक का काम बिना कोटेशन कराया जा सकता है। यदि 20 हजार से एक भी रुपये का ज्यादा काम है तो कोटेशन अनिवार्य रूप से लेना होगा। यह व्यवस्था एक लाख रुपये तक के काम पर लागू रहती है। इससे ज्यादा की धनराशि पर काम करने का टेंडर निकाला जाता है। 10 लाख से अधिक का काम होता है तो ई-टेंडर कराना पड़ता है, लेकिन बांसगांव नगर पंचायत में ऐसा नहीं हुआ। 1.30 करोड़ 18 हजार 450 रुपये की खरीदारी कर ली गई, लेकिन ई-टेंडर नहीं कराए गए।
बांसगांव इंस्पेक्टर सीपी जैसल ने कहा कि मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू कर दी गई है। मामला पुराना है। तमाम लोगों से पूछताछ की जाएगी। इसकी विवेचना अंबरीश बहादुर राजभर कर रहे हैं। जल्द ही आरोपितों से पूछताछ करके आगे की कार्रवाई की जाएगी।