{"_id":"69e3f5332199bacee80bcd77","slug":"case-of-admitting-patients-to-private-hospital-by-luring-them-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1293993-2026-04-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"मरीज माफिया : आरोपियों की कॉल डिटेल और खातों की जांच कर रही पुलिस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मरीज माफिया : आरोपियों की कॉल डिटेल और खातों की जांच कर रही पुलिस
विज्ञापन
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सरकारी एंबुलेंस से लाई गई एक बच्ची को निजी अस्पताल ले जाने के मामले में सामने आए मरीज माफिया नेटवर्क की जांच तेज हो गई है। गुलरिहा पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और बैंक खातों की गहन पड़ताल कर रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
सूत्रों के मुताबिक, एंबुलेंस में मरीज बैठाने के साथ ही खेल शुरू हो जाता था। ईएमटी और चालक परिजनों को बहकाकर मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की साजिश रचते थे। इसके पीछे मोटे कमीशन का लालच रहता था, जिसमें सरकारी तंत्र से जुड़े कुछ लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
दरअसल, 14 अप्रैल को सिद्धार्थनगर से गंभीर हालत में एक बच्ची को 108 एम्बुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज लाया गया। बाल रोग संस्थान में चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया लेकिन ईएमटी वेद प्रकाश और चालक राहुल ने परिजनों से झूठ बोलते हुए कहा कि बच्ची की हालत गंभीर है और वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है। इसके बाद उन्होंने निजी अस्पताल में भर्ती कराने का सुझाव दिया। जांच में सामने आया था कि आरोपियों ने तारामंडल स्थित सानवी अस्पताल के मैनेजर राहुल शर्मा से संपर्क किया, जिसने आगे फातिमा रोड स्थित गौरी अस्पताल के मैनेजर अंकित शुक्ला को सूचना दी। इसी दौरान निजी एंबुलेंस से बच्ची को ले जाने की कोशिश की गई लेकिन बीआरडी गेट पर तैनात गार्डों ने उन्हें पकड़ लिया।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि राहुल शर्मा के शहर के 20 से अधिक निजी अस्पतालों से संपर्क थे और वह नियमित रूप से मरीज भेजता था। इसके बदले ईएमटी और चालक कमीशन लेते थे। पुलिस अब इस संगठित नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की तैयारी में है। सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि आरोपियों की सीडीआर और बैंक खातों की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक, एंबुलेंस में मरीज बैठाने के साथ ही खेल शुरू हो जाता था। ईएमटी और चालक परिजनों को बहकाकर मरीज को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की साजिश रचते थे। इसके पीछे मोटे कमीशन का लालच रहता था, जिसमें सरकारी तंत्र से जुड़े कुछ लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
विज्ञापन
दरअसल, 14 अप्रैल को सिद्धार्थनगर से गंभीर हालत में एक बच्ची को 108 एम्बुलेंस से बीआरडी मेडिकल कॉलेज लाया गया। बाल रोग संस्थान में चिकित्सकों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया लेकिन ईएमटी वेद प्रकाश और चालक राहुल ने परिजनों से झूठ बोलते हुए कहा कि बच्ची की हालत गंभीर है और वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं है। इसके बाद उन्होंने निजी अस्पताल में भर्ती कराने का सुझाव दिया। जांच में सामने आया था कि आरोपियों ने तारामंडल स्थित सानवी अस्पताल के मैनेजर राहुल शर्मा से संपर्क किया, जिसने आगे फातिमा रोड स्थित गौरी अस्पताल के मैनेजर अंकित शुक्ला को सूचना दी। इसी दौरान निजी एंबुलेंस से बच्ची को ले जाने की कोशिश की गई लेकिन बीआरडी गेट पर तैनात गार्डों ने उन्हें पकड़ लिया।
विज्ञापन
सूत्रों ने बताया कि राहुल शर्मा के शहर के 20 से अधिक निजी अस्पतालों से संपर्क थे और वह नियमित रूप से मरीज भेजता था। इसके बदले ईएमटी और चालक कमीशन लेते थे। पुलिस अब इस संगठित नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य संलिप्त लोगों पर कार्रवाई की तैयारी में है। सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि आरोपियों की सीडीआर और बैंक खातों की जांच की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।