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नेपाल से गोरखपुर में भाई को लेने आया ये शख्स, बोला- अस्थियां भी नहीं मिली
Wed, 01 Jan 2020 01:05 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Jan 2020 01:05 PM IST
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नेपाल से भाई को लेने आए केशव बहादुर।
- फोटो : अमर उजाला
काठमांडू निवासी केशव बहादुर दगाईपुन गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर अपने भाई गम बहादुर को लेने आए थे, लेकिन उन्हें उनकी अस्थियां भी नहीं मिली। दरअसल, चेन्नई से यहां आए नेपाल के काठमांडू निवासी गम बहादुर की स्टेशन पर तबीयत बिगड़ गई थी, उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया गया था, जहां उनकी मौत हो गई। पुलिस ने अज्ञात में अंतिम संस्कार करा दिया।
जब गम बहादुर घर नहीं पहुंचे तो खोजते हुए रिश्तेदारों के साथ मंगलवार को रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। गम बहादुर की मौत की खबर सुनते ही केशव फफक पड़े। बोले, भाई को घर ले जाने आए थे और उनकी अस्थियां भी नहीं मिली। घर जाकर क्या बताऊंगा। यात्री मित्र ने लिखा-पढ़ी के बाद गम बहादुर का सारा सामान उनको सुपुर्द कर दिया।
सामान में कुछ भारतीय-नेपाली मुद्रा दो इलेक्ट्रानिक घड़ी और बच्चों के लिए कुछ तोहफे भी थे। यात्री मित्र कार्यालय में तैनात डिप्टी एसएस ने बताया कि 25 दिसंबर को सूचना मिली थी कि प्लेटफॉर्म पर एक नेपाली युवक अचेत पड़ा हुआ है। तत्काल रेलवे के डॉक्टर को बुलाकर चेकअप कराया गया।
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डॉक्टर ने यात्री को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। भाई केशव ने बताया कि 25 दिसंबर को मैसेंजर पर बात हुई थी। गम बहादुर ने बताया था कि तबीयत खराब है। इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया। दो-तीन दिन इंतजार किया गया, जब नहीं पहुंचे तब हम लोग गोरखपुर के लिए चले थे।
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जब गम बहादुर घर नहीं पहुंचे तो खोजते हुए रिश्तेदारों के साथ मंगलवार को रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। गम बहादुर की मौत की खबर सुनते ही केशव फफक पड़े। बोले, भाई को घर ले जाने आए थे और उनकी अस्थियां भी नहीं मिली। घर जाकर क्या बताऊंगा। यात्री मित्र ने लिखा-पढ़ी के बाद गम बहादुर का सारा सामान उनको सुपुर्द कर दिया।
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सामान में कुछ भारतीय-नेपाली मुद्रा दो इलेक्ट्रानिक घड़ी और बच्चों के लिए कुछ तोहफे भी थे। यात्री मित्र कार्यालय में तैनात डिप्टी एसएस ने बताया कि 25 दिसंबर को सूचना मिली थी कि प्लेटफॉर्म पर एक नेपाली युवक अचेत पड़ा हुआ है। तत्काल रेलवे के डॉक्टर को बुलाकर चेकअप कराया गया।
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डॉक्टर ने यात्री को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। भाई केशव ने बताया कि 25 दिसंबर को मैसेंजर पर बात हुई थी। गम बहादुर ने बताया था कि तबीयत खराब है। इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया। दो-तीन दिन इंतजार किया गया, जब नहीं पहुंचे तब हम लोग गोरखपुर के लिए चले थे।