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Gorakhpur News: कैंट-वाल्मीकिनगर रूट पर पहले होगा पुलों का निर्माण
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- इस रूट के दोहरीकरण के लिए एजेंसी तय, अंतरिम बजट में मिले हैं 310 करोड़ रुपये
- 1269.8 करोड़ से तीन साल में पूरा होगा दोहरीकरण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बिहार व नेपाल बार्डर को गोरखपुर से जोड़ने वाली कैंट-वाल्मीकिनगर रेल मार्ग का दोहरीकरण जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी तय हो गई है। पहले छोटे पुल और रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तैयार किए जाएंगे। गंडक नदी पर छितौनी-बगहा रेल पुल के समानांतर दूसरा पुल बन जाने के बाद पटरी बिछाने का कार्य शुरू होगा।
गोरखपुर कैंट से कप्तानगंज, वाल्मीकिनगर होते हुए नरकटियागंज तक जाने वाली रेल लाइन नेपाल व बिहार के सीमावर्ती हिस्से की लाइफ लाइन है। इस रूट पर सत्याग्रह, सप्तक्रांति, बापूधाम एक्सप्रेस समेत करीब 35 ट्रेनों का संचालन होता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इस रूट से चलती हैं। उत्तर भारत से पूर्वी भारत तक सवारी और माल ढुलाई वाली इस लाइन का अलग-अलग खंड में दोहरीकरण का कार्य चल रहा है।
बीते सितंबर में इस रूट के सबसे बड़े हिस्से गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर के दोहरीकरण को मंजूरी मिली थी। 1269.8 करोड़ रुपये से इस लाइन के दोहरीकरण का कार्य तीन साल में पूरा होना है। दोहरीकरण कार्य की शुरूआत के लिए अब टेंडर फाइनल हो चुका है। कार्यदायी एजेंसी ने पहले छोटे पुलों का निर्माण व जरूरत के अनुसार स्टेशनों पर नए प्लेटफार्म बनाने का कार्य पहले कराने की बात कही है।
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गंडक नदी पर 854 मीटर लंबा नया पुल बनेगा
इस परियोजना के लिए गंडक नदी पर 854 मीटर लंबा नया पुल बनेगा। यहां पहले से ही रेल सह सड़क पुल है। नया पुल पहले पुल के बगल में बनाया जाना है। इसके लिए गंडक नदी में बांध भी बनाना होगा। पुल के बाद वाल्मीकिनगर का जंगल है। इसके अलावा 16 बड़े एवं 38 छोटे पुल बनाए जाने हैं। इस खंड पर कुल 12 रेलवे स्टेशन हैं, जिसमें से गोरखपुर कैंट, उन्नौला, पिपराइच, बोदरवार, कप्तानगंज, घुघली, सिसवा बाजार, खड्डा, पनियहवा एवं वाल्मीकिनगर रोड क्राॅसिंग स्टेशन हैं। इसके अलावा महुअवा खुर्द व गुरली रामगढ़वा हाल्ट स्टेशन हैं। इन सभी स्टेशनों पर नए प्लेटफाॅर्म, फुट ओवरब्रिज, शेड आदि बनेंगे।
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कोट-
गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर रूट के दोहरीकरण का कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी नामित हो चुकी है। पहले पुल-पुलिया व नए प्लेटफार्मों का निर्माण कराया जाएगा। पूरी परियोजना के लिए बजट स्वीकृत होने व अंतरिम बजट में भी धन का प्रावधान होने से कार्य में तेजी आएगी।
पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर
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- 1269.8 करोड़ से तीन साल में पूरा होगा दोहरीकरण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बिहार व नेपाल बार्डर को गोरखपुर से जोड़ने वाली कैंट-वाल्मीकिनगर रेल मार्ग का दोहरीकरण जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी तय हो गई है। पहले छोटे पुल और रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तैयार किए जाएंगे। गंडक नदी पर छितौनी-बगहा रेल पुल के समानांतर दूसरा पुल बन जाने के बाद पटरी बिछाने का कार्य शुरू होगा।
गोरखपुर कैंट से कप्तानगंज, वाल्मीकिनगर होते हुए नरकटियागंज तक जाने वाली रेल लाइन नेपाल व बिहार के सीमावर्ती हिस्से की लाइफ लाइन है। इस रूट पर सत्याग्रह, सप्तक्रांति, बापूधाम एक्सप्रेस समेत करीब 35 ट्रेनों का संचालन होता है। इसके अलावा बड़ी संख्या में मालगाड़ियां भी इस रूट से चलती हैं। उत्तर भारत से पूर्वी भारत तक सवारी और माल ढुलाई वाली इस लाइन का अलग-अलग खंड में दोहरीकरण का कार्य चल रहा है।
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बीते सितंबर में इस रूट के सबसे बड़े हिस्से गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर के दोहरीकरण को मंजूरी मिली थी। 1269.8 करोड़ रुपये से इस लाइन के दोहरीकरण का कार्य तीन साल में पूरा होना है। दोहरीकरण कार्य की शुरूआत के लिए अब टेंडर फाइनल हो चुका है। कार्यदायी एजेंसी ने पहले छोटे पुलों का निर्माण व जरूरत के अनुसार स्टेशनों पर नए प्लेटफार्म बनाने का कार्य पहले कराने की बात कही है।
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गंडक नदी पर 854 मीटर लंबा नया पुल बनेगा
इस परियोजना के लिए गंडक नदी पर 854 मीटर लंबा नया पुल बनेगा। यहां पहले से ही रेल सह सड़क पुल है। नया पुल पहले पुल के बगल में बनाया जाना है। इसके लिए गंडक नदी में बांध भी बनाना होगा। पुल के बाद वाल्मीकिनगर का जंगल है। इसके अलावा 16 बड़े एवं 38 छोटे पुल बनाए जाने हैं। इस खंड पर कुल 12 रेलवे स्टेशन हैं, जिसमें से गोरखपुर कैंट, उन्नौला, पिपराइच, बोदरवार, कप्तानगंज, घुघली, सिसवा बाजार, खड्डा, पनियहवा एवं वाल्मीकिनगर रोड क्राॅसिंग स्टेशन हैं। इसके अलावा महुअवा खुर्द व गुरली रामगढ़वा हाल्ट स्टेशन हैं। इन सभी स्टेशनों पर नए प्लेटफाॅर्म, फुट ओवरब्रिज, शेड आदि बनेंगे।
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कोट-
गोरखपुर कैंट-वाल्मीकिनगर रूट के दोहरीकरण का कार्य जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी नामित हो चुकी है। पहले पुल-पुलिया व नए प्लेटफार्मों का निर्माण कराया जाएगा। पूरी परियोजना के लिए बजट स्वीकृत होने व अंतरिम बजट में भी धन का प्रावधान होने से कार्य में तेजी आएगी।
पंकज कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनईआर