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बीआरडी : आसानी से मिलेंगे ब्लड कंपोनेंट...पैसे के अभाव में नहीं जाएगी मरीज की जान
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- प्राचार्य ने शासन को भेजा प्रस्ताव, गरीब और आयुष्मान के लाभार्थियों को मुफ्त में सुविधा का लाभ देने की तैयारी
- बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में लगी है ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन
गोरखपुर। लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा (ब्लड कंपोनेंट) के लिए मरीजों को न तो दलालों के पास जाना पड़ेगा और न ही उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ेगी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गरीब मरीजों को निशुल्क और बाकी मरीजों को न्यूनतम दर में इसका लाभ मिल सके, इसके लिए प्राचार्य ने शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में स्थित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगी है। रक्त के घटकों को अलग-अलग करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। क्रायोप्रेसिपिटेट (आनुवांशिक रक्त संबंधित विकार में) इसकी जरूरत पड़ती है। एक बार रक्तदान से कंपोनेंट को अलग-अलग कर चार मरीजों की जान बचाई जा सकती है। ब्लड कंपोनेंट लेने की कीमत आम मरीजों पर भारी पड़ रही है।
ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन से मरीजों को रक्त से जरूरी कंपोनेंट को सरलता से प्राप्त किया जाता है। इसका सबसे ज्यादा फायदा रक्त से प्लेटलेट्स को प्राप्त करने में है। बरसात के मौसम में डेंगू तेजी से फैलता है, ऐसे में उस वक्त मरीजों के शरीर में प्लेटलेट्स तेजी के कम हो जाती है। ऐसे में यह मशीन रक्त से प्लेटलेट्स को प्राप्त करने में सहायक है। मरीजों को उचित कंपोनेंट के लिए करीब आठ से दस हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
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इसके लिए रक्तदान से खून के कंपोनेंट सेपरेशन की लागत को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है। केजीएमयू लखनऊ और अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू न्यूनतम शुल्क को आधार मानते हुए यहां भी दरें तय करने एवं आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह सेवा पूरी तरह निशुल्क करने के लिए प्राचार्य ने प्रस्ताव भेजा है।
नेहरू चिकित्सालय की एसआईसी डॉ. कंचन श्रीवास्तव ने बताया कि मशीन सुचारु रूप से कार्य कर रही है और तकनीकी रूप से सक्षम है। इस व्यवस्था से कंपोनेंट प्राप्त करने की कीमत ज्यादा होने से बहुत कम मरीज लाभ ले पा रहे हैं। कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
इससे खून के घटकों को अलग करने से मरीज को सिर्फ वही कंपोनेंट मिल पाता है जिसकी उसे जरूरत होती है, जिससे बाकी कंपोनेंट अन्य जरूरतमंद मरीजों के काम आ सकते हैं। यह व्यवस्था रक्तदान की उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देती है। कंपोनेंट प्राप्ति के लिए मरीजों को न्यूनतम भुगतान करना पड़े, आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह सेवा पूरी तरह निशुल्क करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
- डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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- बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में लगी है ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन
गोरखपुर। लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लेटलेट्स, प्लाज्मा (ब्लड कंपोनेंट) के लिए मरीजों को न तो दलालों के पास जाना पड़ेगा और न ही उन्हें मोटी रकम खर्च करनी पड़ेगी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गरीब मरीजों को निशुल्क और बाकी मरीजों को न्यूनतम दर में इसका लाभ मिल सके, इसके लिए प्राचार्य ने शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में स्थित ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगी है। रक्त के घटकों को अलग-अलग करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। क्रायोप्रेसिपिटेट (आनुवांशिक रक्त संबंधित विकार में) इसकी जरूरत पड़ती है। एक बार रक्तदान से कंपोनेंट को अलग-अलग कर चार मरीजों की जान बचाई जा सकती है। ब्लड कंपोनेंट लेने की कीमत आम मरीजों पर भारी पड़ रही है।
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ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन से मरीजों को रक्त से जरूरी कंपोनेंट को सरलता से प्राप्त किया जाता है। इसका सबसे ज्यादा फायदा रक्त से प्लेटलेट्स को प्राप्त करने में है। बरसात के मौसम में डेंगू तेजी से फैलता है, ऐसे में उस वक्त मरीजों के शरीर में प्लेटलेट्स तेजी के कम हो जाती है। ऐसे में यह मशीन रक्त से प्लेटलेट्स को प्राप्त करने में सहायक है। मरीजों को उचित कंपोनेंट के लिए करीब आठ से दस हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
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इसके लिए रक्तदान से खून के कंपोनेंट सेपरेशन की लागत को न्यूनतम करने का प्रयास किया जा रहा है। केजीएमयू लखनऊ और अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लागू न्यूनतम शुल्क को आधार मानते हुए यहां भी दरें तय करने एवं आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह सेवा पूरी तरह निशुल्क करने के लिए प्राचार्य ने प्रस्ताव भेजा है।
नेहरू चिकित्सालय की एसआईसी डॉ. कंचन श्रीवास्तव ने बताया कि मशीन सुचारु रूप से कार्य कर रही है और तकनीकी रूप से सक्षम है। इस व्यवस्था से कंपोनेंट प्राप्त करने की कीमत ज्यादा होने से बहुत कम मरीज लाभ ले पा रहे हैं। कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
इससे खून के घटकों को अलग करने से मरीज को सिर्फ वही कंपोनेंट मिल पाता है जिसकी उसे जरूरत होती है, जिससे बाकी कंपोनेंट अन्य जरूरतमंद मरीजों के काम आ सकते हैं। यह व्यवस्था रक्तदान की उपयोगिता को कई गुना बढ़ा देती है। कंपोनेंट प्राप्ति के लिए मरीजों को न्यूनतम भुगतान करना पड़े, आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह सेवा पूरी तरह निशुल्क करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है।
- डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज