नशीली दवाओं के काले कारोबार: जिले के तीन दवा व्यापारियों से जुड़े हैं गुप्ता भाइयों के तार, खुलेंगे और राज
पेंटाजोसिम का इस्तेमाल ऑपरेशन के दौरान किया जाता है, जो एनीस्थीसिया के डॉक्टर लगाते हैं। जबकि, नशे के रूप में नशेड़ी इसे इंजेक्टबुल ड्रग के तौर पर लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि गुप्ता बंधुओं ने ये दवाएं भालोटिया मार्केट के तीन दुकानदारों से मंगाई थीं। क्योंकि, इन्हीं दुकानदारों के पास संबंधित कंपनी की एजेंसी है।
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नशीली दवाओं के काले कारोबार में शामिल गुप्ता भाइयों के गिरोह का संबंध आगरा के अलावा जिले के तीन अन्य बड़े दवा व्यापारियों से भी बताया जा रहा है। तीनों व्यापारी जेनेरिक दवाओं के केयरिंग एंड फारवर्डिंग एजेंसी (सीएफए) का काम करते हैं। एक दवा व्यापारी नारकोटिक्स से संबंधित दवाएं मंगवाता है। इन दवाओं में डाइजीपॉम से लेकर पेंटाजोसिम तक शामिल हैं। संतकबीरनगर में पेंटाजोसिम की बड़ी खेप पकड़ी भी गई है। इसके बावजूद नारकोटिक्स विभाग खामोश है, जिससे सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि भालोटिया मार्केट में जेनेरिक दवाओं का सीएफए दो बड़े फर्मों के पास है। इन फर्मों के पास ही नारकोक्टिस की दवाएं आती हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब सीएफए जिले के पास है, तो पेंटाजोसिम दवाएं संतकबीरनगर कैसे पहुंच गईं? वह भी 20 हजार वायल? इसी तरह अल्प्राजोलम के डेढ़ लाख टैबलेट और ट्रामाडोल के सवा लाख टैबलेट भी मिले हैं। ये दवाएं दर्द निवारक हैं। इनकी मांग पूर्वोत्तर राज्यों समेत नेपाल, बंगाल, बांग्लादेश सहित कई जिलों में है।
पेंटाजोसिम का इस्तेमाल ऑपरेशन के दौरान किया जाता है, जो एनीस्थीसिया के डॉक्टर लगाते हैं। जबकि, नशे के रूप में नशेड़ी इसे इंजेक्टबुल ड्रग के तौर पर लेते हैं। सूत्रों का कहना है कि गुप्ता बंधुओं ने ये दवाएं भालोटिया मार्केट के तीन दुकानदारों से मंगाई थीं। क्योंकि, इन्हीं दुकानदारों के पास संबंधित कंपनी की एजेंसी है। इसके बावजूद इन दवा व्यापारियों पर शिकंजा नहीं कसा जा रहा है। इससे विभाग पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। मामले में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
शेड्यूल एच व एक्स में शामिल हैं नारकोटिक्स की दवाएं
जिले में नशीली दवाओं के काले धंधे का इतिहास पुराना है। इसमें भालोटिया मार्केट के कई व्यापारी शामिल बताए जाते हैं, जो महराजगंज के रास्ते नेपाल, देवरिया और कुशीनगर के रास्ते बिहार, बंगाल सहित पूर्वोत्तर राज्यों में नशीली दवाएं भेजते हैं। जबकि, शेड्यूल एच व एक्स में शामिल नारकोटिक्स की सभी दवाओं का हिसाब-किताब विभाग सहित नारकोटिक्स विभाग को देना होता है। आरोप है कि विभाग की शह पर दवा व्यापारी एक भी हिसाब-किताब नहीं देते हैं।
अफीम से बनता है फेंसिडिल सिरप
विशेषज्ञों ने बताया कि फेंसिडिल सिरप कोडीनयुक्त है। इसका इस्तेमाल खांसी के मरीज करते हैं, लेकिन यह दवा एनडीपीएस की श्रेणी में शामिल है। यह सिरप अफीम से बनाया जाता है। बताया जा रहा है कि गुप्ता बंधुओं को बचाने के लिए तीनों व्यापारी ड्रग विभाग के यहां चक्कर लगा रहे हैं। ड्रग विभाग का एक कर्मचारी और एक अधिकारी उन्हें बचाने में जीन जान से जुटा है। यही कारण है कि अब तक दोनों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। दोनों भाई दुकानें बंद करके फरार हैं।
ड्रग विभाग ने अपनी तरफ से सभी कार्रवाई कर दी है। गिरफ्तारी पुलिस की टीम करेगी। विभागीय जांच की जा रही है। इस मामले में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -एजाज अहमद, सहायक औषधि आयुक्त