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Gorakhpur News: दुनिया की 60 फीसदी वैक्सीन निर्माण में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण
Tue, 21 Jul 2026 02:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 21 Jul 2026 02:34 AM IST
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गोरखपुर। गोरखपुर। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (एनआईईपीए), नई दिल्ली के चांसलर प्रो. रमा शंकर दुबे ने कहा कि खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा जैसी वैश्विक चुनौतियों का सबसे प्रभावी समाधान आज जैव प्रौद्योगिकी के पास है। दुनिया में उपयोग होने वाली करीब 60 फीसदी वैक्सीन के निर्माण में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है।
सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बायोटेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर दो सप्ताह का ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के उद्घाटन व्याख्यान में प्रो. दुबे ने कहा कि हरित क्रांति से लेकर आधुनिक चिकित्सा, कृषि और औद्योगिक उत्पादन तक जैव प्रौद्योगिकी ने व्यापक बदलाव किए हैं।
बीटी कपास, पुनर्संयोजक डीएनए तकनीक से इंसुलिन उत्पादन, पोलियो नियंत्रण और वैक्सीन निर्माण में भारत की उपलब्धियां इसका उदाहरण हैं। उन्होंने बायोफर्टिलाइजर, जैव-कीटनाशक, जैव-ईंधन और हरित ऊर्जा पर अनुसंधान बढ़ाने की आवश्यकता बताई।कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल ज्ञान बढ़ाना नहीं, मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और समाज की जरूरतों को पूरा करना भी है। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि यह पाठ्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी के नए आयामों से जोड़ने का अवसर देगा।
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पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. दिनेश यादव ने रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. पवन दोहरे ने किया। आभार प्रो. शरद कुमार मिश्र ने जताया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू, असम समेत विभिन्न राज्यों से करीब 60 शिक्षक, शोधार्थी और वैज्ञानिक शामिल हुए। रिफ्रेशर कोर्स 2 अगस्त तक चलेगा।
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सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में यूजीसी–मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र (एमएमटीटीसी) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में बायोटेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर दो सप्ताह का ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के उद्घाटन व्याख्यान में प्रो. दुबे ने कहा कि हरित क्रांति से लेकर आधुनिक चिकित्सा, कृषि और औद्योगिक उत्पादन तक जैव प्रौद्योगिकी ने व्यापक बदलाव किए हैं।
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बीटी कपास, पुनर्संयोजक डीएनए तकनीक से इंसुलिन उत्पादन, पोलियो नियंत्रण और वैक्सीन निर्माण में भारत की उपलब्धियां इसका उदाहरण हैं। उन्होंने बायोफर्टिलाइजर, जैव-कीटनाशक, जैव-ईंधन और हरित ऊर्जा पर अनुसंधान बढ़ाने की आवश्यकता बताई।कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान का उद्देश्य केवल ज्ञान बढ़ाना नहीं, मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और समाज की जरूरतों को पूरा करना भी है। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. अजय कुमार शुक्ल ने कहा कि यह पाठ्यक्रम शिक्षकों और शोधार्थियों को जैव प्रौद्योगिकी के नए आयामों से जोड़ने का अवसर देगा।
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पाठ्यक्रम समन्वयक प्रो. दिनेश यादव ने रूपरेखा प्रस्तुत की। संचालन डॉ. पवन दोहरे ने किया। आभार प्रो. शरद कुमार मिश्र ने जताया। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, जम्मू, असम समेत विभिन्न राज्यों से करीब 60 शिक्षक, शोधार्थी और वैज्ञानिक शामिल हुए। रिफ्रेशर कोर्स 2 अगस्त तक चलेगा।