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इस खास दवा से होगा टीबी रोगी बच्चों का इलाज, बीआरडी में हुई इसकी शुरूआत

Tue, 01 Dec 2020 02:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 01 Dec 2020 02:17 PM IST
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Bedaquiline medicine will free treatment of TB child patient by brd medical college
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में टीबी मरीज बच्ची को दवा देते प्राचार्य डॉ गणेश कुमार। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमडीआर टीबी मरीजों के लिए नई दवा बेडाक्विलिन उपलब्ध है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग एक लाख है। यह दवा 18 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दी जा सकती है। ऐसे में बच्चों के एमडीआर टीबी का इलाज बहुत ही कठिन था। वहीं अब बीआरडी में एमडीआर टीबी के इलाज के लिए नई दवा की शुरूआत की गई है।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार द्वारा विभागाध्यक्ष पलमोनरी मेडिसिन विभाग डॉ. अश्विनी मिश्रा के उपस्थिति में बच्चों के एमडीआर टीबी के लिए बेडाक्विलिन नामक नई दवा का शुभारंभ किया गया। महाराजगंज एवं गोरखपुर के एक-एक एमडीआर टीबी के मरीजों को प्राचार्य ने अपने हाथों से दवा खिलाकर इस दवा को गोरखपुर मंडल में लांच किया। इस उपलक्ष्य में प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष ने एक-एक टीबी के मरीजों को गोद भी लिया।
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बच्चों के एमडीआर टीबी के इलाज के लिए अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में बेडाक्विलिन नामक नई दवा उपलब्ध हो गई है। इस दवा का अनुमानित लागत एक लाख रुपए है जो कि सरकार द्वारा मुफ्त में एमडीआर टीबी से ग्रसित बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी। यह नई दवा 100 फीसदी कारगर है, इसमें अब तक कोई भी रेजिस्टेंस देखने को नहीं मिला है।
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यह दवा गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के अलावा सिर्फ लखनऊ एवं आगरा मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है। प्राइवेट सेक्टर में यह दवा कहीं उपलब्ध नहीं है। यह दवा जापान में बनती है तथा वहीं से मरीजों के लिए भारत सरकार द्वारा निर्यात की जाती है। खास बात ये है कि अभी तक इसका कोई गंभीर साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला है।

बेडाक्विलिन नामक नई दवा को गोरखपुर में उपलब्ध करवाने में सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी एवं डीटीओ डॉ. रामेश्वर मिश्र का महतवपूर्ण योगदान रहा। गौरतलब है कि पूरे विश्व में टीबी संक्रमण के मामले में भारत शीर्ष स्थान पर काबिज है। प्रतिवर्ष संपूर्ण विश्व में 110 लाख लोगों को टीबी होता है, जिसमें से लगभग 30 लाख (एक चौथाई) टीबी के मरीज भारत में ही पाए जाते हैं। प्रतिवर्ष भारत मे लगभग पांच लाख लोगों की मृत्यु का कारण टीबी होता है।

लगभग हर दो मिनट में टीबी के कारण पांच लोगो की मृत्यु होती है। आजकल यह बीमारी एमडीआर टीबी एवं एक्सडीआर के रूप में और भी भयावह रूप ले चुकी है। जब टीबी के कीटाणु ( माइकोवैक्टीरियम ट्यूबरक्लूसिस) दवाओ के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न कर लेते हैं और प्रमथ श्रेणी की दवाएं उनपर बेअसर हो जाती हैं, उस स्थिति में टीबी एमडीआर का रूप ले लेती है। यह बहुत ही भयावह और जानलेवा बीमारी है। हर सौ एमडीआर टीबी के मरीजो में से 30-40 मरीज अततः बीमारी की वजह से मर जाते हैं।
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