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लॉकडाउन का असर: भारत से नेपाल में गए बरातियों के छूटे पसीने, पगडंडियों से दुल्हन के दरवाजे पर पहुंचे लोग
Sat, 22 May 2021 02:43 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
अमर उजाला नेटवर्क, महराजगंज।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 22 May 2021 02:43 PM IST
सार
एक किलोमीटर दूर से कंधे पर सामान लाद भारत में आए बराती।
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पगडंडियों से सामान ले जाते बराती।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
लॉकडाउन के कारण भारत-नेपाल की सीमा सील है। लेकिन पहले से तय शादी होने के कारण दोनों देशों के लोगों को पगडंडियों से आवागमन करना मजबूरी बन गया है। जहां पैदल यात्रा कर दुल्हन के घर पहुंच विवाह संपन्न करा रहे हैं। विदाई में मिले सामानों को कंधों पर लादकर नेपाल से भारत लाकर खड़े वाहनों पर लादने में पसीने छूट गए।
गोरखपुर जिले के पीपीगंज निवासी राधेश्याम साहनी के पुत्र अरविंद की शादी छह माह पूर्व नेपाल के जिला रूपनदेही के गांव पालिका वार्ड नंबर तीन रगरगंज निवासी अशोक के बेटी से 21 मई को तय हुई थी।
भारत नेपाल सीमा से सटे खनुआ बार्डर पर शुक्रवार की रात आए बरातियों के वाहनों को सीमा सील होने के कारण भारतीय सीमा में रोक दिया गया। जहां बराती पगडंडी से दुल्हन के घर पर नेपाल के रगरगंज पहुंचे।
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शनिवार सुबह विदाई में मिले सामानों को कंधे पर रखकर भारत की सीमा तक पहुंचे।। जिससे बरातियों के पसीने छूट गए। बराती दिनेश, कमलेश, मुकेश यादव, सुनील गौड़ आदि लोगों ने बताया कि ऐसी शादी तो बरसों याद रहेगी, पहले इतनी दिक्कत होने की जानकारी मिलती तो बरात में शामिल नहीं होते।
दूल्हे के पिता राधेश्याम ने बताया कि शादी को सीमा खुलने के बाद तक टालने का मन बना लिया था लेकिन बेटे के जिद के कारण तय तारिख में विवाह करना पड़ा।
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गोरखपुर जिले के पीपीगंज निवासी राधेश्याम साहनी के पुत्र अरविंद की शादी छह माह पूर्व नेपाल के जिला रूपनदेही के गांव पालिका वार्ड नंबर तीन रगरगंज निवासी अशोक के बेटी से 21 मई को तय हुई थी।
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भारत नेपाल सीमा से सटे खनुआ बार्डर पर शुक्रवार की रात आए बरातियों के वाहनों को सीमा सील होने के कारण भारतीय सीमा में रोक दिया गया। जहां बराती पगडंडी से दुल्हन के घर पर नेपाल के रगरगंज पहुंचे।
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शनिवार सुबह विदाई में मिले सामानों को कंधे पर रखकर भारत की सीमा तक पहुंचे।। जिससे बरातियों के पसीने छूट गए। बराती दिनेश, कमलेश, मुकेश यादव, सुनील गौड़ आदि लोगों ने बताया कि ऐसी शादी तो बरसों याद रहेगी, पहले इतनी दिक्कत होने की जानकारी मिलती तो बरात में शामिल नहीं होते।
दूल्हे के पिता राधेश्याम ने बताया कि शादी को सीमा खुलने के बाद तक टालने का मन बना लिया था लेकिन बेटे के जिद के कारण तय तारिख में विवाह करना पड़ा।