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Gorakhpur Zoo: Gorakhpur Zoo: 'मरियम' की मौत के बाद गुमसुम रहता था 'पटौदी', कानपुर में बब्बर शेर ने तोड़ा दम
Thu, 15 May 2025 06:47 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: रोहित सिंह
Updated Thu, 15 May 2025 06:47 PM IST
सार
चिड़ियाघर में शेरनी मरियम की मौत के बाद बब्बर शेर पटौदी काफी गुमसुम रहता था। साथी के जाने के बाद वह ज्यादातर समय बाड़े के कोने में पड़ा रहता था। चिड़ियाघर में फरवरी 2021 में इटावा लायन सफारी से दो बब्बर शेर लाए गए थे।
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बब्बर शेर पटौदी की मौत हो गई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
गोरखपुर से कानपुर चिड़ियाघर में इलाज के लिए भेजे गए बब्बर शेर पटौदी की बृहस्पतिवार को मौत हो गई। पटौदी की मौत से कानपुर चिड़ियाघर में हड़कंप मच गया है। बर्ड फ्लू से बब्बर शेर के मौत की आशंका जताई गई है।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में बब्बर शेर पटौदी करीब एक माह से बीमार था।
उसकी खुराक भी आधी हो गई थी। बब्बर शेर की औसत उम्र 15 से 16 वर्ष होती है। पटौदी करीब 15 वर्ष का हो गया था। चिड़ियाघर प्रशासन उसे बिना हड्डी वाला मीट ही दे रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि उम्र ज्यादा होने की वजह से वह हड्डी नहीं तोड़ पा रहा था।
आमतौर पर बब्बर शेर को गर्मी में 10 से 12 किलो मीट दिया जाता है लेकिन पटौदी अभी केवल चार से पांच किलो ही खा रहा था। चिड़ियाघर में लगातार वन्यजीवों की मौत के बाद पटौदी को बेहतर इलाज के लिए कानपुर भेजा गया था।
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मरियम की मौत के बाद रहता था गुमसुम
चिड़ियाघर में शेरनी मरियम की मौत के बाद बब्बर शेर पटौदी काफी गुमसुम रहता था। साथी के जाने के बाद वह ज्यादातर समय बाड़े के कोने में पड़ा रहता था। चिड़ियाघर में फरवरी 2021 में इटावा लायन सफारी से दो बब्बर शेर लाए गए थे। इसमें शेर पटौदी और शेरनी मरियम शामिल थी।
पटौदी को गुजरात के शक्करबाग से लाया गया था। इसे पहले जंगल से पकड़ा गया था। इटावा सफारी में इसकी जोड़ी मरियम के साथ बनाई गई। वहां पर दोनों में नजदीकियां भी बढ़ गई थीं। गोरखपुर आने के बाद ये दोनों एक-दूसरे को देखते रहते थे।
पटौदी की उम्र करीब 15 वर्ष थी। मरियम (17) इससे बड़ी थी। वह प्रदेश की सबसे उम्रदराज शेरनी थी। उम्र ज्यादा होने पर उसकी तबीयत खराब रहने लगी और दो अप्रैल 2024 को उसकी मौत हो गई थी।
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शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में बब्बर शेर पटौदी करीब एक माह से बीमार था।
उसकी खुराक भी आधी हो गई थी। बब्बर शेर की औसत उम्र 15 से 16 वर्ष होती है। पटौदी करीब 15 वर्ष का हो गया था। चिड़ियाघर प्रशासन उसे बिना हड्डी वाला मीट ही दे रहा था। ऐसा इसलिए क्योंकि उम्र ज्यादा होने की वजह से वह हड्डी नहीं तोड़ पा रहा था।
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आमतौर पर बब्बर शेर को गर्मी में 10 से 12 किलो मीट दिया जाता है लेकिन पटौदी अभी केवल चार से पांच किलो ही खा रहा था। चिड़ियाघर में लगातार वन्यजीवों की मौत के बाद पटौदी को बेहतर इलाज के लिए कानपुर भेजा गया था।
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मरियम की मौत के बाद रहता था गुमसुम
चिड़ियाघर में शेरनी मरियम की मौत के बाद बब्बर शेर पटौदी काफी गुमसुम रहता था। साथी के जाने के बाद वह ज्यादातर समय बाड़े के कोने में पड़ा रहता था। चिड़ियाघर में फरवरी 2021 में इटावा लायन सफारी से दो बब्बर शेर लाए गए थे। इसमें शेर पटौदी और शेरनी मरियम शामिल थी।
पटौदी को गुजरात के शक्करबाग से लाया गया था। इसे पहले जंगल से पकड़ा गया था। इटावा सफारी में इसकी जोड़ी मरियम के साथ बनाई गई। वहां पर दोनों में नजदीकियां भी बढ़ गई थीं। गोरखपुर आने के बाद ये दोनों एक-दूसरे को देखते रहते थे।
पटौदी की उम्र करीब 15 वर्ष थी। मरियम (17) इससे बड़ी थी। वह प्रदेश की सबसे उम्रदराज शेरनी थी। उम्र ज्यादा होने पर उसकी तबीयत खराब रहने लगी और दो अप्रैल 2024 को उसकी मौत हो गई थी।