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Gorakhpur News: लोक रंग, संगीत और कला से सराबोर रहा पुरवाई लोकोत्सव
Mon, 23 Feb 2026 02:36 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 23 Feb 2026 02:36 AM IST
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- कलाकारों ने लोकगीतों, संस्कार गीतों और पारंपरिक धुनों से कार्यक्रम में बांधा समां
- लोक चित्रकला प्रतियोगिता में उभरती प्रतिभाओं का किया गया सम्मान
गोरखपुर। बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में पुरवाई कला एवं राजकीय बौद्ध संग्रहालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय पुरवाई लोकोत्सव का रविवार को समापन हो गया। इसमें लोकगीत, लोकनृत्य, संस्कार गीत, परिधानोत्सव और चित्रकला प्रतियोगिता ने सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी।
कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय लोक गायक राम दरश शर्मा ने पारंपरिक संस्कार गीतों का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, विभिन्न सांस्कृतिक समूहों और विद्यालयी प्रतिभाओं ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। लोक संगीत संध्या में सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा की सुपुत्री वंदना सिन्हा ने पूर्वांचल और मिथिला के लोकगीतों से सभागार को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में लोक चित्रकला प्रतियोगिता में युवाओं ने ग्रामीण जीवन, आंचलिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को सजीव रूप में उकेरा। विजेताओं को सम्मानित कर प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
अतिथियों ने लोक परंपराओं को समाज की आत्मा बताते हुए उनके संरक्षण पर बल दिया। दो दिनों तक चले इस लोकोत्सव ने लोक संस्कृति के संवर्धन का सशक्त संदेश दिया गया।
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- लोक चित्रकला प्रतियोगिता में उभरती प्रतिभाओं का किया गया सम्मान
गोरखपुर। बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में पुरवाई कला एवं राजकीय बौद्ध संग्रहालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय पुरवाई लोकोत्सव का रविवार को समापन हो गया। इसमें लोकगीत, लोकनृत्य, संस्कार गीत, परिधानोत्सव और चित्रकला प्रतियोगिता ने सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दी।
कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय लोक गायक राम दरश शर्मा ने पारंपरिक संस्कार गीतों का प्रशिक्षण दिया। इसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं, विभिन्न सांस्कृतिक समूहों और विद्यालयी प्रतिभाओं ने मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों की वाहवाही लूटी। लोक संगीत संध्या में सुप्रसिद्ध लोक गायिका शारदा सिन्हा की सुपुत्री वंदना सिन्हा ने पूर्वांचल और मिथिला के लोकगीतों से सभागार को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में लोक चित्रकला प्रतियोगिता में युवाओं ने ग्रामीण जीवन, आंचलिक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को सजीव रूप में उकेरा। विजेताओं को सम्मानित कर प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
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अतिथियों ने लोक परंपराओं को समाज की आत्मा बताते हुए उनके संरक्षण पर बल दिया। दो दिनों तक चले इस लोकोत्सव ने लोक संस्कृति के संवर्धन का सशक्त संदेश दिया गया।
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