{"_id":"6abd06aa6f5b79b13a0062eb","slug":"businessman-s-arrest-quashed-high-court-observes-police-acted-as-recovery-agents-in-a-commercial-dispute-2026-09-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी: कारोबारी की गिरफ्तारी निरस्त, हाईकोर्ट ने कहा-व्यावसायिक विवाद में पुलिस ने निभाई रिकवरी एजेंट की भूमिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: कारोबारी की गिरफ्तारी निरस्त, हाईकोर्ट ने कहा-व्यावसायिक विवाद में पुलिस ने निभाई रिकवरी एजेंट की भूमिका
Wed, 30 Sep 2026 06:25 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 30 Sep 2026 06:25 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि व्यावसायिक लेनदेन के विवाद में पुलिस ने शिकायतकर्ता के लिए रिकवरी एजेंट की तरह काम किया। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने गोरखपुर के कारोबारी राघवेंद्र दुबे की गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि व्यावसायिक लेनदेन के विवाद में पुलिस ने शिकायतकर्ता के लिए रिकवरी एजेंट की तरह काम किया। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने गोरखपुर के कारोबारी राघवेंद्र दुबे की गिरफ्तारी को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही आदेश दिया है कि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
विज्ञापन
याची और शिकायतकर्ता के बीच व्यावसायिक संबंध थे। रुपयों के लेनदेन में शिकायतकर्ता ने याची के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने याची को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। याची ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
कोर्ट ने गिरफ्तारी के समय और पुलिस के सरकारी अभिलेखों में गंभीर विसंगतियां पाईं। पुलिस ने कारोबारी की गिरफ्तारी 13 जुलाई 2026 को दोपहर 3:30 बजे राजापुर स्थित यमुना पुल के पास दर्शायी थी, जबकि सीसीटीवी फुटेज के अनुसार उसे उसी दिन सुबह करीब नौ बजे सरधुवा थाने लाया गया था। फुटेज में सुबह 10:19 बजे उसे विवेचक के साथ थाने से बाहर जाते और रात 8:24 बजे वापस आते देखा गया।
विज्ञापन
कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज और जनरल डायरी में दर्ज घटनाक्रम के बीच विरोधाभास को गंभीरता से लिया। थाने के भीतर लगे तीन कैमरों की फुटेज उपलब्ध नहीं थीं। पुलिस ने इसे कंप्यूटर ऑपरेटर की चूक बताई, लेकिन हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के आधार कानून के अनुरूप नहीं बताए गए। इससे कारोबारी के अनुच्छेद-21 के तहत संरक्षित अधिकारों का उल्लंघन हुआ। हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत के लिए राघवेंद्र दुबे को 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही जांच के बाद इसके लिए जिम्मेदार व्यक्ति से मुआवजे की राशि वसूलने को कहा है।
कोर्ट ने थानों में सीसीटीवी सिस्टम 24 घंटे चालू रखने, तकनीकी खराबी होने पर इसकी प्रविष्टि जनरल डायरी में दर्ज करने और वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित सूचना देने का आदेश दिया है। सीसीटीवी बंद रहने की अवधि में थाने लाए गए और वहां से छोड़े गए व्यक्तियों का विवरण भी दर्ज करने का आदेश दिया है।