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गोरखपुर: आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हुंकार, वादा खिलाफी पड़ेगी सरकार पर भारी
Tue, 17 Aug 2021 08:14 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 17 Aug 2021 08:14 PM IST
सार
विभिन्न मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन के बैनर तले धरना दिया सरकारी निर्देशों को दरकिनार कर जुटीं धरना स्थल पर, सरकार के खिलाफ उगली आग
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गोरखपुर में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन के बैनर तले मंगलवार को आयोजित धरने में प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि मौर्य ने कहा कि यदि मांगें नहीं मानी र्गईं तो आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार को खामियाजा भुगतना पड़ेगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को नगर निगम के लक्ष्मीबाई पार्क में अपनी मांगों के समर्थन में धरना दिया और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला।
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आंगनबाड़ी कर्मचारी व सहायिका एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि मौर्य ने दो दिवसीय धरने का एलान किया था। इसे देखते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि सभी सीडीपीओ आंगनबाड़ी को निर्देशित करें कि 17 अगस्त को वे अपने केंद्र पर अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगी।
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अनुपस्थित रहने पर मानदेय सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा प्रशासन की तरफ से सभी केंद्राें की जांच के लिए अधिकारियों को लगाया गया था, पर इसका कोई असर नही हुआ। भारी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नगर निगम पहुंची और सरकार के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की।
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धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गीतांजलि मौर्य ने कहा कि भाजपा ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में कहा था कि सरकार बनने के 120 दिन के अंदर सेवा शर्तों में सुधार किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मान जनक मानदेय दिया जाएगा। सरकार के साढ़े चार साल बीतने को हैं, पर सरकार ने एक भी वादा पूरा नहीं किया।
उन्होंने कहा कि करोना काल में जब लोग घरों से निकलने में डर रहे थे, तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने लोगों के घरों तक जाकर कोविड मरीजों का हाल जाना। जब सरकार से सहयोग की अपेक्षा थी, तब उसने 62 की उम्र पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर बैठा दिया। न तो उन्हें पेंशन दी गई और न ही ग्रेच्युटी दी गई।
सरकार के इस वादा खिलाफी से प्रदेश की पौने चार लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी तो आगामी विधानसभा चुनाव में कीमत चुकानी पड़ेगी।
ये हैं प्रमुख मांगें
उन्होंने कहा कि करोना काल में जब लोग घरों से निकलने में डर रहे थे, तब आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने लोगों के घरों तक जाकर कोविड मरीजों का हाल जाना। जब सरकार से सहयोग की अपेक्षा थी, तब उसने 62 की उम्र पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर बैठा दिया। न तो उन्हें पेंशन दी गई और न ही ग्रेच्युटी दी गई।
सरकार के इस वादा खिलाफी से प्रदेश की पौने चार लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी तो आगामी विधानसभा चुनाव में कीमत चुकानी पड़ेगी।
ये हैं प्रमुख मांगें
- आंगनबाड़ी, मिनी आंगनबाड़ी व सहायिकाओं की सेवा नियमावली बनाई जाए।
- जब तक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं, तब तक उनका मानदेय 18000 तथा सहायिका का 9000 किया जाए।
- 10 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को योग्यता के आधार पर मुख्य सेविका बनाया जाए।
- 62 साल की आयु पूरी कर चुकी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बिना पेंशन ग्रेच्युटी के रिटायर कर दिया गया। अन्य राज्यों की भांति सुविधा दी जाए।
- मिनी आंगनबाड़ी को सामान्य आंगनबाड़ी के बराबर मानदेय दिया जाए।
- आंगनबाड़ी के रिक्त पदों पर सहायिकाओं की नियुक्ति की जाए।
- खाद्यान्न वितरण में आंगनबाड़ी को उलझाने की जगह बिहार राज्य की तरह कार्यकर्ता एवं मातृ शक्ति के खाते में पोषाहार की धनराशि भेजी जाए।