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Gorakhpur News: गुस्से में 11 माह का बच्चा सड़क पर छोड़ा, 96 घंटे बाद लिपटकर खूब रोई मां

Thu, 15 Aug 2024 04:20 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 15 Aug 2024 04:20 AM IST
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An angry 11 month old child was left on the road, after 96 hours the mother hugged her and cried a lot
- जटेपुर के रहने वाले पति-पत्नी ने लड़ाई कर रेलवे स्टेशन के सामने छोड़ दिया था बच्चा
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- दो घंटे तक सड़क पर रोता विलखता पड़ा रहा बच्चा, पुलिस ने एशियन संस्था को सौंपा
- चार दिन बाद बच्चे को खोजने निकले मां-बाप, संस्था ने जांच के बाद बच्चे को दिया
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पति से शराब पीने के कारण झगड़ा हुआ तो 11 माह के बच्चे को रेलवे स्टेशन के सामने सड़क पर छोड़कर चली गई। पति भी नशे में भूल गया और बच्चा छोड़कर चला गया। बच्चा सड़क पर रोता रहा। बाद में पुलिस ने उसे चाइल्ड लाइन की मदद से एक संस्था को सौंप दिया। गुस्सा शांत हुआ तो दंपती बच्चा खोजने लगे। डर की वजह से पुलिस के पास नहीं गए। चार दिन बाद पुलिस के पास गए तो पुलिस ने बच्चे से मिलवाया। मां को पाकर बच्चा खिलखिला उठा तो मां की आंखों से खुशी व अफसोस के आंसू बहते रहे।
जानकारी के अनुसार, जटेपुर उत्तरी निवासी विशाल गुप्ता रेलवे स्टेशन पर चाट की दुकान लगाते हैं। उनका पत्नी पूजा से शराब पीने को लेकर आए दिन झगड़ा होता है। 10 अगस्त को रेलवे स्टेशन के पास शाम चार बजे दोनों में झगड़ा हो गया। नाराज होकर पूजा ने बेटे विवान (11) को सड़क के किनारे छोड़कर चली गई। विशाल भी शराब पीने की वजह से होश में नहीं था। वह भी बच्चे को भूल गया।
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बताते हैं कि दो घंटे तक बच्चा सड़क पर रोता रहा। लोगों की नजर उस पड़ी, लेकिन किसी ने उसे चुप कराने का प्रयास नहीं किया। रोते-बिलखते बच्चे पर पुलिस की नजर पड़ी। पुलिस ने इधर-उधर पूछताछ की, लेकिन बच्चे को कोई जानने वाला नहीं मिला। इसके बाद चाइल्ड लाइन को बुलाकर बच्चे को सौंप दिया। चाइल्ड लाइन ने बच्चे को एशियन सहयोगी संस्था इंडिया में रखवाया।
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संस्था में बच्चा पहले दिन रात भर रोता रहा। महिला कर्मचारियों ने उसे दूध पिलाने का प्रयास किया, लेकिन बच्चा चुप होने का नाम नहीं ले रहा था। किसी तरह बच्चे को चुप कराया गया। इधर, गुस्सा शांत होने पर पति-पत्नी ने बच्चे को खोजना शुरू किया। बच्चा कहीं नहीं मिल रहा था। बुधवार को उन्होंने पुलिस से संपर्क किया तब बच्चे का पता चला और मां-बाप जेल रोड स्थित संस्था के कार्यालय पहुंचे।संस्था के कार्यकर्ताओं ने चार घंटे तक मां-बाप के कागजात की जांच की। जब दोनों के मां-बाप होने की पुष्टि हो गई, तब उन्हें बच्चा सौंपा। इस दौरान संस्था की उषा दास ने परिजनों को चेतावनी दी कि हर सप्ताह बच्चे की रिपोर्ट उन्हें देनी होगी, नहीं दी तो उनके घर टीम पहुंचेगी। बच्चे को पाकर मां उससे लिपटकर खूब रोई। वहीं बच्चा मम्मी-पापा को पाकर खुश हो गया।
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