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अमर उजाला अभियान शिक्षा: साल बर्बाद होने से बचाया पर बच्चों का पढ़ाई से रूठा मन
Sat, 26 Mar 2022 10:38 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 26 Mar 2022 10:38 AM IST
सार
ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों की अधिकतर उपस्थिति 50-70 फीसदी के बीच रही। ग्रामीण अंचल में तो ये आंकड़ा 25 फीसदी तक भी नहीं पहुंच सका। इसकी मूलवजह खराब नेटवर्क या मोबाइल और लैपटॉप का न होना रहा है। जहां, उपकरण और नेटवर्क की व्यवस्था सुलभ थी
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अमर उजाला शिक्षा अभियान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोरोना महामारी का सीधा असर बच्चों के सीखने की क्षमता पर पड़ा है। खासकर, कक्षा 1 से 5 तक के बच्चे इससे अधिक प्रभावित हुए हैं।
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ऑनलाइन कक्षा, ऑनलाइन परीक्षा और प्रमोट करके बच्चों का साल बर्बाद होने से तो बचा लिया गया, मगर पढ़ाई के प्रति उनकी तल्लीनता में काफी गिरावट दर्ज हुई है। अब स्कूल प्रबंधन बच्चों को पढ़ाई के प्रति ललक पैदा करने में मनोरंजन और खेल का भी सहारा ले रहे हैं।
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ऑनलाइन कक्षाओं में बच्चों की अधिकतर उपस्थिति 50-70 फीसदी के बीच रही। ग्रामीण अंचल में तो ये आंकड़ा 25 फीसदी तक भी नहीं पहुंच सका। इसकी मूलवजह खराब नेटवर्क या मोबाइल और लैपटॉप का न होना रहा है। जहां, उपकरण और नेटवर्क की व्यवस्था सुलभ थी। वहां, लंबे समय तक घर पर रहने के साइड इफेक्ट बच्चों में अब भी नजर आ रहे हैं। प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधन का मानना है कि कोरोना के कारण स्कूल बंद होने से विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति प्रभावित हुई है।
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अब जब हालात सामान्य हुए हैं और ऑफलाइन मोड में कक्षाएं प्रारंभ हुईं तो दोबारा से स्कूल गुलजार हुए हैं। बच्चों की उपस्थिति का आंकड़ा भी 95 फीसदी तक पहुंच गया है। बच्चों के साथ अभिभावक भी ऑफलाइन मोड में कक्षाओं के संचालन को लेकर उत्साहित हैं। ज्यादा से ज्यादा फोकस रिवीजन और ऑफलाइन मोड में होने वाली परीक्षाओं पर टिका है।
कोरोना का डर भगाने के लिए कराईं कई गतिविधियां
कोरोना काल के बाद स्कूलों में पुरानी व्यवस्था को लागू करना चुनौतीपूर्ण रहा है। बच्चों के मन से कोरोना का डर भगाने के लिए कई तरह की गतिविधियों कराई गईं, जिससे कि बच्चों के मन से कोरोना का डर खत्म हो जाए। छात्रों का पूरा फोकस पढ़ाई पर है। उपस्थिति के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं।-अंबरीश चंद्रा, एग्जीक्यूटिव प्रिंसिपल सेंट पॉल्स स्कूल
छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास आनंद का पर्याय
कोरोना संक्रमण काल में बड़े बच्चे पढ़ाई की अहमियत को समझ रहे थे। खासकर, बोर्ड परीक्षा वालों को ये पता था कि बोर्ड परीक्षाएं होंगी ही। वह ऑनलाइन क्लास से पल्ला नहीं झाड़ सकते हैं। मगर छोटे बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास आनंद का पर्याय थी। टीचर मोबाइल पर दिखती हैं। ऑफलाइन कक्षाओं का संचालन प्रारंभ हो गया है। अब बच्चे कक्षा में पढ़ाई का आनंद ले रहे हैं।-अपनीत गुप्ता, प्रधानाचार्य स्टेपिंग स्टोन चिल्ड्रन एकेडमी
दो शैक्षणिक सत्र के बाद भी पूरी हो सकेगी कमी
कोविड महामारी की वजह से बच्चों के सीखने की क्षमता में कमी आई है। इस कमी को पूरा करने पर फोकस है। स्कूल के अंदर कई अन्य गतिविधियां शुरू की गई हैं। ताकि, बच्चे पढ़ाई को बोझ न समझें, हंसते-खेलते पढ़ें। पढ़ाई को पटरी पर लाने में कम से कम दो शैक्षणिक सत्र लग जाएंगे।
-सलिल के श्रीवास्तव, डायरेक्टर जेपी एजुकेशन एकेडमी