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Gorakhpur: नगर निगम की दुकानों से शिकमी किराएदारी लेते हैं आवंटी, वसूल रहे 25 से 30 हजार रुपये
Mon, 11 Dec 2023 02:07 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 11 Dec 2023 02:07 PM IST
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गोरखपुर नगर निगम।
- फोटो : amar ujala
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नगर निगम की दुकानें कई आवंटियों के लिए आमदनी का बेहतर जरिया बन गई हैं। अवैध ढंग से इन आवंटियों ने खुद दुकानें न चलाकर दूसरों को दुकान किराए पर उठा देते है। आवंटी इन सिकमी किराएदारों से 25 से 30 हजार रुपये महीने का किराया भी लेते हैं। इसके अलावा दुकान की धरोहार राशि के तौर पर सिकमी किराएदारों से 15 से 20 लाख रुपये भी लेते हैं।
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इस तरह की जानकारी सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने ऐेसे आवंटियों की तलाश शुरू कर दी है। ऐसे आवंटियों को नोटिस देने के साथ नगर निगम प्रशासन उनके आवंटन रद्द करने की तैयारी में जुट गया है। जानकारी के मुताबिक, शहर के प्रमुख बाजारों में निगम की हजारों दुकानें हैं। मगर पिछले कई वर्षों से इन दुकानों को मूल आवंटियों ने किराए पर उठा रखी हैं। यानि इन दुकानों को सिकमी किराएदार संचालित कर रहे हैं। इससे निगम के राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है।
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अब अपने राजस्व को बढ़ाने और ऐसे आवंटियों पर कार्रवाई के लिए नगर निगम ने सर्वे शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के आधार पर ऐसे आवंटनों को निरस्त करते हुए दुकान को सिकमी किराएदार से खाली कराया जाएगा और इन दुकानों का नए सिरे से आवंटन होगा। हालांकि, नगर निगम सूत्रों ने बताया कि अक्सर यह प्रक्रिया शुरू की जाती है, लेकिन बंद कर दी जाती।
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यदि किसी ने आवंटी के खिलाफ दुकान किराए पर देने की शिकायत की तो आवंटी खुद को ही दुकान का मालिक बताते हुए नगर निगम पहुंच जाते हैं। खुद की दुकान बताकर थोड़ा सुधार कार्य करवाने के लिए बंद किए रहने की बात बोलते हैं। जबकि, बिना नगर निगम की अनुमति कोई भी सुधार कार्य नहीं कराया जा सकता है।
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क्या होता है सिकमी किराएदार
आय के स्रोत विकसित करने के मकसद से नगर निगम शहर के विभिन्न इलाकों में अपनी दुकानें बनवाता है। इसके बाद इन दुकानों को आवंटित करता है। इनसे निगम ही किराया वसूलता है। मगर यही आवंटी खुद दुकान न चलाकर दूसरों को किराए पर दे देते हैं। इनसे मूल आवंटी दुकानों का मनचाहा किराया वसूल करता है। ऐसे लोगों को सिकमी किराएदार कहते हैं।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि नगर निगम अपनी दुकानों से अर्जित धन से भी कोष बढ़ाएगा। नगर निगम अपनी दुकानों की निगरानी और जांच भी कराएगा। मूल आवंटियों से इतर कोई अन्य दुकानों को संचालित करते हुए मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्यकारिणी की बैठक में भी सदस्यों ने इन दुकानों को लेकर अपनी बातें रखी थीं।
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क्या होता है सिकमी किराएदार
आय के स्रोत विकसित करने के मकसद से नगर निगम शहर के विभिन्न इलाकों में अपनी दुकानें बनवाता है। इसके बाद इन दुकानों को आवंटित करता है। इनसे निगम ही किराया वसूलता है। मगर यही आवंटी खुद दुकान न चलाकर दूसरों को किराए पर दे देते हैं। इनसे मूल आवंटी दुकानों का मनचाहा किराया वसूल करता है। ऐसे लोगों को सिकमी किराएदार कहते हैं।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने कहा कि नगर निगम अपनी दुकानों से अर्जित धन से भी कोष बढ़ाएगा। नगर निगम अपनी दुकानों की निगरानी और जांच भी कराएगा। मूल आवंटियों से इतर कोई अन्य दुकानों को संचालित करते हुए मिलता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कार्यकारिणी की बैठक में भी सदस्यों ने इन दुकानों को लेकर अपनी बातें रखी थीं।