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Akshay Navami 2023: अक्षय नवमी आज, आंवले के वृक्ष की होगी पूजा
Tue, 21 Nov 2023 12:17 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 21 Nov 2023 12:17 PM IST
सार
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन नवमी तिथि का मान संपर्ण दिन और रात्रि 12 बजकर 53 मिनट तक है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात्रि आठ बजकर 34 मिनट तक है।
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आंवला नवमी 2023
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अक्षय नवमी मंगलवार को मनाई जाएगी। गोरखनाथ मंदिर, गीता वाटिका, सूर्यकुंड, मानसरोवर सहित तमाम जगहों पर आंवले के वृक्ष का पूजन किया जाएगा।
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ऐसी मान्यता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा और इसके नीचे भोजन बनाने व ग्रहण करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। स्नान, पूजन, तर्पण और अन्नादि के दान से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान लक्ष्मी नारायण के पूजन का भी विधान है।
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वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन नवमी तिथि का मान संपर्ण दिन और रात्रि 12 बजकर 53 मिनट तक है। इस दिन शतभिषा नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात्रि आठ बजकर 34 मिनट तक है।
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अक्षय नवमी का महत्व
ज्योतिचार्य मनीष मोहन के अनुसार, हिंदू धर्म के सबसे बड़े अनुष्ठानों में एक अक्षय नवमी को भी माना गया है। इस दिन किए दान या किसी धर्मार्थ कार्य का लाभ व्यक्ति को वर्तमान और अगले जन्म में भी प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अक्षय नवमी के दिन सतयुग प्रारंभ हुआ।
ऐसे करें पूजन
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार, इस दिन सुबह उठकर स्नानादि के बाद दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प आदि लेकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद धात्री वृक्ष (आंवले) के नीचे पूर्व दिशा की ओर मुखकर बैठें। ‘ऊॅ धात्र्यै नम:’ मंत्र का जप करते हुए षोडशोपचार पूजन कर आंवले के वृक्ष की जड़ में दूध से जलाभिषेक करते हुए पितरों का तर्पण करें। सायंकाल आंवले के वृक्ष नीचे घी का दीपक प्रज्वलित करें और वृक्ष की सात परिक्रमा करें। जब परिक्रमा पूर्ण हो जाए तो प्रसाद वितरण करें और वृक्ष के नीचे ही भोजन भी करें।
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कार्तिक पूर्णिमा 27 को, श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी
कार्तिक पूर्णिमा 27 नवंबर को मनाई जाएगी। श्रद्धालु इस दिन पवित्र नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाएंगे। इसी दिन देव दिवाली भी मनाई जाएगी। ऐसी मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान से मनोवांछित फल मिलता है।
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वाराणसी के प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन पूर्णिमा तिथि का मान दिन में दो बजकर 17 मिनट तक है। कृतिका नक्षत्र भी दिन में एक बजकर 52 मिनट, पश्चात रोहिणी नश्रत्र, शिव योग और सुस्थिर नामक औदायिक योग है। वहीं 26 नवंबर की शाम से ही पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो रहा है और चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि होने से व्रत के लिए 26 नवंबर ही रहेगा, लेकिन स्नान-दान, तर्पण, जप, तप आदि 27 नवंबर ही मान्य रहेगा।
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा को प्रात: काल स्नान कर विधि पूर्वक शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए। संभव हो तो सत्यनारायण व्रत कथा का भी आयोजन करे। सायंकाल मंदिरों, चौराहों, गलियों, पीपल के वृक्षों और तुलसी के पौधों के पास दीपक जलाएं।
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वाराणसी के प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन पूर्णिमा तिथि का मान दिन में दो बजकर 17 मिनट तक है। कृतिका नक्षत्र भी दिन में एक बजकर 52 मिनट, पश्चात रोहिणी नश्रत्र, शिव योग और सुस्थिर नामक औदायिक योग है। वहीं 26 नवंबर की शाम से ही पूर्णिमा तिथि का आरंभ हो रहा है और चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि होने से व्रत के लिए 26 नवंबर ही रहेगा, लेकिन स्नान-दान, तर्पण, जप, तप आदि 27 नवंबर ही मान्य रहेगा।
पंडित जोखन पांडेय शास्त्री के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा को प्रात: काल स्नान कर विधि पूर्वक शालिग्राम की पूजा करनी चाहिए। संभव हो तो सत्यनारायण व्रत कथा का भी आयोजन करे। सायंकाल मंदिरों, चौराहों, गलियों, पीपल के वृक्षों और तुलसी के पौधों के पास दीपक जलाएं।