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गोरखपुर विश्वविद्यालय की इन दो छात्राओं ने बढ़ाया जिले का मान, अब इन्हें मिलेगा इंस्पायर फेलोशिप

Tue, 24 Nov 2020 01:35 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 24 Nov 2020 01:35 PM IST
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Akanksha and Anjali of Gorakhpur University will get Inspire Fellowship
फैलोशिप में चयनित बाएं अंजली पांडेय और दाएं आकांक्षा सिंह। - फोटो : अमर उजाला।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से जारी की गई डीएसटी इंस्पायर फेलोशिप की सूची में गोरखपुर विश्वविद्यालय की दो छात्राओं के नाम शामिल हैं। चयनित छात्राओं में वनस्पति विज्ञान विभाग की छात्रा आकांक्षा सिंह और गणित विभाग की अंजलि पांडेय हैं।

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विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में विज्ञप्ति जारी की गई। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में सिर्फ गोरखपुर विश्वविद्यालय ही ऐसा है जिसकी छात्राओं को फेलोशिप की सूची में शामिल किया गया है। कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने दोनों छात्राओं को बधाई देते हुए उनके यशस्वी भविष्य की कामना की है।
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बैंगन की बीमारियों पर शोध कर रही हैं आकांक्षा
इंस्पायर फेलोशिप की सूची में शामिल आकांक्षा सिंह ने बैंगन की बीमारियों पर शोध किया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रमुखता से उगाई जाने वाली प्रमुख सब्जियों में से बैंगन भी है। इसके उपज को फाइटोप्लाजमा नामक सूक्ष्मजीव से होने वाली लिटिल लीफ बीमारी काफी नुकसान पहुंचाती है।

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अंजलि तारों के आंतरिक भौतिक परिवर्तन पर कर रहीं शोध

वर्तमान समय में इस बीमारी के निराकरण के उचित साधन उपलब्ध नहीं है। इससे किसानों को भारी नुकसान होता है। आकांक्षा शोध में यह पता लगा रही हैं कि सूक्ष्म जीव फाइटोप्लाजमा की कौन सी प्रजाति बैंगन को सर्वाधिक नुकसान पहुंचाती है। संक्रमण के बाद पौधों की फिजियोलॉजी , बायोकेमिकल स्थितियों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कौन से खरपतवार कीट संग्रहण करते हैं और बीमारी को फैलने में मदद करते हैं।

गणित विभाग की अंजलि पांडेय का शोध विषय ‘आस्पेक्ट ऑफ ग्रेविटेशनल कॉलेएप्स एंड द स्पेस टाइम सिंगुलेरिटी’ है। इस शोध का प्रयास गुरुत्व निपात से संबंधित पहलुओं का अध्ययन करना और उनसे जुड़ी अनसुलझी समस्याओं का समाधान ढूंढना है।

ग्रेविटेशनल कोलेएप्स स्वयं में अंतरिक्ष की संरचना का जिम्मेदार माने-जाने वाला मूलभूत तंत्र है। अंतरिक्ष में मौजूद तारे और उनमें समय के साथ होने वाले परिवर्तन आज भी विज्ञान जगत के लिए अबूझ पहेली हैं। इस शोध के माध्यम से किसी तारे के आंतरिक भौतिक परिवर्तन का गणितीय अध्ययन किया जाएगा।

 

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