फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Again for seniority, professor said- Executive Council should reconsider the decision

Gorakhpur News: वरिष्ठता के लिए फिर से रार, प्रोफेसर ने कहा- कार्यपरिषद फैसले पर करे पुनर्विचार

Mon, 22 Jul 2024 04:47 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jul 2024 04:47 AM IST
विज्ञापन
Again for seniority, professor said- Executive Council should reconsider the decision
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग में वरिष्ठता का मामला
विज्ञापन

प्रो. आरपी सिंह ने फैसले पर पुनर्विचार के लिए कार्यपरिषद को लिखा पत्र

संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक बार फिर वरिष्ठता को लेकर रार मच गई है। मामला वाणिज्य विभाग से जुड़ा है, जिसपर हाल ही में कार्य परिषद ने फैसला कर लिया था। अब प्रोफेसर ने पत्र लिखकर कार्य परिषद को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
दरअसल, वाणिज्य विभाग में वरिष्ठता को लेकर रार काफी पहले से चलती आ रही है। 2020 में डीन की कमेटी ने सुनवाई करते हुए प्रो. श्रीवर्धन पाठक को वरिष्ठ घोषित किया था। इसको लेकर प्रो. आरपी सिंह ने राजभवन को पत्र लिखा था। पिछले वर्ष विश्वविद्यालय प्रशासन ने वरिष्ठता के चक्रानुक्रम में वाणिज्य संकायाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष के रूप में प्रो. श्रीवर्धन पाठक को नियुक्त किया था।
विज्ञापन

इसे प्रो. रवि प्रताप सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दे दी। हाईकोर्ट ने 18 अक्तूबर 2023 को जारी अपने आदेश में कहा कि इस मामले का निस्तारण विश्वविद्यालय की कार्य परिषद करे। कार्य परिषद की 13 जुलाई को हुई बैठक में प्रो. श्रीवर्धन को वरिष्ठ माना गया था। इसी फैसले से प्रो. आरपी सिंह असंतुष्ट थे। उन्होंने कार्य परिषद के आदेश के बाद सभी सदस्यों को ईमेल और व्हाट्सएप के साथ ही स्पीड पोस्ट भी भेजा। पत्र में कहा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया जाना सम्यक व प्राकृतिक न्यायहित में आवश्यक है। कार्य परिषद ने उनका पक्ष सुने बगैर फैसला दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार हो फैसला
प्रो. आरपी सिंह ने अपने पत्र में अपने पत्र के साथ विश्वविद्यालय, यूजीसी, उच्च शिक्षा निदेशालय और राजभवन के अलग-अलग समय पर जारी आदेश और पत्रों को भी संलग्न किया है। इसमें उन्होंने पिछले दो दशक में जारी कई पत्रों को संज्ञान लेने का आग्रह किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि वह ओपन कैडर से उपाचार्य हुए थे। जबकि प्रो. पाठक कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम से। ऐसे में उनको वरिष्ठ माना जाना चाहिए।
दूसरे संकायों में भी चल रही रार
वाणिज्य संकाय के अलावा भी विश्वविद्यालय के कई विभागों में वरिष्ठता को लेकर रार चल रही है। विज्ञान संकाय के एक विभाग में वरिष्ठता निर्धारण के कारण करीब ढाई वर्ष पहले एक विभागाध्यक्ष को पद गंवाना पड़ा था। बाद में नए सिरे से निर्धारण में विश्वविद्यालय ने उन्हें वरिष्ठ माना था। नए सिरे से वरिष्ठता निर्धारण में कला संकाय के एक विभाग में विभागाध्यक्ष को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी थी। संबंधित प्रोफेसर ने विधि विरुद्ध ढंग से दूसरे प्रोफेसर को विभागाध्यक्ष बनाए जाने का आरोप लगाते हुए राजभवन को पत्र लिखा था। उस मामले के निस्तारण के लिए जून में ही राजभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र लिखा था।



हाईकोर्ट के आदेश के बाद कार्य परिषद ने वरिष्ठता पर निर्णय लिया था। इस मामले को पहले की कमेटी ने सुना था। कार्य परिषद के फैसले पर पुनर्विचार करना संभव नहीं है।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed