आरटीई: तीन महीने बाद परीक्षा, कॉपी व किताब का पता नहीं
आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों और अभिभावकों के बैंक एकाउंट की डिटेल शासन को प्रेषित की गई थी, मगर कमियां मिलने पर उसे बेसिक शिक्षा विभाग को लौटाया गया है। 25 जनवरी तक संशोधित ब्यौरा शासन को प्रेषित किया जाना है। विभाग की ओर से सूची का सत्यापन कार्य चल रहा है।
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गोरखपुर जिले के प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की पढ़ाई के लिए शासन स्तर पर अभिभावकों के खाते में प्रेषित होने वाली पांच हजार रुपये की धनराशि अब तक नहीं भेजी जा सकी। इससे जिले के 3200 बच्चों को पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। तीन महीने के बाद वार्षिक परीक्षाएं हैं ऐसे में उनकी पढ़ाई अधर में है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों का जिले के प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क प्रवेश दिलाया जाता है। शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में स्कूल फीस स्कूलों को वापस लौटाई जाती है, जो कि इस वर्ष नहीं की जा सकी है। साथ ही कॉपी व किताब के मद में पांच-पांच हजार रुपये अभिभावकों के खाते में भेजे जाते हैं। आरटीई के तहत सत्र 2021-22 में तीन चरणों में जिले में 3200 से अधिक बच्चों का प्रवेश हुआ है। मगर कॉपी व किताब न होने की वजह से बच्चों को पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
शासन को भेजी गई सूची में चल रहा संशोधन कार्य
आरटीई के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों और अभिभावकों के बैंक एकाउंट की डिटेल शासन को प्रेषित की गई थी, मगर कमियां मिलने पर उसे बेसिक शिक्षा विभाग को लौटाया गया है। 25 जनवरी तक संशोधित ब्यौरा शासन को प्रेषित किया जाना है। विभाग की ओर से सूची का सत्यापन कार्य चल रहा है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आरके सिंह ने कहा कि आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों की शुल्क प्रतिपूर्ति और कॉपी व किताब के लिए बजट जारी करने के लिए शासन को पत्र प्रेषित किया गया है। बजट मिलते ही धनराशि अभिभावकों के खाते में प्रेषित की जाएगी।