गोरखपुर: युवक की मौत के बाद अस्पताल ने शव देने से किया इनकार, हंगामा
कैंट इंस्पेक्टर शशिभूषण राय ने बताया कि युवक की मौत हुई है। मामले में परिजनों को शांत कराते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया गया है। मृतक के साले ने तहरीर दी है। तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है। जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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गोरखपुर जिले के कैंट इलाके के सिंघड़िया स्थित यूनाइटेड अस्पताल में भर्ती युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई। आरोप है कि अस्पताल संचालक ने और रुपये की मांग करते हुए शव परिजनों को देने से इन्कार कर दिया। इस पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई का भरोसा दिलाया। तब जाकर परिजन माने। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मामले में युवक के साले ने अस्पताल संचालक के खिलाफ तहरीर देकर कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक, बिहार के बेतिया जिले के गाभनहर थानाक्षेत्र के मुरली मंझरिया गांव निवासी बाल कुमार (35) कुमार मजदूरी करते थे। आठ सितंबर को वह एक हादसे में घायल हो गए थे। परिजनों ने एक एंबुलेंस चालक की मदद से बाल कुमार को इलाज के लिए सिंघड़िया स्थित यूनाइटेड हॉस्पिटल में भर्ती कराया। पांच दिन पहले बाल कुमार का न्यूरो का ऑपरेशन हुआ था।
बाल कुमार के साले नरेश ने बताया कि ऑपरेशन डॉ आशुतोष राय ने किया था। शुक्रवार को तबीयत बिगड़ी और बाल कुमार की मौत हो गई। मौत के बाद अस्पताल के कर्मचारी रुपये मांगने लगे। न देने पर शव को देने से इन्कार कर दिया। नरेश ने बताया कि ऑपरेशन का कुल खर्च डेढ़ लाख रुपये बताया गया था, जबकि तीन लाख रुपये जमा कराए जा चुके हैं। और रुपये की मांग की जा रही थी। न देने पर शव नहीं दे रहे थे। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद किसी तरह शव मिला है।
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डॉक्टर को पता नहीं, कौन है निदेशक
अस्पताल प्रबंधन ने रजिस्ट्रेशन से लेकर पैम्फलेट छपवाने में भी जबरदस्त गोलमाल किया है। अस्पताल के नाम पर जो पैम्फलेट छपवाया है, उस पर तीन नंबर दर्ज किए गए हैं। एक नंबर स्विच ऑफ जा रहा है। जबकि, दूसरा नंबर प्रिंस गुप्ता के नाम पर है। संपर्क करने पर प्रिंस ने मौत की बात स्वीकार की, लेकिन बोला वह निदेशक नहीं है। निदेशक कोई डॉ. एपी जायसवाल हैं।
डॉ. एपी जायसवाल के नंबर पर संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वह अस्पताल के निदेशक नहीं है। ऑनकाल अस्पताल में इलाज के लिए जाते हैं। निदेशक कोई बिहार का रहने वाला है। लेकिन, उसका नाम नहीं पता है। उन्होंने कहा कि वे मरीज का उपचार नहीं कर रहे थे। उसे न्यूरो के डॉक्टर देख रहे थे। वहीं, तीसरे नंबर पर संपर्क करने पर बैजनाथ साहनी ने फोन उठाया और उसने खुद को मैनेजर बताया।
कहा कि मरीज की हालत चार दिन पहले स्थिर हो गई थी। उस समय से ही डॉक्टर परिजनों को लगातार मरीज को केजीएमयू ले जाने की सलाह दे रहे थे। शुक्रवार को मरीज को हायर सेंटर रेफर किया गया। परिजन पांच घंटे तक एंबुलेंस में मरीज को घुमाते रहे। इस दौरान वह कई अस्पताल गए। पांच घंटे बाद आकर मौत का आरोप लगाने लगे।
आईएमए की सूची में डॉक्टर और अस्पताल, दोनों का नाम नहीं
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की सूची में न तो अस्पताल का नाम दर्ज है और न ही डॉ एपी जायसवाल के नाम से कोई डॉक्टर। इतना ही नहीं ऑनकाल जाने वाले डॉक्टर को यह भी नहीं पता है कि अस्पताल का मालिक कौन है।
मामले की होगी जांच
कैंट इंस्पेक्टर शशिभूषण राय ने बताया कि युवक की मौत हुई है। मामले में परिजनों को शांत कराते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजवाया गया है। मृतक के साले ने तहरीर दी है। तहरीर के आधार पर जांच की जा रही है। जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।