बाहर से आए श्रमिकों को नहीं छोड़ना पड़ेगा घर, इस खास एप के जरिए मिलेगा रोजगार
- प्लंबर से लेकर निर्माण श्रमिक तक, एक क्लिक पर डाटा आपके सामने
- जिले के प्रवासी कामगारों का लोकल अर्बन एप तैयार करेगा प्रशासन
- दो लाख कामगारों की दिल्ली, मुंबई समेत दूसरे प्रांतों से हुई है घर वापसी
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मुख्यमंत्री युवा उद्यमिता विकास अभियान के तहत दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, गुजरात समेत दूसरे प्रांतों से लौटे प्रवासी कामगारों को रोजगार मुहैया कराने की कवायद तेज कर दी गई है। इस दिशा में कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। पहले सभी प्रवासी कामगारों का स्किल और अनस्किल के आधार पर डाटा बेस तैयार किया जा रहा है। इसके बाद इन्हें विभिन्न कंपनियों, सरकारी योजनाओं आदि में रोजगार मुहैया कराया जाएगा।
जिला प्रशासन ने इस दिशा में एक कदम आगे की भी योजना बनाई है। इन प्रवासी कामगारों को हमेशा रोजगार मिलता रहे, इसलिए प्रशासन जिले के मजदूरों के लिए पहले एक लोकल अर्बन एप तैयार करेगा। इस एप में शहर आकर काम करने वाले सभी तरह के मजदूरों का नाम, पता और मोबाइल नंबर समेत पूरा ब्यौरा दर्ज होगा।
इसे एनआईसी पर गोरखपुर जिला प्रशासन की ऑफीसियल वेबसाइट से भी लिंक किया जाएगा। शहर में अगर किसी को प्लंबर से लेकर कारपेंटर और निर्माण श्रमिक जैसे किसी भी तरह के कामगारों की जरूरत होगी तो वह इस एप के जरिए मजदूरों की पूरी सूची हासिल कर सकेगा।
इससे घर-दुकान बनवाने वाले आम आदमी से लेकर सरकारी योजनाओं का निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्थाओं को भी जरूरत के मुताबिक श्रमिक मिल जाएंगे और श्रमिकों को रोजगार भी। इस एप के सफल होने के बाद जिले स्तर के सभी मजदूरों का एक एप तैयार किया जाएगा।
50 हजार मजदूरों की सूची तैयार हो चुकी
प्रवासी मजदूरों में स्किल एवं अनस्किल मजदूरों की अलग-अलग सूची तैयार कर फीडिंग का काम चल रहा है। अब तक 50 हजार मजदूरों का नाम फीड हो चुका है। इनमें करीब 18672 अनस्किल और 37000 स्किल मजदूर हैं। मजदूरों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम भी तैयार किए जा रहे हैं। डीएम के. विजयेंद्र पांडियन का कहना है कि जिले में दो से तीन लाख प्रवासी मजदूर दूसरे प्रांतों से लौटे हैं।
डीएम के. विजयेंद्र पांडियन ने बताया कि दूसरे प्रांतों से लौटे प्रवासी कामगारों का डाटा बेस तैयार कर उन्हें रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एक लोकल अर्बन एप भी तैयार किया जा रहा है, जिसमें शहर आकर काम करने वाले तमाम ट्रेड के श्रमिकों का नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज रहेगा।
किसी को भी जरूरत पड़ने पर इस एप के माध्यम से प्लंबर, कारपेंटर, टॉयल्स लगाने वाले, दिहाड़ी मजदूरों को काम पर बुला सकेगा। सरकारी परियोजनाओं के निर्माण में भी एप से मदद मिलेगा। वहीं प्रवासी कामगारों, श्रमिकों को रोजगार मिलने में आसानी होगी।