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ओलंपिक की गोल्ड मेडलिस्ट की कहानी: है ना अचरज की बात, जो सुन और बोल नहीं सकती आज दुनिया कर ली मुट्ठी में

Thu, 29 Jun 2023 12:08 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 29 Jun 2023 12:08 PM IST
सार

बैडमिंटन जगत की सुर्खियां बन चुकीं आदित्या की चमक देशभर में फैल चुकी है। आदित्या को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी सम्मान दिया है।

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indian badminton sensation Aditya Yadav story
आदित्या यादव ढाई साल की थी, जब पता चला कि वह न तो सुन सकती हैं और न ही बोल सकती हैं। आज वह बैडम

विस्तार

आदित्या यादव ढाई साल की थीं, जब पता चला कि वह न तो सुन सकती हैं और न ही बोल सकती हैं। आज वह बैडमिंटन जगत की सुर्खियां बन चुकी हैं। जी हां, सुनने में अचरज भरा लग सकता है, लेकिन यह हकीकत है। आदित्या यादव वर्ष 2022 में ब्राजील डेफ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय फलक पर छा गईं। अब वह ब्राजील में 10 से 25 जुलाई के बीच होने वाले यूथ डेफ बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना दमखम दिखाएंगी।

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आदित्या यादव की सफलता में उनकी मेहनत तो है ही, उनके पिता दिग्विजयनाथ यादव का संघर्ष भी शामिल है। दिग्विजयनाथ खुद बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं और एनई रेलवे में बैडमिंटन कोच हैं। अपनी बेटी के बारे में बताते हुए वह भावुक हो गए।
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कहा कि आदित्या तीन भाई-बहनों में सबसे छोटी है। जब वह ढाई साल की हुई तब पता चला कि न तो वह बोल सकती है और न ही सुन सकती है। जब डॉक्टर ने जांच करने के बाद यह बात बताई तो वह सन्न रह गए। गोरखपुर के कई अस्पतालों में दिखाया, इसके बाद दिल्ली एम्स में भी बेटी का इलाज कराया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।
 

उन्होंने बताया कि इस बीच अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी राजीव बग्गा का ख्याल आया। बहुत चिंतन किया, सोचा कि अगर वह दिव्यांग होकर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन सकते हैं तो मेरी बेटी क्यों नहीं? बस यही टर्निंग प्वाइंट था। जब आदित्या चार साल की हुई तो उसे बैडमिंटन का प्रशिक्षण दिलाना शुरू करा दिया। उनके साथ ही वह रोजाना बैडमिंटन का प्रशिक्षण लेने लगी। इस बीच स्कूली शिक्षा चलती रहे, इसके लिए उसका प्रवेश राजेंद्र नगर स्थित मूक-बधिर विद्यालय में करा दिया।

 

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उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान जिला स्तर से शुरू करके स्टेट, नेशनल और अब इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में वह भाग लेते हुए मेडल जीतने लगी। तब लगा कि उनका फैसला सही था। जब पूरा देश उसके लिए तालियां बजाता है तो आंखों से खुशी के आंसू छलकते हैं। आदित्या, इस समय दिल्ली में प्रशिक्षण ले रही हैं। उनका सपना ओलंपिक के सिंगल में गोल्ड मेडल जीतने का है।
 

यहां मिले अंतरराष्ट्रीय मेडल

  • ब्राजील डेफ ओलंपिक: टीम इवेंट में गोल्ड मेडल
  • एशिया पैसेफिक डेफ यूथ बैडमिंटन चैंपियनशिप के अंडर 21 गर्ल डबल्स में गोल्ड, सिंगल में सिल्वर और मिक्स डबल में ब्रांच मेडल
  • एशिया पैसेफिक डेफ यूथ बैडमिंटन चैंपियनशिप वुमेंस डबल में गोल्ड और वुमेन सिंगल में ब्रांज मेडल

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प्रधानमंत्री कर चुके हैं सम्मानित

बैडमिंटन सनसनी बन चुकीं आदित्या की चमक देशभर में फैल चुकी है। आदित्या को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सम्मान दिया है। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आदित्या को पांच लाख रुपये देकर पुरस्कृत किया था।



 
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