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Gorakhpur News: ठेका और नौकरी दिलाने के नाम पर 27 लाख की ठगी का आरोप

Fri, 29 May 2026 02:28 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 29 May 2026 02:28 AM IST
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A man claiming to be an official of UPCDA and five others were booked for fraud.
गोरखपुर। शाहपुर क्षेत्र में सरकारी ठेका और नौकरी दिलाने का झांसा देकर 27 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पादरी बाजार निवासी एक व्यक्ति ने खुद को यूपीसीडा का असिस्टेंट कमिश्नर बताने वाले आरोपी समेत कई लोगों पर संगठित तरीके से रकम हड़पने का आरोप लगाया है। एसएसपी के आदेश पर पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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पादरी बाजार स्थित जंगल तिकोनिया नंबर-1 निवासी राजेश कुमार मणि त्रिपाठी ने एसएसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि सचिवालय आने-जाने के दौरान उनकी मुलाकात सर्वेश कुमार दीक्षित से हुई थी। आरोप है कि सर्वेश ने खुद को यूपीसीडा में तैनात अधिकारी बताते हुए कंबल और वेल्डिंग मशीन सप्लाई का बड़ा सरकारी ठेका दिलाने तथा बेटे की नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।
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पीड़ित के मुताबिक, आरोपी ने शुरुआत में छह लाख रुपये नकद मांगे। इसके बाद सर्वेश कुमार दीक्षित, वीरेंद्र और रंजन कुमार गुप्ता उनके घर पहुंचे और अलग-अलग कार्यों के नाम पर लगातार रकम लेते रहे। भरोसे में आकर उन्होंने जमीन बेचकर रखे रुपये भी आरोपियों को सौंप दिए।
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तहरीर में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने वेल्डिंग मशीन सप्लाई से जुड़े फर्जी ई-वे बिल और अन्य कागजात मोबाइल पर भेजे, जिससे उन्हें यकीन हो गया कि सरकारी काम प्रक्रिया में है। इसके बाद सर्वेश कुमार दीक्षित के कहने पर मधुपाल, सुनील दीक्षित, वीरेंद्र और रंजन कुमार समेत अन्य लोगों के खातों में आरटीजीएस के जरिये अलग-अलग तिथियों में करीब 21 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। नकद रकम मिलाकर कुल 27 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है।
पीड़ित का आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया। बाद में बीमारी और इलाज का बहाना बनाया गया। इतना ही नहीं, मैसेज भेजकर खुद को मृत बताने की कोशिश भी की गई। विरोध करने पर मोबाइल हैक कराने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। थाना प्रभारी राकेश कुमार रोशन ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।


पहले भी विवादों में रह चुका है आरोपी
शिकायत पत्र में यह भी कहा गया है कि सर्वेश कुमार दीक्षित पूर्व में बांदा में तैनाती के दौरान सरकारी जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में एफआईआर का सामना कर चुका है और निलंबित भी हुआ था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उसकी बहाली हुई और उसे सीतापुर में तैनाती के साथ श्रावस्ती में संबद्ध किया गया। पीड़ित ने बताया कि इस मामले में पहले भी शाहपुर थाने में शिकायत दी गई थी, जिसे जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज किया गया है।
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