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Gorakhpur News: अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू, मांगा गया स्पष्टीकरण

Sat, 21 Feb 2026 02:49 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sat, 21 Feb 2026 02:49 AM IST
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A case of infection following a cataract operation at New Rajesh Hospital, Sikriganj.
सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद संक्रमण का मामला
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एम्स नई दिल्ली में आंख निकलवाने के बाद घर पहुंचे एक और बुजुर्ग, जताई नाराजगी






गोरखपुर। सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में बीते एक फरवरी को मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद फैले संक्रमण के मामले में अब अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। डीएम की ओर से कार्रवाई की संस्तुति मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।



डीएम दीपक मीणा ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। लाइसेंस निरस्त किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की जांच में बैक्टिरिया से संक्रमण फैलने की पुष्टि हो चुकी है।
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एक फरवरी को आयुष्मान योजना के तहत न्यू राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में 30 मरीजों के मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। अगले दिन मरीजों की आंख में संक्रमण शुरू हो गया। अब तक 10 मरीजों के आंखें निकाली जा चुकी हैं और नौ की रोशनी जा चुकी है।
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आयुष्मान योजना के तहत उरुवा ब्लॉक के इन्नाडीह निवासी अर्जुन सिंह (80) की बायीं आंख के मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। संक्रमण फैलने के कारण एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने उनकी बायीं आंख निकाल दी। वह बृहस्पतिवार की रात घर आ गए। अर्जुन सिंह ने बताया कि ऑपरेशन के अगले दिन उनकी आंख में जलन, दर्द और मवाद के साथ उल्टी होने लगी। परिजन उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे और स्थिति से अवगत कराया।



इसके बाद उन्हें गोरखपुर के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से वाराणसी भेज दिया गया। वाराणसी में तीन दिन इलाज चला। सुधार नहीं होने पर एम्स दिल्ली भेज दिया गया। एम्स दिल्ली के डॉक्टरों ने दूसरी आंख में संक्रमण रोकने के लिए बायीं आंख निकाल दी। मंगलवार को वहां से डिस्चार्ज कर दिया गया। डॉक्टरों ने 23 फरवरी को चेकअप के लिए बुलाया है।



अर्जुन सिंह और उनके भाई विश्वनाथ सिंह ने कहा कि इस मामले में कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। 23 फरवरी को चेकअप कराकर आने के बाद अधिकारियों को शिकायत पत्र देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग करेंगे।







ऑपरेशन में जरा सी लापरवाही से जा सकती है आंखों की रोशनी



सर्जरी के बाद 24 घंटे तक विशेष सावधानी बरतना जरूरी







गोरखपुर। ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में जरा सी असावधानी मरीज की आंखों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि सबसे ज्यादा संक्रमण का खतरा उपकरणाें और लेंस से होता है। इसलिए जरूरी है कि ऑपरेशन के दौरान उपयोग किए जाने वाले उपकरणों को अच्छी तरह से सेनिटाइज करें और प्रत्यारोपित किए जाने वाले लेंस को संक्रमित होने से बचाएं। ओटी में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन होने से ही बचा जा सकता है।



वरिष्ठ नेत्र शल्य चिकित्सक डॉ. अश्विनी ने बताया कि मोतियाबिंद का ऑपरेशन सामान्यतः सुरक्षित प्रक्रिया है लेकिन अत्यंत दुर्लभ मामलों में ऑपरेशन के बाद आंख के अंदर गंभीर संक्रमण, जिसे एंडॉप्थाल्माइटिस कहा जाता है, हो सकता है। यह स्थिति आपातकालीन होती है और तत्काल उपचार आवश्यक होता है। सर्जरी के दौरान यदि मरीज की स्थिति, सांस लेने की गति या देखभाल में थोड़ी भी कमी रह जाए तो आंखों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे दृष्टि प्रभावित होने का खतरा रहता है।




वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डॉ. वाई सिंह ने बताया कि स्ट्रैपटोकोकस बैक्टीरिया आंख में इंफेक्शन का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है, इसमें तेजी से रोशनी कम होती है और इंफेक्शन बढ़ता है।
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