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हारेगा टीबी: गोरखपुर जिले में टीबी के 747 बाल रोगी, 99 को लिया गया गोद

Wed, 10 Mar 2021 04:17 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 10 Mar 2021 04:17 PM IST
सार

  • गोद लिए गए 42 बच्चे टीबी को हराकर बन चुके हैं टीबी चैंपियन
  • गोद लेकर बच्चों को टीबी से मुक्त करवाने की स्वास्थ्य विभाग की अपील

 

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99 TB children adopted in Gorakhpur district
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

गोरखपुर जिले में टीबी से पीड़ित 747 बाल रोगियों में से 99 अभी तक गोद लिये जा चुके हैं। इनमें से 42 बच्चे टीबी को हरा कर टीबी चैंपियन भी बन चुके हैं। गोद लिये गए 57 बच्चों का अब भी इलाज चल रहा है। यह जानकारी जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्रा ने दी। उन्होंने जनपद के समाज सेवियों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों से अपील की है कि वह टीबी के बाल रोगियों को गोद लेने के लिए आगे आएं और उनको स्वस्थ बनाने में मदद करें।

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जिला क्षय रोग अधिकारी का कहना है कि टीबी के बाल रोगी को गोद लेने का आशय दत्तक ग्रहण करने से बिल्कुल नहीं है। जिन बाल रोगियों को गोद लिया जाता है, उन्हें पोषक सामग्री देनी होती है और नियमित तौर पर उनका हालचाल लेना होता है। इलाज के दौरान पोषक तत्वों की आवश्यकता भी सबसे ज्यादा होती है।
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इलाज के दौरान मनोबल बढ़ाने और पोषकता का ध्यान रखने में गोद लेने की मुहिम कारगर साबित हो रही है। इसके लिए कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पूरे प्रदेश में मुहिम चला रखी है। टीबी के बाल रोगियों को गोद लेने वालों को किसी प्रकार की आर्थिक प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है और यह स्वेच्छा से दी गई सेवा है। ऐसे लोगों को जिला क्षय रोग विभाग इस आशय का प्रमाण पत्र भी जारी करता है।
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आत्मसंतुष्टि मिलेगी
सरदारनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरीओम पांडेय एक बाल रोगी को गोद ले चुके हैं। उनका कहना है कि उनके गोद लेने से बच्चे को लगातार चिकित्सक की निगरानी मिली। बच्चा स्वस्थ हो चुका है। इस कार्य में कोई अतिरिक्त मेहनत नहीं करनी पड़ती है। फोन से भी हालचाल ले सकते हैं। बाल रोगी के घर जा सकते हैं। उसे पोषक खाद्य पदार्थों की पोटली देनी होती है और मनोवैज्ञानिक संबल देना होता है। इस कार्य में आत्मसंतुष्टि मिलती है।

 

सबकी दुआ से ठीक हुआ बेटा

महानगर के अलीनगर की निवासी और नौ वर्षीय टीबी चैंपियन की मां लालती शर्मा ने बताया कि उनके बेटे को स्थानीय संस्था सेवामार्ग के प्रतिनिधि एचके शर्मा ने गोद लिया था। वह बच्चे का हालचाल लेते रहे। सीएमओ कार्यालय बुला कर खाने की पौष्टिक चीजें दी गईं। क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता आशा देवी, ट्रिटमेंट सुपरवाइजर गोविंद और मयंक ने उनकी काफी मदद की। आशा ने घर पर दवाएं पहुंचाईं। नतीजा यह हुआ कि अब उनका बेटा स्वस्थ हो चुका है और स्कूल भी जाने लगा है।

स्कूलों में भी चल रहा है अभियान
जिला पीपीएम-कोआर्डिनेटर अभय नारायण मिश्र ने बताया कि टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए जिला क्षय रोग अधिकारी और जिला कार्यक्रम समन्वयक धर्मवीर प्रताप सिंह के सहयोग से स्कूल-कालेज में अभियान चलाया जा रहा है। विश्व महिला दिवस पर कई कॉलेज में जाकर टीबी के बारे में बताया गया और बाल रोगियों को गोद लेने की अपील भी की गई।

बच्चों को टीबी से मुक्त कराएं
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुधाकर पांडेय ने कहा कि बच्चों को टीबी से मुक्ति दिलाना उनके लिए एक उज्जवल भविष्य की नींव रखने जैसा है। टीबी पीड़ित बच्चे की शिक्षा प्रभावित होती है। बच्चों की शीघ्र स्वस्थ होना आवश्यक है। सामाजिक लोगों और संगठनों को इस कार्य के लिए स्वतः आगे आना चाहिए।

 

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