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गोरखपुर सेंट एंथोनी स्कूल: CBSE के गाइडलाइन की आई याद, प्रवेश लिए 150 बच्चों को स्कूल से निकाला- भड़के अभिभावक
Sat, 22 Mar 2025 11:08 AM IST
रोहित सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, पादरी बाजार
संवाद न्यूज एजेंसी, पादरी बाजार
Published by: रोहित सिंह
Updated Sat, 22 Mar 2025 11:08 AM IST
सार
प्रधानाध्यापिका सिस्टर एलिजाबेथ ने कहा कि सीबीएसई की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। नोटिस बोर्ड पर विभाग की गाइडलाइन चस्पा की गई है। गाइडलाइन में बताया गया है कि एक कक्षा में सिर्फ 40 बच्चे ही रख सकते हैं।
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CBSE की इसी नोटिस के बारे में अभिभावकों को समाझाती प्रधानाचार्य और मौके पर जुटे पार्षद, पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
शाहपुर क्षेत्र के असुरन डेयरी कॉलोनी स्थित सेंट एंथोनी स्कूल में शुक्रवार को कक्षा एक से पांच के करीब 150 बच्चों का दाखिला निरस्त कर दिया गया। बच्चाें का नाम काटने की जानकारी होने पर स्कूल पहुंचे अभिभावकों ने जमकर हंगामा किया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन ने जान बूझकर कमजोर छात्रों को बाहर निकाला है।
इसे छिपाने के लिए बोर्ड की गाइडलाइन का हवाला दिया जा रहा है।वहीं, स्कूल प्रबंधन की तरफ से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा गया कि एक सेक्शन में केवल 40 बच्चों को ही रखना है, इसलिए बच्चों को निकालना पड़ा।
असुरन के डेयरी कॉलोनी स्थित सेंट एंथोनी स्कूल में शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे बच्चों को विद्यालय से निकालने की सूचना पर परिजन पहुंचे। वहां स्कूल की प्रधानाध्यापिका सिस्टर एलिजाबेथ से बातचीत कर बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं करने का अनुरोध किया, लेकिन जब बच्चों को स्कूल में दोबारा प्रवेश से मना किया गया तो इस पर अभिभावकों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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अभिभावकों का आरोप है कि बिना किसी सूचना दिए उनके बच्चों का नाम काटकर बाहर निकाल दिया गया। स्कूल पहुंचने पर विद्यालय प्रशासन ने कहा कि अपने बच्चों का किसी दूसरे स्कूल में एडमिशन करा लें। हंगामा की सूचना पर शाहपुर थाने की पुलिस ने विद्यालय पहुंचकर लोगों को समझाकर शांत कराया।
स्कूल पहुंचे अभिभावक विनोद कुमार, प्रियंका सिंह एकता देवी समेत 15 लोगों ने कहा कि उनके बच्चों को विद्यालय प्रशासन ने बिना वजह विद्यालय से निकाल दिया है। लोगों ने कहा कि दूसरी जगह वह कहां जाएं विद्यालय प्रशासन को उनके दर्द को समझना चाहिए।
अगर बोर्ड की गाइडलाइन का ही पालन करना था तो पहले ही करते और प्रवेश नहीं लेते। एक क्लास में कितने बच्चे होने चाहिए, ये नियम बहुत पुराना है। ये मनमानी है। बच्चों का प्रवेश नहीं लिया गया तो इसकी शिकायत सरकार से की जाएगी।
स्कूल की प्रधानाध्यापिका सिस्टर एलिजाबेथ ने कहा कि सीबीएसई की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। नोटिस बोर्ड पर विभाग की गाइडलाइन चस्पा की गई है। गाइडलाइन में बताया गया है कि एक कक्षा में सिर्फ 40 बच्चे ही रख सकते हैं। उससे अधिक सेक्शन बनाकर बच्चों को रखने के लिए 500 वर्ग फीट जमीन में कमरे होना चाहिए जो उनके पास उपलब्ध नहीं है। इसलिए ये सब करना पड़ रहा है।
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इसे छिपाने के लिए बोर्ड की गाइडलाइन का हवाला दिया जा रहा है।वहीं, स्कूल प्रबंधन की तरफ से केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा गया कि एक सेक्शन में केवल 40 बच्चों को ही रखना है, इसलिए बच्चों को निकालना पड़ा।
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असुरन के डेयरी कॉलोनी स्थित सेंट एंथोनी स्कूल में शुक्रवार की सुबह करीब 10 बजे बच्चों को विद्यालय से निकालने की सूचना पर परिजन पहुंचे। वहां स्कूल की प्रधानाध्यापिका सिस्टर एलिजाबेथ से बातचीत कर बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं करने का अनुरोध किया, लेकिन जब बच्चों को स्कूल में दोबारा प्रवेश से मना किया गया तो इस पर अभिभावकों ने हंगामा शुरू कर दिया।
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अभिभावकों का आरोप है कि बिना किसी सूचना दिए उनके बच्चों का नाम काटकर बाहर निकाल दिया गया। स्कूल पहुंचने पर विद्यालय प्रशासन ने कहा कि अपने बच्चों का किसी दूसरे स्कूल में एडमिशन करा लें। हंगामा की सूचना पर शाहपुर थाने की पुलिस ने विद्यालय पहुंचकर लोगों को समझाकर शांत कराया।
स्कूल पहुंचे अभिभावक विनोद कुमार, प्रियंका सिंह एकता देवी समेत 15 लोगों ने कहा कि उनके बच्चों को विद्यालय प्रशासन ने बिना वजह विद्यालय से निकाल दिया है। लोगों ने कहा कि दूसरी जगह वह कहां जाएं विद्यालय प्रशासन को उनके दर्द को समझना चाहिए।
अगर बोर्ड की गाइडलाइन का ही पालन करना था तो पहले ही करते और प्रवेश नहीं लेते। एक क्लास में कितने बच्चे होने चाहिए, ये नियम बहुत पुराना है। ये मनमानी है। बच्चों का प्रवेश नहीं लिया गया तो इसकी शिकायत सरकार से की जाएगी।
स्कूल की प्रधानाध्यापिका सिस्टर एलिजाबेथ ने कहा कि सीबीएसई की गाइडलाइन का पालन किया जा रहा है। नोटिस बोर्ड पर विभाग की गाइडलाइन चस्पा की गई है। गाइडलाइन में बताया गया है कि एक कक्षा में सिर्फ 40 बच्चे ही रख सकते हैं। उससे अधिक सेक्शन बनाकर बच्चों को रखने के लिए 500 वर्ग फीट जमीन में कमरे होना चाहिए जो उनके पास उपलब्ध नहीं है। इसलिए ये सब करना पड़ रहा है।