एंटीजन से निगेटिव आने के बाद बेपरवाह न रहें लोग, बरतें एहतियात
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोरखपुर में अगर एंटीजन किट से कोरोना जांच में आप निगेटिव हैं, तो इस गफलत में न रहें कि यह रिपोर्ट 100 प्रतिशत सही है। एंटीजन से जांच में निगेटिव आने वाले 15 प्रतिशत लोगों की रिपोर्ट आरटीपीसीआर जांच में पॉजिटिव आ रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े इसकी तस्दीक भी कर रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी विभाग भी एंटीजन टेस्ट से पूरी तरह से संतुष्ट नहीं है। वह आरटीपीसीआर की जांच को 99 प्रतिशत सही मान रहे हैं, जबकि एंटीजन को 85 प्रतिशत। यही वजह है कि विशेषज्ञ एंटीजन किट से निगेटिव आने वालों की आरटीपीसीआर से जांच करने की सलाह दे रहे हैं।
कोरोना महामारी के बीच विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाया है। जांच बढ़ने में एंटीजन किट का विशेष योगदान है। प्रतिदिन एंटीजन किट से 100 से अधिक लोग पॉजिटिव आ रहे हैं। इसके अलावा निगेटिव आने वालों की संख्या भी इससे कही ज्यादा है। लेकिन जिन लोगों की रिपोर्ट एंटीजन किट से निगेटिव आ रही है, उनकी दोबारा जांच आरटीपीसीआर से हो रही है। आरटीपीसीआर की जांच में पांच से 15 प्रतिशत लोग पॉजिटिव मिल रहे हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि एंटीजन किट से जांच पर अब तक कोई सवाल तो नहीं खड़े हुए हैं, लेकिन यह जरूर है कि किट से निगेटिव आने वाले 100 में 15 लोग आरटीपीसीआर से जांच में पॉजिटिव मिल रहे हैं। ऐसे में जिन लोगों की रिपोर्ट किट से निगेटिव आ रही है, वह बेपरवाह न रहें। जब तक उनकी जांच की रिपोर्ट आरटीपीसीआर से नहीं आ जाती, तब तक एहतियात बरतें।
एंटीजन किट से जांच सस्ती, आरटीपीसीआर की महंगी
डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि एंटीजन किट से जांच बेहद सस्ती है। एक किट की कीमत करीब 500 रुपये के आसपास है। इसमें समय की भी बचत है। इसकी रिपोर्ट महज पांच से 10 मिनट के अंदर पता चल जाती है। हालांकि इसकी रिपोर्ट 85 प्रतिशत तक अब तक सही आंकी गई है।
यह एक अच्छी बात है, क्योंकि कंपनी ने 65 से 70 फीसदी तक रिपोर्ट की प्रमाणिकता की बात कही थी। वहीं, आरपीटीसीआर से जांच में करीब 1500 रुपये का खर्च आता है। इसकी रिपोर्ट 99 प्रतिशत तक सही है। एक जांच में करीब दो से तीन घंटे लग जाते हैं।
एंटीजन टेस्ट को इस तरह समझें
एंटीजन किट से जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति में वायरस का कोई प्रोटीन तो नहीं। यदि वह मौजूद रहता है तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। लेकिन इसकी प्रमाणिकता थोड़ी कम होती है। यही वजह है कि निगेटिव आने पर आरटीपीसीआर से भी जांच होती है।
आरटीपीसीआर में स्वैब से होती है जांच
आरटीपीसीआर या रियल टाइम पीसीआर टेस्ट के लिए स्वाब सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में वायरस आरएनए जीनोम का पता लगाया जाता है। नाक और गले के दो ऐसे हिस्से होते हैं, जहां पर वायरस के मौजूद होने की आशंका सबसे अधिक रहती है। स्वैब से इन्हीं कोशिकाओं के जरिए वायरस का पता लगाया जाता है। स्वैब की जांच आरटीपीसीआर मशीन से होती है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने कि एंटीजन किट की जांच और आरटीपीसीआर की जांच में जमीन आसमान का अंतर है। एंटीजन की जांच में रिपोर्ट 85 प्रतिशत तक सही आंकी गई है। यही वजह है कि एंटीजन से निगेटिव आने वालों की जांच आरटीपीसीआर से की जा रही है। जबकि आरटीपीसीआर की जांच 99 प्रतिशत तक सही है। आरटीपीसीआर की जांच पर भरोसा ज्यादा है।