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Gorakhpur News: नदी की तेज धारा देख पहाड़ की ओर भागे 130 लोग...सामने ही बह गया साथी

Sun, 06 Sep 2026 02:30 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 02:30 AM IST
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130 people ran towards the mountains upon seeing the river's swift current... a companion was swept away right before their eyes.

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गोरखपुर। नेपाल में आए जलप्रलय में अभी भी बहुत सारे लापता हैं, पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने मौत को करीब से देखा है और सकुशल घर वापसी हो गई। इनमें से एक गोरखपुर के पिपराइच निवासी आशुतोष उपाध्याय हैं। वे रसुवा के त्रिशूली इलेक्ट्रिक हाइड्रो पावर में काम कर रहे थे। बोले, अचानक एक कर्मचारी बोला, भागो-बहुत तेज नदी बढ़ रही है। इसके बाद सभी लोग भागने लगे। नदी की तेज होती धारा देखकर मैं और करीब 130 लोग जान बचाने के लिए पहाड़ की ओर भागे। हम लोग तो बच गए पर एक साथी सामने ही बह गया और उसे हमें बचा नहीं पाए।

नगर पंचायत पिपराइच के वार्ड नंबर 8, मुंडेरी गढ़वा निवासी विनोद कुमार उपाध्याय के 23 वर्षीय बेटे आशुतोष मणि उपाध्याय 18 मई को रसुवा के त्रिशूली इलेक्ट्रिक हाइड्रो पावर में पाइपलाइन मैन का काम करने गए थे। आपबीती बताते हुए आशुतोष सिहर उठे। बोले, ऐसी तबाही थी कि कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें, बचेंगे या नहीं, यह भी कहना मुश्किल था। आंखों के सामने उनका एक साथी तेज धारा की चपेट में आकर बह गया तो सभी डर गए। पहाड़ पर पहुंचकर एक पेड़ के नीचे सभी रुके ओर किसी तरह रात गुजारी। खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं था और नीचे उफनती नदी मौत का सैलाब बनी हुई थी। हर पल डर लगा रहता था कि कहीं पहाड़ का हिस्सा भी न खिसक जाए।
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करीब 24 घंटे तक हम लोग पहाड़ पर फंसे रहे। इसी दौरान आसमान में सेना का हेलिकाॅप्टर दिखाई दिया। हेलिकॉप्टर देखते ही लोगों में उम्मीद जगी कि अब शायद जिंदगी बच जाएगी। आशुतोष कहते हैं, हेलिकॉप्टर नजर आया तो उस पल की खुशी शब्दों में बयां नहीं कर सकते। उस दिन हमें खाने का पैकेट मिला। सेना ने त्रिशूली आर्मी कैंप में पहुंचाया। वहां से कंपनी के मैनेजर अशोक थापा हमें काठमांडू लेकर आए। दो दिन बाद हम लोगों को रक्सौल बार्डर के रास्ते से कप्तानगंज, कुशीनगर छोड़ दिया गया। वहां से हम 29 अगस्त घर आ गए।
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बेटे का फोन आया तो जान में जान आई
आशुतोष के पिता विनोद बेहद भावुक हैं। बोले, नेपाल की त्रासदी का समाचार सुनकर दिल दहल गया। कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। दो दिन बाद जब बेटे ने फोन करके बताया कि हम सुरक्षित हैं और घर आ रहे हैं तो जान में जान आई
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