Raj Khosla: मजरूह सुल्तानपुरी, आनंद बख्शी और ऋषिकेश मुखर्जी थे करीबी दोस्त, राज खोसला की बेटी ने किए कई खुलास
Raj Khosla Birthday Special: निर्देशक राज खोसला की बेटी सुनीता भल्ला ने उनकी 100वीं जयंती पर कई खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक राज खोसला के लिए सिनेमा ही सबकुछ था। आइए जानते हैं राज खोसला के कई किस्से।
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फिल्म निर्माता राज खोसला का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 31 मई 1925 को हुआ था। राज खोसला की बेटी सुनीता भल्ला ने उनके बारे में कई बड़े खुलासे किए हैं। सुनीता भल्ला ने बताया है कि राज खोसला के लिए सिनेमा सबकुछ था। वह अंत तक काम करते रहे। निर्देशक की पांच बेटियों में से दूसरी सुनीता ने कहा कि विरासत एक ऐसी चीज थी जिसके बारे में खोसला ने कभी नहीं सोचा या अपने परिवार से भी इस बारे में बात नहीं की।
अपने काम पर कभी पछतावा नहीं हुआ
सुनीता ने पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में कहा 'उन्होंने कभी विरासत के बारे में नहीं सोचा या बात नहीं की। उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया कि वह अपने पीछे क्या छोड़कर जा रहे हैं। उन्होंने बस काम किया और काम किया। उन्हें अपने काम पर कभी पछतावा नहीं हुआ। उन्हें अपना काम बहुत पसंद था। वह अंत तक जो करते रहे, उससे बहुत खुश थे। सिनेमा उनके लिए सबकुछ था।'
साथियों का ख्याल रखते थे खोसला
सुनीता ने बताया 'खोसला अपने साथ काम करने वाले लोगों का बहुत ख्याल रखते थे और अपने सेट पर शांत माहौल बनाए रखते थे। 'वह अपने काम का आनंद लेते थे और यही सबसे अच्छी बात थी... सितारे उनके साथ काम करने का आनंद लेते थे। वह कहते थे अपना सर्वश्रेष्ठ दो। हर कोई उनके साथ बहुत खुशी से काम करता था। उन्होंने मधुबाला, साधना, मुमताज, वहीदा रहमान और आशा पारेख जैसी कई अभिनेत्रियों के साथ काम किया।'
मजरूह सुल्तानपुरी और आनंद बख्शी थे दोस्त
राज खोसला कवि गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी, गीतकार आनंद बख्शी, फिल्म निर्माता ऋषिकेश मुखर्जी और लेखक राही मासूम रजा के भी करीबी दोस्त थे। इस पर बेटी सुनीता ने कहा 'उस समय मेरी उम्र शायद 14 या 15 साल रही होगी। बहुत सारे अच्छे पल थे... राही मासूम रजा उनके करीबी दोस्त थे। उनका मजरूह सुल्तानपुरी और ऋषिकेश मुखर्जी के साथ भी एक रिश्ता था। ऋषिकेश मुखर्जी के साथ, वे हर रोज शतरंज खेलते थे। शाम को वे इसी तरह अपना समय बिताते थे।'
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परिवार के साथ बिताते थे वक्त
सुनीता ने बताया 'एक पिता के तौर पर उन्होंने अपनी पांचों बेटियों के लिए कुछ नियम बनाए थे और सप्ताहांत को हमेशा "पारिवारिक समय" के तौर पर आरक्षित रखा था। वह सुनिश्चित करते थे कि शाम सात बजे हम सभी पांचों घर में हों। हर शनिवार, रविवार को हम अपने पुश्तैनी घर में पारिवारिक समय बिताते थे। मेरे दादाजी वहां होते थे और हमारे लिए सारा सामान तैयार रखते थे। हम वहां बिरयानी खाते थे और उसका लुत्फ उठाते थे।
बतौर निर्देशक दीं बेहतरीन फिल्में
आपको बता दें बतौर निर्देशक राज खोसला ने 25 से अधिक फिल्में बनाईं। इसमें 'सीआईडी', 'बॉम्बे का बाबू' और 'मेरा गांव मेरा देश', 'वो कौन थी?' (1964), 'मेरा साया' (1966), 'मेरा गांव मेरा देश' (1971) और 'दोस्ताना' (1980) जैसी कई हिट फिल्में शामिल हैं। शनिवार को उनकी 100वीं जयंती मनाई जा रही है।