{"_id":"69669fba81d51adf7a00efe4","slug":"kaifi-azmi-107-birth-anniversary-special-read-his-famous-tale-and-know-about-personal-life-2026-01-14","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"11 की उम्र में लिखी पहली गजल, गाने लिखने के अलावा किया अभिनय; बेहद गरीबी में की शौकत से शादी","category":{"title":"Entertainment","title_hn":"मनोरंजन","slug":"entertainment"}}
11 की उम्र में लिखी पहली गजल, गाने लिखने के अलावा किया अभिनय; बेहद गरीबी में की शौकत से शादी
Wed, 14 Jan 2026 01:10 AM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Wed, 14 Jan 2026 01:10 AM IST
सार
Kaifi Azmi Birth Anniversary: मशहूर शायर और लिरिसिस्ट कैफी आजमी ने फिल्मों में गाने लिखने के अलावा डायलॉग लिखे हैं और अभिनय किया है। उनकी लव लाइफ काफी दिलचस्प रही है।
विज्ञापन
कैफी आजमी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मशहूर शायर और हिंदी फिल्मों के दिग्गज लिरिसिस्ट कैफी आजमी की आज 107वीं बर्थ एनिवर्सरी है। भले ही कैफी आजमी 2002 में इस दुनिया को अलविदा कह गए हों लेकिन उनके गाने आज भी हमारे दिलों में जिंदा हैं। उन्होंने प्यार-मोहब्बत के अलावा कई दूसरे विषयों पर बेहतरीन गाने लिखे हैं। आज उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर आइए जानते हैं उनसे जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।
आंदोलन की वजह से छोड़ी पढ़ाई
कैफी आजमी की पैदाइश 14 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ में हुई। साल 1942 में कैफी आजमी ने भारत छोड़ो आंदोलन के चलते अपनी पर्शियन और उर्दू की पढ़ाई छोड़ दी। उस वक्त तक वह एक मशहूर शायर के रूप में जाने जाने लगे थे। वह प्रोग्रेसिव राइटर थे। उन्होंने शौकत आजमी से शादी की थी। उनकी एक बेटी बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी हैं।
विज्ञापन
आंदोलन की वजह से छोड़ी पढ़ाई
कैफी आजमी की पैदाइश 14 जनवरी 1919 को उत्तर प्रदेश के जिला आजमगढ़ में हुई। साल 1942 में कैफी आजमी ने भारत छोड़ो आंदोलन के चलते अपनी पर्शियन और उर्दू की पढ़ाई छोड़ दी। उस वक्त तक वह एक मशहूर शायर के रूप में जाने जाने लगे थे। वह प्रोग्रेसिव राइटर थे। उन्होंने शौकत आजमी से शादी की थी। उनकी एक बेटी बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी हैं।
विज्ञापन
कैफी आजमी
- फोटो : सोशल मीडिया
11 साल की उम्र में लिखी पहली गजल
कैफी आजमी को बचपन से लिखने का शौक था। जब वह महज 11 साल के थे, तो उन्होंने एक मुशायरे में शिरकत की। यहां उन्होंने 'इतना तो जिंदगी में किसी के खलल पड़' गजल पढ़ी। इसे लोगों ने खूब पसंद किया। कैफी आजमी के पिता को लगा कि उन्होंने अपने बड़े भाई की गजल पढ़ी है। इसके बाद पिता ने उनका टेस्ट लिया कि क्या यह गलज कैफी ने खुद लिखी है? कैफी आजमी इसमें पास हो गए।
बतौर एक्टर किया काम
कैफी आजमी ने फिल्मों में लिरिसिस्ट के अलावा एक लेखक और एक्टर के तौर पर काम किया है। उन्होंने सबसे पहले फिल्म 'बुजदिल' के लिए लिरिक्स लिखे। उन्होंने एक लेखक के तौर पर सबसे अच्छा काम 'हीर रांझा' में किया। उन्होंने इस फिल्म के डायलॉग लिखे थे, जो शायरी के रूप में थे। साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'नसीम' में उन्होंने अदाकारी भी की। इसमें उन्होंने नसीम के दादा का रोल किया था।
कैफी आजमी को बचपन से लिखने का शौक था। जब वह महज 11 साल के थे, तो उन्होंने एक मुशायरे में शिरकत की। यहां उन्होंने 'इतना तो जिंदगी में किसी के खलल पड़' गजल पढ़ी। इसे लोगों ने खूब पसंद किया। कैफी आजमी के पिता को लगा कि उन्होंने अपने बड़े भाई की गजल पढ़ी है। इसके बाद पिता ने उनका टेस्ट लिया कि क्या यह गलज कैफी ने खुद लिखी है? कैफी आजमी इसमें पास हो गए।
'आप गाली तो देंगी न?', कास्टिंग से पहले विशाल भारद्वाज ने पूछा यह सवाल, मजेदार था फरीदा जलाल का जवाब
बतौर एक्टर किया काम
कैफी आजमी ने फिल्मों में लिरिसिस्ट के अलावा एक लेखक और एक्टर के तौर पर काम किया है। उन्होंने सबसे पहले फिल्म 'बुजदिल' के लिए लिरिक्स लिखे। उन्होंने एक लेखक के तौर पर सबसे अच्छा काम 'हीर रांझा' में किया। उन्होंने इस फिल्म के डायलॉग लिखे थे, जो शायरी के रूप में थे। साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'नसीम' में उन्होंने अदाकारी भी की। इसमें उन्होंने नसीम के दादा का रोल किया था।
कैफी आजमी, शबाना आजमी
- फोटो : सोशल मीडिया
गजल सुनकर दिल दे बैठी थीं शौकत आजमी
एक बार शौकत आजमी मुशायरा सुनने गईं। यहां कैफी आजमी ने गजल 'उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे' पढ़ी। यह गजल शौकत को इतनी अच्छी लगी कि वह उन्हें दिल दे बैठीं। कैफी आजमी से शादी के लिए जब शौकत के पिता और भाई उन्हें देखने मुंबई आए तो उन्होंने उनकी फक्कड़ हालत देखकर शादी से इनकार कर दिया। हालांकि शौकत आजमी नहीं मानीं और उन्ही से शादी की।
गरीबी में भी शौकत ने नहीं छोड़ा साथ
कैफी आजमी की जब शौकत से शादी हुई तो उनके पास बेड भी नहीं था। दोनों ने पहली रात दरी पर गुजारी। एक बार शौकत की चप्पल टूट गई। उन्होंने इसे कैफी को बनवाने के लिए दी। कैफी को जब देर हो गई तो शौकत दूसरी टूटी चप्पल पहनकर किसी काम से लोकल ट्रेन में गईं। जब ट्रेन चलने वाली थी तो कैफी आजमी कुर्ते में चप्पल छिपाकर स्टेशन पहुंचे और चलती ट्रेन में शौकत को दी। शौकत पहले तो काफी गुस्से में थीं लेकिन शौकत के परेशान और शर्मिंदा चेहरे को देखकर गुस्सा भूल गईं।
एक बार शौकत आजमी मुशायरा सुनने गईं। यहां कैफी आजमी ने गजल 'उठ मेरी जान मेरे साथ ही चलना है तुझे' पढ़ी। यह गजल शौकत को इतनी अच्छी लगी कि वह उन्हें दिल दे बैठीं। कैफी आजमी से शादी के लिए जब शौकत के पिता और भाई उन्हें देखने मुंबई आए तो उन्होंने उनकी फक्कड़ हालत देखकर शादी से इनकार कर दिया। हालांकि शौकत आजमी नहीं मानीं और उन्ही से शादी की।
गरीबी में भी शौकत ने नहीं छोड़ा साथ
कैफी आजमी की जब शौकत से शादी हुई तो उनके पास बेड भी नहीं था। दोनों ने पहली रात दरी पर गुजारी। एक बार शौकत की चप्पल टूट गई। उन्होंने इसे कैफी को बनवाने के लिए दी। कैफी को जब देर हो गई तो शौकत दूसरी टूटी चप्पल पहनकर किसी काम से लोकल ट्रेन में गईं। जब ट्रेन चलने वाली थी तो कैफी आजमी कुर्ते में चप्पल छिपाकर स्टेशन पहुंचे और चलती ट्रेन में शौकत को दी। शौकत पहले तो काफी गुस्से में थीं लेकिन शौकत के परेशान और शर्मिंदा चेहरे को देखकर गुस्सा भूल गईं।
कैफी आजमी
- फोटो : अमर उजाला
कैफी आजमी को कौन से अवॉर्ड मिले?
कैफी आजमी को पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।
उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी से अवॉर्ड मिल चुका है।
'आवारा सजदे' के लिए साहित्य अकादमी अवॉर्ड फॉर उर्दू मिला है।
महाराष्ट्र उर्दू अकादमी का स्पेशल अवॉर्ड, सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड मिला है।
एफ्रो-एशियन राइटर असोसिएशन की तरफ से लोटस अवॉर्ड मिला है।
कैफी आजमी को पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।
उन्हें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी से अवॉर्ड मिल चुका है।
'आवारा सजदे' के लिए साहित्य अकादमी अवॉर्ड फॉर उर्दू मिला है।
महाराष्ट्र उर्दू अकादमी का स्पेशल अवॉर्ड, सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड मिला है।
एफ्रो-एशियन राइटर असोसिएशन की तरफ से लोटस अवॉर्ड मिला है।