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देश की पहली महिला कव्वाल की कहानी पूरी दुनिया को सुनाएंगे बोनी कपूर, गैस कांड में चली गई थी आवाज

Wed, 15 Aug 2018 07:13 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Wed, 15 Aug 2018 07:13 PM IST
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boney kapoor will make biography of shakila india's first lady qawwali singer
shakeela bhopali singer

साल 1942 मेंए तहजीब, इतिहास और कलाकारों के लिए मशहूर शहर भोपाल ने इस देश को ऐसी विरासत दी, जिसने ना सिर्फ कला के क्षेत्र में अपने नाम का बुलंदी से झंडा गाड़ा, बल्कि कला के क्षेत्र में महिलाओं को एक ऊंचा दर्जा दिलवाया, इज्जत दिलवाई, हौसलाअफजाई करवाई। हम बात कर रहे हैं, भारत की पहली महिला कव्वाल शकीला बानो भोपाली की। 

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शकीला ने उस दौर में मर्दों के हाथों से कव्वाली छीनकर उसे महिला की आवाज दी, उसे एक नया क्लेवर दिया, जिसके बारे में देश के कव्वालों ने भी ना कभी सोचा था, ना कभी उम्मीद की थी। ये आजाद भारत के उस दौर की बात है, जब महिलाओं को घर की चौखट के बाहर कदम तक नहीं रखने दिया जाता था। शकीला के वालिद, उनके चच्चा शायर थे, छोटी सी शकीला दिनभर घर में शेरों-शायरी सुना करती थीं। घर में रोज जुटने वाली इस महफिल ने शकीला के अंदर शायरी और कव्वाली के प्रति कभी ऐसा प्रेम जगा दिया था जिसके दम पर वो देश की पहली महिला शायर और कव्वाल बनीं। हालांकि शकीला के लिए इस मुकाम को पाना बेहद मुश्किल था। 
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शकीला ने मशहूर शायर निदा फाजली को दिए एक इंटरव्यू में कहा था की जब उन्होंने कव्वाल बनने की इच्छा घर वालों को बताई तो उनके घरवालों ने ही इसका पुरजोर विरोध किया। किसी ने उन्हें जान से मारने की धमकी दे डाली तो किसी ने उन्हें हाथ पैर तोड़ डालने की धमकी दी। मगर शकीला रुकने वाली कहां थी। उनकी गाई कव्वाली की आवाज, उनके घरों की दीवारों को चीरते हुए भोपाल की हर गली, हर घर में जा घुसी। और लंबे संघर्ष के बाद उन्हें स्टेज पर गाने के मौका भी मिला।
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दिलीप कुमार ने शकीला को बुलाया था अपने घर

1950 के दशक में शकीला बॉलीवुड के संपर्क में आईं। दिलीप कुमार ने उन्हें अपने घर मुंबई बुलाया और यहीं से शकीला सफलता के ऐसे सफर पर निकलीं जहां से उन्होंने कभी पीछे मुड़ के नहीं देखा। उन्होंने कई फिल्में में कव्वाली गाई। 1957 में जगमोहन मट्टो ने उन्हें फिल्म जागीर में एक्टिंग का मौका दिया। 80 के दशक की शुरुआत में शकीला भोपाल लौट गईं। 1984 में भोपाल गैस त्रास्दी हुई। यूनियन कार्बोनाइट के इस जहर ने जहां लाखों जिंदगियां तबाह कर दीं। तो वहीं शकीला बानों की आवाज उनसे छीन ली। इसके बाद शकीला बीमार रहने लगीं। उन्हें अस्थमा हो गया। 
 

अंतिम दिनों में जैकी श्रॉफ ने दिया था शकीला का साथ

इस दौर में उनका साथ दिया एक्टर जैकी श्रॉफ ने। लेकिन अपनी आवाज खो चुकीं शकीला बानों के लिए बिना कुछ गाए एक-एक दिन बिताना मुश्किल हो गया था। 16 दिसंबर 2002 को वो इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ कर चली गईं। अब शकीला बानो भोपाल की कहानी को पूरी दुनिया सुनाने का जिम्मा उठाया है, फिल्मकार बोनी कपूर ने। बोनी कपूर ने शकीला बानों पर बायोपिक बनाने का ऐलान किया है।
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